नौकरी फोकस


Career Volume-30

वास्तुकला में कॅरिअर

उषा अल्बुकर्क एवं निधि प्रसाद

एक वास्तुकार के रूप में कॅरिअर उनके लिए आदर्श है जो रिहायशी मकानों, कार्पोरेट संस्थाओं के लिए भवनों, दुकानों और शोरूम, अवकाश-गृहों, रेस्तरां तथा होटलों, पब, मॉल.... संक्षेप में कहें तो विभिन्न प्रकार की संरचनाओं की डिजाइन एवं निर्माण कार्य में रुचि रखते हैं।

वास्तुकला, विशेष रूप से एक ऐसा अध्ययन है जो भवनों और संरचनाओं की योजना बनाने एवं डिजाइन तैयार करने से संबंधित है। यह विषय, जो नया बिल्कुल नहीं है, विश्व के विभिन्न भागों में युगों से कार्यान्वयन में है। रोमन, विक्टोरियन और भारतीय वास्तुकला के बारे में किसने नहीं सुना है, इनके उदाहरण आज भी विद्यमान हैं, यह कुछ व्यक्तियों की रचनात्मक सोच का ही परिणाम है कि आज दुबई में बुर्ज-अल-अरब, ताइपेई में ताइवान 101, कीनिया में रेड पिपर हाउस, दिल्ली में बहाई मंदिर तथा अनेक अन्य वास्तुकलात्मक आश्चर्य जैसे भवन हमारे पास हैं।

वास्तुकार अपनी सोच एवं सपनों को ऐसे मील-पत्थर (माइल स्टोन) का निर्माण करने के लिए सामग्रियों से जोड़ते हैं, जो मनुष्य जाति की एक सशक्त छाप छोड़ देते हैं। आज की तीव्रता से बदलती हुई मांगें एवं आवश्यकताएं, व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित ऐसे वास्तुकारों की मांग कर रही हैं जो केवल बदलते हुए परिवेश का ही सामना नहीं कर सके, बल्कि ऐसे गुणवत्तापूर्ण, पर्यावरण के अनुकूल भवनों को बना एवं दे सकें, जिन्हें व्यावहारिक रूप में उपयोग में लाया जा सके। सौंदर्यपरक डिजाइन, अद्वितीय भवन सामग्री तथा भूदृश्यांकित परिवेश प्रमाणित करते हैं कि वास्तुकला एक ऐसा व्यवसाय है जो निरंतर विकासशील है।

किसी भी वास्तुकार का कार्य, विद्यमान विधियों तथा विनियमों के दायरे में, किसी व्यक्तिगत निवास से लेकर समूह आवासन, अस्पतालों, होटलों, व्यावसायिक प्लाजा, कारखानों के लिए किसी भी प्रकार के भवन या परिसर के निर्माण और उद्यान तथा सुविधा क्षेत्रों के लिए भी डिजाइन एवं योजना बनाना है। वास्तुकार किसी भी संरचना के लिए प्रारंभिक विचार-विमर्श से लेकर उसके निर्माण तक के सभी विकास-चरणों में शामिल होते हैं। उनके कार्यों में विभिन्न प्रकार के कौशलों अर्थात डिजाइन, इंजीनियरी, प्रबंधकीय एवं पर्यवेक्षकीय कौशल की अपेक्षा होती है। वास्तुकार न केवल डिजाइन एवं निष्पादन के क्षेत्रों में, बल्कि सर्वेक्षण, मिट्टी की जांच, इंजीनियरी, सुरक्षा, प्रदर्शन एवं पर्यवेक्षण जैसे अन्य क्षेत्रों में भी कार्यों का निदेशन, सहयोजन एवं एकीकरण करता है। इसलिए, इस क्षेत्र से जुड़े व्यावसायियों से, विभिन्न स्थितियों में विभिन्न आवश्यकताओं के लिए डिजाइन तैयार करने में सक्षम होने तथा निर्माण प्रक्रिया में शामिल सभी विशेषज्ञों की सहभागिता के निदेशन एवं समन्वय के लिए भवन प्रौद्योगिकी के सभी पहलुओं की पर्याप्त जानकारी होना अपेक्षित है।

