नौकरी फोकस


career volume-24

आपदा प्रबंधन में कॅरिअर

 ऊषा अल्बुकर्क एवं निधि प्रसाद

बिहार एवं पूर्वोत्तर की बाढ़ ने वहां रहने वाले व्यक्तियों का जीवन तबाह कर दिया है। यही स्थिति इटली में भूकंप में, कैलिफोर्निया में जंगलों में फैली आग ने तथा नाइस में आतंकी हमले ने की है। बाढ़, भूकम्प, सूखे, आतंकी हमलों जैसी आपदाएं बिना किसी चेतावनी के आती हैं और कुछ ही पलों में कोई शहर मलबे का ढेर बन जाते हैं, पूरे गांव बह जाते हैं या कोई शहर बरबाद हो जाता है, इन गांवों या शहरों का जन-जीवन सामान्य होने में महीनों और कई बार तो बरसों लग जाते हैं। सुयंक्त राष्ट्र का अनुमान है कि पिछले दो दशकों में प्राकृतिक आपदाओं में लगभग तीन मिलियन जानें गई हैं और लगभग 800 मिलियन लोग इनसे प्रभावित हुए हैं।

आपदाओं के विनाशकारी परिणाम होते हैं, विशेष रूप से भारत में, जहां आपदाओं से निपटने की तैयारी प्राय: अपर्याप्त होती है। चूंकि प्राकृतिक आपदा परिहार्य नहीं होती, अधिकांशत: इनका अनुमान नहीं लगाया जा सकता, इसलिए इनके भयंकर परिणामों को रोकने के प्रयास किए जाने चाहिएं। इस जागरूकता के लिए प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एक अधिक सकारात्म्क सोच की आवश्यकता है तथा आपदा प्रबंधन कार्यक्रमों को चलाना आवश्यक है। आपदा प्रबंधन की एक वास्तविक तथा आपसी सोच सुनिश्चित करने के लिए, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एन.डी.एम..) की स्थापना, नीतियां बनाने, दिशा-निर्देश तथा श्रेष्ठ-प्रैक्टिस निर्धारित करने और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के साथ समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से की गई है।

भूकम्प, बाढ़, युद्ध, महामारी या कोई औद्योगिक दुर्घटना होना आपदा नहीं है। किंतु आपदा तब आती है जब इनके परिणाम जन-जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। आपदा के दो मिले-जुले घटक होते हैं: संकट एवं प्रभावित व्यक्तियों की वेदना।

आपदा तब आती है जब कोई संकट या जोखिम व्यक्तियों या समुदायों को इतना प्रभावित कर दे कि उनका जीवन खतरे में आ जाए या उनकी आर्थिक तथा सामाजिक संरचना को इतना अधिक नुकसान पहुंचाए कि जीवन-निर्वाह की उनकी क्षमता क्षीण हो जाए। यह स्थिति किसी पर्यावरणीय घटना या सशस्त्र युद्ध के कारण आ सकती है जिससे तनाव, व्यक्तिगत चोट, शारीरिक क्षति अथवा आर्थिक विघटन बड़े पैमाने पर होता है।

आपदा प्रबंधन एक व्यापक शब्द है जिसमें किसी भी तरह की आपदा की रोकथाम, नियंत्रण एवं बचाव की योजना के सभी पहलू शामिल हैं। यद्यपि, प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, किंतु जीवन तथा सम्पत्तियों की क्षति कम करने के प्रयास किए जा सकते हैं। इसमें आपदा की रोकथाम तथा इसे कम करने और आपदा के बाद स्थिति सामान्य बनाने, पुनर्निर्माण और जोखिम प्रबंधन करने की तैयारी की समझ सृजित करना भी शामिल है।

आपदाओं के प्रकार

आपदाएं मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं -

(1) प्राकृतिक (2) मानव निर्मित आपदाएं

प्राकृतिक आपदाएं:

प्राकृतिक आपदाएं किसी प्राकृतिक बल की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप आती हैं और इन्हें दुर्भाग्यपूर्ण, किंतु अवश्यंभावी रूप में स्वीकार किया जाता है। ये आपदाएं निम्नलिखित हैं:-

*      अकाल
*      सूखा
*      चक्र्रवाती तूफान
*      तूफान
*      बाढ़/समुद्री लहरें/सुनामी
*      ज्वालामुखी
*      बर्फानी तूफान
*      भूकम्प

मानव-निर्मित आपदाएं:

*      विस्फोट
*      अग्नि दुर्घटनाएं
*      विषैली रासायनिक या रेडियोधर्मी सामग्रियों का रिसाव (औद्योगिक दुर्घटनाएं)
*      बांध टूटना
*      नाभिकीय रिएक्टर दुर्घटनाएं
*      आतंकी हमले

