नौकरी फोकस


In Depth Job Focus Volume-20

 

रक्षा सेवाओं में महिलाओं के लिए करिअर

रुचि श्रीमली

भारतीय सशस्त्र बल की प्रथम लेफ्टिनेंट जनरल एवं भारतीय नौसेना की प्रथम वाइस एडमिरल पुनीता अरोड़ा ने 1963 में सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (ए.एफ.एम.सी.) पुणे में ज्वाइन किया था। उन्होंने अपने बैच में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। 2004 में वह ए.एफ.एम.सी. की कमांडेंट बनने वाली प्रथम महिला अधिकारी थीं। 1992 में भारतीय सेना ने महिलाओं को सेवाओं में स्वीकार करना प्रारंभ किया था। चेन्नै में अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओ.टी.ए।) में जाने वाली प्रथम 25 प्रथम कैडटों में से एक प्रिया झिंगन ने हंसते हुए कहा, ‘‘हमारे कमांडिंग ऑफिसर ने, जब हमारे ट्रंक और अनुरोधों की सूची - गर्म पानी, ट्यूब लाइट एवं एक सैलून देखा तो उन्होंने जमीन पर अपना पैर ही पटक दिया,’’ सपेर शांति टिग्गा ने 2011 में भारतीय सेना की प्रथम महिला जवान बन कर एक अन्य परम्परा को तोड़ा। उस समय वह 25 वर्ष की आयु की थीं और उनके दो बच्चे थे, तथा उन्होंने शारीरिक उपयुक्तता परीक्षा में अपने सभी पुरुष प्रतिद्वंदियों को पछाड़ा था।

भारतीय नौसेना को 2009 में उस समय अपनी दो प्रथम महिला योधी मिलीं, जब सब-लेफ्टिनेंट अंबिका हुडा और सीमा रानी नौसेना की प्रथम महिला एयरबोर्न टेक्निशियन बनीं। उस समय वे दोनों 22 वर्ष की आयु की थीं। 27 वर्षीय लेफ्टिनेंट किरण शेखावत मेवात, हरियाणा से हैं। जून 2016 में अपनी ड्यूटी का निर्वहन करते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाली वह पहली महिला नौसेना अधिकारी थीं। 2016 में मोहना सिंह, भावना कंठ और अवनि चतुर्वेदी को भारत की प्रथम महिला फाइटर पायलटों के रूप में भारतीय वायु सेना में कमीशन दिया गया।

लिंग समानता को संभव बनाने के उद्देश्य के साथ भारतीय रक्षा सेवाओं में महिलाओं के लिए नए अवसर खोल दिए हैं और अपनी मानसिक क्षमता प्रमाणित करने के लिए महिलाएं अधिकाधिक संख्या में सामने आ रही हैं।

महिलाओं के लिए उपलब्ध अवसर

भारतीय सशस्त्र बल की चार व्यावसायिक वर्दी सेवाएं हैं:- भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय तट रक्षक।

इनके अतिरिक्त विभिन्न अर्ध-सैनिक संगठन एवं अंतर-सेवा संस्थाएं हैं जो नेटवर्क का भाग हैं।

भारतीय सेना में

सशस्त्र बलों में कमीशन प्राप्त अधिकारी संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.) द्वारा संचालित दो मुख्य अखिल भारतीय परीक्षाओं के माध्यम से प्रवेश प्राप्त करते हैं।

*राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एन.डी.ए.) और नौसेना रक्षा अकादमी (एन.ए.) परीक्षा: यह अभी तक महिला उम्मीदवारों के लिए नहीं खुली हैं।

*सम्मिलित रक्षा सेवा (सी.डी.एस.) परीक्षा: एक वर्ष में दो बार संचालित की जाती है, स्नातक या स्नातक परीक्षा के अंतिम वर्ष में बैठे उम्मीदवार इस परीक्षा में बैठक सकते हैं। लड़कियां अभी केवल अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओ.टी.ए.) के लिए पात्र हैं। भारतीय सैन्य अकादमी (आई.एम.ए.), भारतीय नौसेना अकादमी (आई.एन.ए.) और भारतीय वायु सेना अकादमी (ए.एफ.ए.) केवल लडक़ों के लिए है।