अपेक्षित कौशल

*रचनात्मकता

*अच्छी गणितीय क्षमता

*वर्तमान सामाजिक एवं पर्यावरणीय मामलों की जानकारी

*तीक्ष्ण अवलोकन

*लचीलापन एवं धैर्य

*उत्तरदायित्व एवं जिम्मेदारी

*वैज्ञानिक सोच

*रूपरेखा बनाने की क्षमता

*व्यवसाय से जुड़ी जटिल विधिक भाषा समझने की क्षमता

*नेतृत्व

*शारीरिक सहनशक्ति एवं पर्यवेक्षकीय कौशल

पात्रता

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सी.बी.एस..) राजकीय तथा निजी संस्थानों में बी.आर्किटेक्चर तथा बी.प्लानिंग में अधिस्नातक कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए अखिल भारतीय आधार पर एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश संचालित करता है। प्रश्न पत्र में गणित, अभिरुचि परीक्षा और  एक ड्राइंग परीक्षा शामिल होती है। राष्ट्रीय वास्तुकला अभिरुचि परीक्षा (एन..टी..) ड्राइंग परीक्षा सहित ऑनलाइन परीक्षा आ आयोजन राष्ट्रीय उच्च अध्ययन एवं वास्तुकला संस्थान द्वारा वास्तुकला परिषद् (सी...) के साहचर्य में किया जाता है। राष्ट्रीय वास्तुकला अभिरुचि परीक्षा (एन..टी..) सौंदर्य सुग्राहिता, विवेचनात्मक सोच, बोध, अवलोकन तथा वास्तुकलात्मक जानकारी का मूल्यांकन करती है। उम्मीदवारों की योग्यताओं की तुलना के सामान्य मापदण्ड उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न गैर-सहायता-प्राप्त तथा राजकीय सहायता प्राप्त वास्तुकला विद्यालयों/महाविद्यालयों के प्रवेश प्राधिकारी एन..टी.. अंकों का उपयोग करते हैं।

विभिन्न संस्थानों बी.आर्क. एवं आर्किटेक्चर (वास्तुकला) में डिप्लोमा के लिए पात्रता अपेक्षाएं:

आई.आई.टी.: गणित/भौतिकी/रसायनविज्ञान विषयों के साथ + 2 उत्तीर्ण।

एन.आई.टी.: गणित/भौतिकी/रसायनविज्ञान विषयों के साथ + 2 उत्तीर्ण।

एस.पी.. एवं अन्य संस्थाएं: गणित एक विषय के रूप में लेकर किसी भी विधा में न्यूनतम 50' अंकों के साथ + 2 उत्तीर्ण या

50' (न्यूनतम) अंकों के साथ 3-वर्षीय डिप्लोमा।

चयन-पद्यति:

आई.आई.टी. -.५  लाख में जे..ई (मुख्य + जे..ई (उच्च) + वास्तुकला अभिरुचि परीक्षा में उच्चतम अंक प्राप्त करने वाले छात्र)  (60' प्रतिशत प्राथमिकता प्रवेश के लिए और 40' बारहवीं के अंकों पर)। वास्तुकला अभिरुचि परीक्षा (ए..टी.) में केवल वे ही छात्र बैठ सकते हैं जो जे... उच्च उत्तीर्ण हैं।

एन.आई.टी. एवं एस.पी..: जे... (मुख्य) पेपर द्बद्ब (वास्तुकला अभिरुचि परीक्षा) (60' प्राथमिकता प्रवेश के लिए और 40' बारहवीं के अंकों पर)

अन्य संस्थाएं: एन..टी.. अंक + अर्हता परीक्षा के अंक

बी.आर्क. कार्यक्रम एक नियमित पांच वर्ष का पाठ्यक्रम है जो छात्रों को वास्तुकला के अनेक पक्षों का एवं समाज में इनकी संभावनाओं का पता लगाने का अवसर देता है। छात्र वास्तुकला डिजाइन एवं योजना के विभिन्न क्षेत्रों में भी विशेषज्ञता कर सकते हैं। अधिकांश विशेषज्ञताएं स्नातकोत्तर स्तर पर की जाती हैं और इनमें भू-दृश्य डिजाइन, शहरी डिजाइन एवं योजना, पारिस्थितिकी प्रबंधन, पर्यावरणीय डिजाइन, शहरी संरक्षण, विरासत प्रबंधन आदि विषय शामिल हैं।

बी.आर्क. में डिग्री पाठ्यक्रम के अतिरिक्त, वास्तुकला में डिप्लोमा भी कुछ संस्थानों में या तो पूर्णकालिक अथवा अंशकालिक पाठ्यक्रमों के रूप में उपलब्ध हैं। वास्तुकला में अंशकालिक डिप्लोमा पाठ्यक्रम पूरा करने में सात वर्ष का समय लग सकता है

बी।आर्क। पाठ्यक्रम की विषय-वस्तु में वास्तुकलात्मक डिजाइन (ड्राइंग एवं पेंटिंग), ध्वनिशास्त्र, सर्वेक्षण तथा लेबलिंग, अनुमानन एवं लागतीकरण, निर्माण पद्धतियां, सामग्री प्रबंधन, वास्तुकला इतिहास, ड्राफ्टमेनशिप, पर्यावरणीय योजना, अनुप्रयुक्त मैकेनिक्स, संरचनात्मक डिजाइन, कंप्यूटर अनुप्रयोग, आदि शामिल हैं। कंप्यूटर वास्तुकला में प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण अंग है।