आपदा प्रबंधन के कई सिद्धांत होते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:-

*      तैयारी-योजना एवं संसाधन
*      विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय
*      व्यक्तियों, स्वयंसेवियों तथा विशेषज्ञों के प्रयासों का संघटन
*      घटना की बृहद्-स्थिति पर ध्यान संकेद्रण
*      आपदा की भौगोलिक अवस्थिति एवं प्रकार का सही ज्ञान।

आपदा प्रबंधन के लिए त्वरित कार्रवाई एवं राहत कार्य अपेक्षित होते हैं। ऐसा, संभावित आपदाओं की पहचान-प्राकृतिक या मानव-निर्मित तथा जब कभी भी या यदि आपदा घटित होती है तो इनसे राहत के लिए प्रारंभ की जाने वाली आकस्मिक योजनाएं तथा पद्धतियां बना कर किया जाता है।

 

आपदा प्रबंधन कार्मिकों को आपात स्थितियों से निपटने के लिए भली-भांति तत्पर रहने की आवश्यकता होती है और उन्हें प्रभावित व्यक्तियों तथा क्षेत्रों की आवश्यकताओं की एक शीघ्र एवं कुशल तरीके से पूर्ति करनी चाहिए। यदि कोई आपदा घटित होती है तो उसके लिए उन्हें तैयार रहना होता है और उस आपदा का सामना करने की कोई योजना उनके मन में होनी चाहिए। सही योजना आपदा की सीमा और प्रभाव को कम करने में सहायक होती है।

पात्रता:

किसी भी विधा के छात्र आपदा प्रबंधन पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के पात्र होते हैं। आपदा प्रबंधन में स्नातक डिग्री पाठ्यक्रम करने के लिए उम्मीदवार हायर सेकेण्डरी प्रमाणपत्र परीक्षा (10+२) न्यूनतम 55' अंकों के साथ उत्तीर्ण होने चाहिए।

पाठ्यक्रम में, आपदाओं के कारणों और इनके प्रभावों को किस तरह कम किया जाए, इन उपायों पर व्यापक जानकारी दी जा सकती है। यह पाठ्यक्रम छात्रों को आपदा प्रबंधन के विभिन्न क्षेत्रों, स्थितियों के प्रबंधन प्रभावित व्यक्तियों तथा क्षेत्र की आवश्यकताओं की पूर्ति, घायल व्यक्तियों के लिए भोजन तथा दवाइयों का वितरण आदि विभिन्न क्षेत्रों का अध्ययन कराता है। पाठ्यक्रम के दौरान छात्रों को पर्यावरणीय प्रणालियों, क्षेत्रगत परिचालन एवं आपदा प्रबंधन के संगठनात्मक प्रबंध से अवगत कराया जाता है।

स्नातकोत्तर कार्यक्रम के लिए: उम्मीदवार किसी मान्यताप्राप्त संस्था या विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक हों।

पी.एच.डी. के लिए: उम्मीदवार स्नातकोत्तर योग्यता में न्यूनतम 55' अंक रखते हों।

विभिन्न जोखिमों से जनता की रक्षा तथा प्रबंधन एक बहुत महत्वपूर्ण कार्य है और यह कार्य अत्यधिक सावधानी तथा सतर्कतापूर्ण ढंग से करने की आवश्यकता होती है। आपदा प्रबंधन सेवा से जुड़ा क्षेत्र है, इसलिए इस क्षेत्र में आने वाले व्यक्ति को इस क्षेत्र से जुड़े गुण-दोषों पर अच्छी तरह से सोच-समझ कर आना चाहिए।

संभावना

आपदा प्रबंधन शिक्षा, किसी भी व्यवसायी को किसी आपदा के निवारण, नियंत्रण एवं प्रबंधन में प्रबंधकीय कौशल तथा योजना लागू करने में सक्षम बनाती है। यह शिक्षा संकट प्रबंधन एवं नियंत्रण के लिए अत्यधिक जरूरी कौशल भी प्रदान करती है।

आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक कार्य संगठनों, राहत कार्यों से जुड़ी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के कॅरिअर बनाने वाले व्यक्तियों, अर्ध-सैन्य कार्मिकों, आपदा के दौरान सहायता तथा पुनर्वास उपाय उपलब्ध कराने वाले स्वयंसेवियों और आपदा निगरानी क्षेत्र में कार्य करने वाले वैज्ञानिकों, मौसम विज्ञानियों एवं पर्यावरणविदों के लिए उपयोगी है। इस क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों के लिए सरकारी तंत्र में और गृह मंत्रालय की एक एजेंसी - राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एन.डी.एम.ए.)- जिसका प्राथमिक उद्देश्य प्राकृतिक एवं मानव निर्मित आपदाओं के दौरान समन्वय कार्य करना और आपदा-राहत एवं संकटकाल में सहायता के लिए क्षमता-निर्माण करना है। ये रोजग़ार के अच्छे अवसर हैं।