महिलाएं निम्नलिखित के माध्यम से भारतीय सेना में भी प्रवेश ले सकती हैं:-

*राष्ट्रीय कैडेट कोर (एन.सी.सी.) विशेष प्रवेश परीक्षा: 19 से 25 वर्ष की आयु की अविवाहित महिलाएं, जिन्होंने अपनी स्नातक डिग्री, न्यूनतम कुल 50' अंकों के साथ उत्तीर्ण की है और एन .सी .सी . वरिष्ठ डिवीजन (सेना) में दो वर्ष की सेवा पूरी कर ली है तथा सीप्रमाणपत्र परीक्षा में न्यूनतम बीग्रेड रखती हैं, परीक्षा में बैठ सकती हैं।

*जज एडवोकेट जनरल (जे.ए.जी.) प्रवेश परीक्षा न्यूनतम 55' अंकों के साथ विधि स्नातक (एलएल.बी.) योग्यता रखने वाली अविवाहिता जिनकी आयु 21 से 27 वर्ष के बीच है, भारतीय राज्य बार परिषद में पंजीकरण कराने के लिए पात्र हैं।

*महिलाओं के लिए अल्प सेवा कमीशन (तकनीकी) कार्य: 20 से 27 वर्ष की आयु की अविवाहित महिला इंजीनियर महिलाओं के लिए एस .एस .सी . (टेक .) पदों के लिए आवेदन कर सकती हैं।

एस.एस.सी.-टेक और गैर-टेक पदों के लिए रक्षा कार्मिकों की विधवाएं भी आवेदन कर सकती हैं। भले ही उनके बच्चे हों, किंतु उन्होंने पुनर्विवाह नहीं किया हो। ऐसी उम्मीदवारों के लिए उच्च आयु-सीमा 4 वर्ष तक शिथिलनीय है।

चयन के उद्देश्य से उम्मीदवारों को सेवा चयन बोर्ड (एस.एस.बी.) साक्षात्कार, मनोवैज्ञानिक अभिवृत्ति परीक्षा (पी.ए.टी.) और चिकित्सा परीक्षा में बैठना होता है।

शारीरिक मानदण्ड

भारतीय सेना में प्रवेश प्राप्त करने के लिए महिला उम्मीदवारों को कुछ शारीरिक मानदंड पूरे करने होते हैं, जैसे:-

*न्यूनतम ऊंचाई: 152 सें.मी. (पूर्वोत्तर एवं पर्वतीय क्षेत्रों की उम्मीदवारों के लिए 5 सें.मी. और लक्षद्वीप की उम्मीदवारों के लिए 2 सें.मी. की छूट।)

*न्यूनतम वज़न: 42 कि .ग्रा . (पूर्वोत्तर, पर्वतीय क्षेत्रों एवं लक्षद्वीप की उम्मीदवारों के लिए वजन ऊंचाई के

*दृष्टि तीक्ष्णता: दूर दृष्टि में बेहतर आंख के लिए 6/6 और खराब आंख के लिए 6/18. मायोपिया माइनस 3.५ से अधिक नहीं हो (एस्टिग्मेशन सहित)

उम्मीदवार शारीरिक एवं मानसिक दृष्टि से उपयुक्त हो और शरीर पर स्थायी टेटू के अधिकांशत: मनाही होती है।

वेतन संभावना

एस.एस.सी. अधिकारी रु. 21000 प्रति माह प्राप्त करती हैं। प्रशिक्षण के सफल समापन के बाद वे लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त करती हैं और लगभग 65000 रु. प्रति माह वेतन मिलता है। इसके अतिरिक्त सेना अपने अधिकारियों को नि:शुल्क कैंटीन सुविधाएं, सरकारी आवास, मेस या क्लब अथवा खेल सुविधाएं एवं स्वयं तथा आश्रितों के लिए नि:शुल्क चिकित्सा सुविधाएं देती है।

महिलाओं के लिए एस.एस.सी. अनुबंध 10 वर्ष का होता है। यदि कोई महिला अधिकारी पहले कार्यविमुक्ति चाहती हो तो, फिर भी उसे सेना की 05 वर्ष जमा 02 वर्ष या 37 वर्ष की आयु - जो भी पहले हो, तक सेवा करनी होती है।

पछले वर्ष रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भारतीय सेना की 340 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (पी.सी.) प्रदान किया।