संभावना

वास्तुकारों को निर्माण कंपनियों, बिल्डरों, के साथ या स्वतंत्र रूप में, परामर्शी संस्थाओं के साथ कार्य करने के विकल्प हैं और साथ ही साथ कई अन्य विकल्प भी हैं। सरकारी संगठनों के अतिरिक्त, निर्माण कार्यों के लिए जिम्मेदार राज्य विभागों, हाउसिंग बोर्डों, स्थानीय निकायों आदि जैसे विभिन्न अन्य संस्थान तथा एजेंसियां भी वास्तुकारों की भर्ती करती हैं। निजी क्षेत्र में बिल्डरों, वास्तुकला फर्मों, सलाहकारों आदि के साथ कार्य करने के अवसर विद्यमान हैं। कुछ अनुभव रखने वाले वास्तुकार अपनी निजी प्रैक्टिस भी स्थापित कर सकते हैं या सलाहकार अथवा ठेकेदार के रूप में कार्य कर सकते हैं।

वास्तुकारों के लिए रोजग़ार अवसर सरकारी तथा निजी क्षेत्रों में उपलब्ध हैं।

कुछ सरकारी संगठन इस प्रकार हैं:-

*लोक निर्माण विभाग

*पुरातत्व विभाग

*रंक्षा मंत्रालय

*रेलवे विभाग

*डाक एवं तार

*सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम

*राष्ट्रीय भवन निर्माण संगठन

*ग्राम एवं नगर नियोजन संगठन

*राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान

*आवास एवं शहरी विकास निगम

वास्तुकार के लिए कुछ पारम्परिक कॅरिअर विकल्पों में निम्नलिखित शामिल हैं:-

*वास्तुकार

*शहरी डिजाइनर

*भू-दृश्य वास्तुकार

*आंतरिक सज्जा वास्तुकार

*शहरी योजनाकार

*परियोजना प्रबंधक

*आवासन सलाहकार

*वास्तुकला अध्यापक

कुछ गैर-पारम्परिक कॅरिअर

विकल्प भी हैं जैसे:-

*वास्तुकला पत्रकार

*वास्तुकला इतिहासकार

*कला निदेशक

*वास्तुकला निदेशक

*वास्तुकला समालोचक

*वास्तुकला फोटोग्राफर

*वास्तुकला रेंडरर/विजुअलाइजर

*वास्तुकला प्रलेखन

*डिजाइन ऑडिटरी तथा कई और

यद्यपि आर्थिक उछाल ने निर्माण उद्योग को एक-एक अनदेखा प्रोत्साहन दिया है, किंतु इसने हरी-भरी पृथ्वी की आवश्यकता के प्रति चेतना भी जागृत की है। इसके अतिरिक्त, सरकार का बल छोटे शहरों के निर्माण की दिशा में है और वह योग्य आवासन के लिए मध्यम आय वर्ग की बढ़ती हुई मांग हजारों इंजीनियरों वास्तुकारों, भू-दृश्य डिजाइनरों, निर्माण विशेषज्ञों एवं कारीगरों के लिए रोजग़ार के विकास एवं सृजन को प्रोत्साहन दे रही है। इसने वास्तुकला के कॅरिअर को लोक-प्रसिद्ध बना दिया है और रचनाशील प्रतिभा सम्पन्न तथा अपनी प्रतिभा के निखार की आकांक्षा रखने वाले व्यक्तियों के लिए अवसर सृजित किए हैं।

वास्तुकला में पाठ्यक्रम चलाने वाले कुछ कॉलेज नीचे सूचीबद्ध हैं:-

*स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर सी..पी.टी., अहमदाबाद

*योजना एवं वास्तुकला विद्यालय, नई दिल्ली

*भारतीय शिक्षा सोसायटी का वास्तुकला कॉलेज, मुंबई

*मुंबई विश्वविद्यालय, सर जे.जे. वास्तुकला कॉलेज

*पुणे विश्वविद्यालय, मराठवाड़ा मित्र मंडल वास्तुकला कॉलेज, पुणे

*जवाहरलाल नेहरू प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, योजना एवं वास्तुकला स्कूल, हैदराबाद

*कमला रहेजा विद्या निधि, वास्तुकला संस्थान, मुंबई

*बलवंत सेठ वास्तुकला स्कूल, मुंबई

*योजना एवं वास्तुकला स्कूल, नई दिल्ली

*पर्यावरण योजना एवं प्रौद्योगिकी केन्द्र, अहमदाबाद

*रिज़वी वास्तुकला कॉलेज, मुंबई

*एल.एस. रहेजा वास्तुकला स्कूल, मुंबई

*भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.), खडग़पुर

*सर जे.जे.वास्तुकला कॉलेज, मुंबई

*चंडीगढ़ वास्तुकला कॉलेज, चंडीगढ़

 

(उषा अल्बुकर्क एवं निधि प्रसाद कॅरिअर्स स्मार्ट प्राइवेट लिमि., नई दिल्ली में क्रमश: निदेशक एवं वरिष्ठ कॉउंसिलिंग सायकोलोजिस्ट हैं। ई-मेल: careerssmartonline@gmail.com)