सरकारी एजेंसियों में: नीचे सरकारी एजेंसियों के कुछ ऐसे आपदा प्रबंधन विभागों के नाम दिए गए हैं, जो रोजग़ार के अवसर देते हैं:-

*      राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एन.डी.एम.ए.)
*      अग्नि-शमन विभाग
*      सूखा प्रबंधन विभाग
*      विधि प्रवर्तन विभाग
*      राहत एजेंसियां आदि
*      बीमा कंपनियां
*      अत्यधिक जोखिम क्षेत्रों वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग जैसे रासायनिक, खनन एवं पेट्रोलियम, जिनके अपने आपदा प्रबंधन स्कंध होते हैं।

निम्नलिखित क्षेत्रों में भी विभिन्न अवसर दिए जाते हैं:-

*      अध्यापन
*      अनुसंधान
*      परामर्श-सेवा
*      प्रलेखन
*      क्षेत्रगत प्रशिक्षण

कोई भी व्यक्ति सामाजिक कार्यकर्ता, इंजीनियर, चिकित्सा स्वास्थ्य विशेषज्ञ, पर्यावरण विशेषज्ञ, पुनर्वास कार्यकर्ता आदि के रूप में अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों एवं राहत तथा उपचार संगठनों में भी कार्य कर सकते हैं, इनमें से कुछ संगठन निम्नलिखित हैं:-

*      विश्व बैंक
*      एशियाई विकास बैंक (ए.डी.बी.)
*      संयुक्त राष्ट्र संगठन (यू.एन.ओ.)
*      इंटरनेशनल रेड क्रॉस
*      केयर
*      ऑक्सफेम
*      मेडिसिन्स सैन्य फ्रंटियर्स
*      इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर डिजास्टर प्रिपेयर्टनेस एंड रेसपोंस (डी.ई.आर.ए.)

आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षण तथा रोजग़ार देने वाले कुछ संगठनों की सूची:-

*      राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नई दिल्ली
*      राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एन.आई.टी.एम.), गृह मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली
*      सार्क आपदा प्रबंधन केन्द्र, एन.आई.डी.एम. भवन, नई दिल्ली
*      भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आई.आई.पी.ए.)
*      भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, लोदी रोड, नई दिल्ली
*      आपदा प्रबंधन केन्द्र, एच.सी.एम.आर.आई.पी.ए., जयपुर
*      हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (एच.आई.पी.ए.), गुडग़ांव
*      आपदा प्रबंधन केन्द्र, भोपाल
*      आपदा न्यूनीकरण संस्थान, अहमदाबाद
*      भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आई.सी.ए.आर.), नई दिल्ली
*      भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी, नई दिल्ली एवं राज्य इकाइयां

देश में आपदा प्रबंधन अनुसंधान कार्यक्रम चलाने वाले कई विश्वविद्यालय तथा संस्थान हैं, जैसे - भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुडक़ी का आपदा प्रबंधन उत्कृष्टता केन्द्र, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुडक़ी का भूकम्प इंजीनियरी विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर का भूकम्प इंजीनियरी केन्द्र, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली।

आपदा प्रबंधन के उच्च भारतीय संस्थान

*      सिम्बियोसिस जैवसूचना विज्ञान संस्थान, पुणे
*      राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली
*      टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुंबई, जमशेदजी टाटा आपदा प्रबंधन केन्द्र
*      इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली
*      आपदा प्रबंधन संस्थान, भोपाल
*      गुरु गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, (जी.जी.एस.आई.पी.यू.), नई दिल्ली
*      अन्नामलै विश्वविद्यालय, अन्नामलै नगर, तमिलनाडु
*      पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
*      पर्यावरण परिरक्षण प्रशिक्षण तथा अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
*      आपदा न्यूनीकरण संस्थान, अहमदाबाद
*      आपदा प्रबंधन केन्द्र, पुणे
*      एमिटी आपदा प्रबंधन संस्थान, नोएडा

(उक्त सूची उदाहरण मात्र है)।

 

(ऊषा अल्बुकर्क एवं निधि प्रसाद कॅरिअर्स स्मार्ट प्राईवेट लि., नई दिल्ली में क्रमश: निदेशक और सीनियर काउंसिलिंग सायकोलोजिस्ट हैं  (ई-मेल careerssmartonline@gmail.com)