भारतीय वायु सेना में

वायु सेना में महिलाएं केवल वायु सेना संयुक्त प्रवेश परीक्षा (ए.एफ.सी.ए.टी.) के माध्यम से प्रवेश ले सकती हैं। यह परीक्षा वर्ष में दो बार ली जाती है। परीक्षा से उड़ान शाखा, तकनीकी शाखा या ग्राउण्ड ड्यूटी शाखा में प्रवेश मिलता है।

पात्रता:

*उड़ान शाखा के लिए: 19 से 25 वर्ष की आयु की वे महिला उम्मीदवार पात्र हैं जो बी.ई. या बी।टेक न्यूनतम 60' अंकों के साथ रखती हों।

*न्यूनतम ऊंचाई 162.5 सें.मी. और वजन ऊंचाई के अनुपात में हो।

*तकनीकी शाखा के लिए: वैमानिक इंजीनियरी में बी.टेक. पूर्ण कर चुकी या ए.एम.आई. .इंडिया अथवा एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की भाग ए और बी परीक्षा उत्तीर्ण या विद्युत एवं दूरसंचार इंजीनियर संस्थान की स्नातक सदस्यता परीक्षा उत्तीर्ण महिलाएं पात्र हैं। न्यूनतम ऊंचाई 152 सें.मी. होने के साथ वजन ऊंचाई के अनुपात में होना चाहिए।

*ग्राउण्ड ड्यूटी शाखाओं के लिए: स्नातकोत्तर होने के साथ 20 से 23 वर्ष की हों। स्नातकोत्तर स्तर या 5-वर्षीय एल.एल.बी. एकीकृत पाठ्यक्रम पूर्ण कर चुकी हों और 20 से 25 वर्ष की आयु की हों। एम।एड, पी.एच.डी., बी.ए. या आई.सी.डब्ल्यू.ए. व्यवसायी 20 से 27 वर्ष की आयु की हों। ऊंचाई 152 सें.मी. और वजन ऊंचाई के अनुपात में होना चाहिए। विभिन्न शाखाओं के लिए निर्धारित अन्य योग्यताएं निम्नानुसार हैं:

*प्रशासन एवं संभार तंत्र: उम्मीदवार स्नातक परीक्षा में न्यूनतम 60' अंक और स्नातकोत्तर योग्यता में न्यूनतम कुल 50' अंक रखती हों।

*लेखा: उम्मीदवार बी।कॉम में न्यूनतम 60' और एम।कॉम, सी.ए. या आई.सी.डब्ल्यू.ए. में न्यूनतम कुल 50' अंकधारी हों।

*शिक्षा: स्नातकोत्तर योग्यता में न्यूनतम कुल 50' अंक रखती हों।

आई.ए.एफ. फ्लाइट स्क्वाड्रन में, जून 2016 में पहली बार तीन महिला पायलट शामिल की गईं और अब वे सुखोई तथा तेजस जैसे फाइटर जेट उड़ाएंगी। भारतीय सेना के लिए यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्येांकि यह पहली बार है जब महिलाओं को लड़ाकू भूमिका में तैनात किया गया है।

वेतन संभावना:

कॅरिअर एयरफोर्स वेबसाइट के अनुसार, उड़ान शाखा अधिकारी लगभग 80,250 /- प्रतिमाह वेतन प्राप्त करती हैं। तकनीकी शाखा अधिकारी लगभग 71,550/- रु. प्रति माह लेती हैं, जबकि ग्राउण्ड ड्यूटी ऑफिसर को लगभग 68,550/- रु. प्रति माह मिलते हैं। वायु सेना में रैंक तथा महत्ता बढऩे पर वेतन तथा हकदारिता में वृद्धि होती है।

वायु सेना अपने सभी अधिकारियों को सेवा के दौरान एवं सेवानिवृत्त होने के बाद भी अनेक लाभ देती है।

भारतीय वायु सेना की महिला अधिकारियों ने तीन वर्ष के लंबे न्यायालय-संघर्ष के बाद 2010 में स्थायी कमीशन अर्जित किया। सभी 22 महिला याचिकाकर्ताओं को स्थायी कमीशन दिया गया। तबसे महिला अधिकारियों ने पुरुषों की तरह लेफ्टिनेंट जनरल के रैंक तक पदोन्नति और 60 वर्ष की आयु होने पर सेवानिवृत्ति के अवसर भी प्राप्त किए।

भारतीय नौसेना में

नौसेना महिलाओं को केवल निम्नलिखित पदों पर अल्प सेवा कमीशन अधिकारी के रूप में स्वीकार करती है:-

*हवाई यातायात नियंत्रण (ए.टी.सी.): 19.5 वर्ष से 25 वर्ष की आयु की वे महिलाएं इस पद के लिए आवेदन कर सकती हैं जो बी . ., बी .टेक . या स्वीकृत एम।टेक। पाठ्यक्रम में न्यूनतम 60' अंक रखती हैं।

*शिक्षा: 21 से 25 वर्ष की आयु की वे उम्मीदवार जो निम्नलिखित किसी एक में न्यूनतम 50' अंक धारी हैं:-

*एम.ए. अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, इतिहास या राजनीति विज्ञान

*एम.एस.सी.-भौतिकी (बी.एससी. में गणित सहित), रसायनविज्ञान, गणित (बी.एससी. में भौतिकी के साथ) या कम्प्यूटर विज्ञान (बी.एससी.में भौतिकी या गणित सहित)।

*एम.टेक.: यांत्रिक, आई.टी., सी.एस. या वैद्युत इंजीनियरी अथवा यांत्रिक, आई.टी., सी.एस. या वैद्युत इंजीनियरी में बी.ई. या बी.टेक. में न्यूनतम 60' अंकधारी महिलाएं इसके लिए आवेदन कर सकती हैं।

*विधि: 22 से 27 वर्ष की आयु की तथा एल.एल.बी. या एकीकृत एल.एी.बी. पाठ्यक्रम में न्यूनतम 55' अंकधारी महिलाएं इस पद के लिए आवेदन कर सकती हैं।

*संभार तंत्र: 19.5 से 25 वर्ष की आयु की होने के साथ बी.एस.सी. या बी.कॉम. में न्यूनतम 60' अंक तथा संभार तंत्र, वित्त, सामग्री प्रबंधन और सप्लाई चेन प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, एम.बी.ए., एम.सीए., बी.टेक. या बी.ई. योग्यता रखती हों।

*नौ-वास्तुकला: 19.5 वर्ष से 25 वर्ष की आयु की वे उम्मीदवार पद के लिए आवेदन कर सकती हैं जो सिविल इंजीनियरी, नौ वास्तुकला, यांत्रिक इंजीनियरी, वैमानिक इंजीनियरी, एयरोस्पेस, इंजीनियरी तथा धातुकर्म इंजीनियरी में बी.ई. या बी.टेक में न्यूनतम 65' अंक रखती हैं।

*ऑब्जर्वर: 19 से 24 वर्ष की आयु के साथ बी.ई. या बी.टैक. में न्यूनतम 55' अंकधारी उम्मीदवार इस पद के लिए आवेदन कर सकती हैं।

*पायलट: इस पद के लिए वे उम्मीदवार आवेदन कर सकती हैं जो 19 से 24 वर्ष की होने के साथ बी.ई.या बी.टेक. में न्यूनतम 60' अंक रखती हैं। प्रवेश केवल विश्वविद्यालय प्रवेश योजना (यू.ई.एस.) के माध्यम से दिया जाता है।

यद्यपि नौसेना में महिला अधिकारियों को पी-81 एस आई.एल.-38 एस. और डोर्नियर्स जैसे समुद्री गश्ती विमानों के पायलट के रूप में प्रवेश की अनुमति दी है, किंतु उसने अभी यह निर्णय नहीं लिया है कि क्या महिला अधिकारियों को ऑन बार्ड सीयर-फेयरिंग युद्धपोतों पर अनुमति दी जाए या नहीं। 51 महिला अधिकारी समुद्री गश्ती विमान पर ऑब्जर्वर के रूप में सेवारत हैं, 2017 से महिलाओं को समुद्री टोह जहाजों के पायलट के रूप में प्रवेश दिया जाएगा या नौसेना आर्मामेंट निरीक्षणालय संवर्ग की सेवा करने का अवसर दिया जाएगा।

वेतन संभावना:

एक सब-लेफ्टिनेंट वेतन बैंड-3 (रु. 15600-39100) के ग्रेड वेतन रु. 5400 में वेतन तथा 6000/- का सैन्य वेतन सेवा प्राप्त करती हैं। भत्ते, अधिकारी के रैंक के आधार पर 400 रु. से 14000 रु. प्रति माह तक के होते हैं।

लाभों में स्वयं तथा परिवार के लिए नि:शुल्क चिकित्सा सुविधाएं, नि:शुल्क राशन, मेस और खेल तथा क्लब सुविधाएं सज्जित सरकारी आवास, समूह बीमा, एवं पेंशन तथा सभी लाभ शामिल हैं।

हाल ही में, सरकार ने महिला अधिकारियों को, एस.एस.सी. कार्य-काल पूरा होने पर मैरिट तथा रिक्ति होने के आधार पर शिक्षा, विधि-एवं नौ-वास्तुकला शाखाओं में स्थायी कमीशन (पी.सी.) देने का अनुमोदन किया है। इस वर्ष अप्रैल में, उन सात महिला अधिकारियों को नौसेना ने स्थायी कमीशन प्रदान किया है जिन्हें शिक्षा तथा नौसेना कंस्ट्रक्टर संवर्ग में अल्प सेवा अधिकारियों के रूप में भर्ती किया था।

सेना में मात्र 1436 महिलाएं, भारतीय वायु सेना में 1331 महिलाएं तथा भारतीय नौसेना में 532 महिलाएं हैं।

भारतीय तटरक्षक में

तटरक्षक महिलाओं को केवल गैर-समुद्रगामी पदों (जैसे सामान्य ड्यूटी पद, पायलट या नेवीगेशन) पर रखता है और ऐसी महिलाओं को रखता है जो अल्प सेवा नियुक्ति के रूप में वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस (सी.पी.एल.) धारण करती हैं। महिलाओं को 8 वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है। यह अवधि 10 वर्ष तक विस्तारणीय है और मामला-प्रति-मामला आधार पर 14 वर्ष तक आगे बढ़ाई जा सकती है।

पात्रता:

*सामान्य ड्यूटी पदों के लिए: उम्मीदवार, 21 से 25 वर्ष की आयु की हों और स्नातक योग्यता  पूरी की हो (बारहवीं कक्षा तक गणित एवं भौतिकी हो)। ऊंचाई 152 सें.मी. हो। वजन ऊंचाई के अनुपात में हो। दृष्टि चश्मे के बिना 6/6 ओर 6/9 हो।

*सी.पी.एल. धारी पायलटों के लिए: उम्मीदवार 19 से 25 वर्ष की आयु की हों और उन्होंने बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण की हो, वे चालू वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस रखती हों  और उनकी ऊंचाई 162.5 सें.मी. तथा वजन ऊंचाई के अनुपात में हो। दृष्टि चश्मे के बिना 6/6 हो।

*विधि पदों के लिए: उम्मीदवारों की आयु 21 से 30 वर्ष के बीच हो और उन्होंने विधि में डिग्री प्राप्त की हो। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री विधि से संबंधित कार्यों का अनुभव और विधि में स्नातकोत्तर डिग्री को वरीयता मिलती है। ऊंचाई न्यूनतम 162.5 सें.मी. हो। वजन ऊंचाई के अनुपात में हो। नेत्र-दृष्टि चश्मे के साथ 6/6 और 6/12 तथा चश्मे के बिना 6/60 हो।

*वेतन संभावना: भारतीय तटरक्षक की एक सहायक कमांडेंट रु.15600-39100 के वेतनमान पर सेवा करती हैं और उसे रु.5,400/- का ग्रेड वेतन मिलता है। वेतन रैंक और अनुभव के साथ बढ़ता है।

उक्त उल्लिखित अवसरों के अतिरिक्त, महिला चिकित्सा एवं नर्सिंग छात्राएं सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (ए.एफ.एम.सी.), पुणे में प्रवेश लेकर रक्षा सेवाओं में कॅरिअर बना सकती हैं। महाविद्यालय में चयन अखिल भारतीय चिकितसा-पूर्व परीक्षा (ए..पी.एम.टी.) के माध्यम से किया जाता है। बी.डी.एस. में न्यूनतम 60' अंक धारी डेंटिस्ट आर्मी डेंटल कोर (ए.डी.सी.) में प्रवेश ले सकती हैं और स्नातकोत्तर चिकित्सा डिग्री या डिप्लोमा धारी सेना चिकित्सा कोर (ए.एम.सी.) में प्रवेश ले सकती हैं।

महिलाओं के लिए यह आगे आने और देश की सेवा करने का समय है!

(लेखिका एक स्तंभकार एवं कॅरिअर सलाहकार हैं। ई-मेल rruchishrimammlli@gmail.com)