नौकरी फोकस


Volume-5

रेडियोलॉजी में कॅरिअर

उषा अल्बुकर्क एवं
निधि प्रसाद

रेडियोलॉजी औषधि की वह शाखा है जो रोगों और व्यतिक्रमों के निदान तथा उपचार में विकीर्ण ऊर्जा से संबंधित है. रेडियोलॉजी में विशेषज्ञता करने वाले फिजिशियन को रेडियोलॉजिस्ट कहा जाता है. रेडियोग्राफी का उपयोग एक्स-रे, फ्लोरोस्कोपी, अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी), सीटी स्कैन (कम्प्यूटर टोमोग्राफी), एम.आर.आई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग), एंजियोग्राफी, पी.ई.टी. (पोजिट्रॉन एमिसन टोमोग्राफी) आदि का प्रयोग करते हुए शरीर के आंतरिक एवं गुप्त अंगों की बीमारियों और रोगों के निदान में किया जाता है. इन प्रौद्योगिकियों का उपयोग ऐसी बीमारी के कारणों का पता लगाने और कई रोगों के उपचार में डॉक्टरों की सहायता करने के लिए किया जा रहा है जिन रोगों के लिए रेडिएशन औषधि की आवश्यकता होती है. रेडियोग्राफी रोगों तथा चोटों का निदान करने तथा उपचार करने के लिए डॉक्टरों को शरीर के टीशू, हड्डियों तथा अंगों की इमेज देती है.
विलहेम रोएंटजेन द्वारा नवंबर, 1895 में एक्स-रे की खोज से रेडियोलॉजी का अत्यधिक विकास हुआ है, रेडियोलॉजी में यह विकास उसके आयाम तथा क्षमता दोनों में आया है और अब यह चिकित्सा स्नातकों के लिए अत्यधिक वांछित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम है. यह एक नैदानिक और इंटरवेंशनल विषय है और इसका किसी भी अस्पताल के लगभग प्रत्येक अन्य विभाग से सीधा संबंध होता है.
रेडियोलॉजी एक ऐसा आकर्षक एवं बौद्धिक रूप से प्रेरक विषय है जो रोगियों के निरूपण तथा प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण भूमिका  निभाता है. प्रौद्योगिकीय नव प्रवर्तन तथा परिष्कृत इमेजिंग तकनीकों की व्यापक उपलब्धता ने रेडियोग्राफी को हाल ही के वर्षों में तीव्र गति से उन्नत होने में सक्षम बना दिया है.
रोगियों के रोग-निदान में किसी रेडियोलॉजिस्ट का कार्य अत्यधिक महत्व का है और यह त्वरित एवं अनिवार्य उपचार के अनुप्रयोग में महत्वपूर्ण है. रेडियोग्राफी एक्स-रे जैसी, रेडियो इमेजिंग मशीनों के परिचालन और परिणामों की व्याख्या करने से संबद्ध है. यह कैंसर तथा ट्यूमर का रेडिएशन से उपचार करने में भी शामिल होती है. इस क्षेत्र में कॅरिअर के दो विकल्प हैं- नैदानिक रेडियोग्राफी और थेरापेटिक रेडियोग्राफी. नैदानिक रेडियोग्राफर की जिम्मेदारी रोगियों को पद्धति समझाना, उन्हें जांच के लिए तैयार करना तथा मशीन चलाना और मशीनों एवं रिकॉर्डों का रख-रखाव करना है. वे माइलोग्राम (रीड की हड्डी में चोट, रसौली या ट्यूमर का पता लगाने की एक जांच) जैसी पद्धतियों में फिजिशियन की और पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों या फ्लोरोस्कोपिक मशीनों वाले ऑपरेटिंग रूम में सर्जनों की भी सहायता करते हैं.
थेराप्यूटिक रेडियोग्राफी या रेडियोथैरेपी  का उपयोग अब कैंसर, ट्यूमर तथा अल्सर सहित अनेक रोगों के उपचार तथा निदान में किया जा रहा है. कोई भी थैरेपी रेडियोग्राफर ट्यूमर के उपचार में रेडिएशन का प्रयोग अत्यधिक नियंत्रित स्थितियों में करता है. रेडिएशन की सही मात्रा किसी ट्यूमर के आकार को छोटा कर सकती है.
रेडियोलॉजिस्ट स्वास्थ्य-परिचर्या में एक अहम भूमिका निभाता है :
*फिजिशियन को उपचार करने के लिए उपयुक्त जांच का चयन करने, चिकित्सा इमेजों के परिणामों की व्याख्या करने तथा जांच परिणामों का उपयोग करने में सहायता करके  विशेषज्ञ सलाहकार के रूप में कार्य करता है.
*रेडिएशन (रेडिएशन ओंकोलॉजी) या न्यूनतम रूप में इन्वेसिव, इमेज गाइडेड थेराप्यूटिक इंटरवेंशन (इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी) द्वारा रोगोपचार करता है.
*चिकित्सा इमेज निष्कर्षों का अन्य जांचों एवं परीक्षणों के साथ सह-संबंध स्थापित करता है.
*शरीर के अंगों की सही अवस्थिति तथा परिरक्षण के माध्यम से अधिक रेडिएशन के स्तर का पता लगाता है और उस पर निगरानी रखता है और उसके द्वारा अधिक नुकसानदायी रेडिएशन से बचाव सुनिश्चित करता है.
*आवश्यक होने पर गहन उपयुक्त जांच या उपचार की अनुशंसा करता है और जिस फिजिशियन को मामला भेजता है उससे परामर्श करता है.
*गुणवत्तापूर्ण जांच के उपयुक्त निष्पादन करने में रेडियोलॉजिक प्रौद्योगिकीविदें (उपस्कर चलाने वाले कार्मिकों) को निदेश देता है.
प्रौद्योगिकी के उन्नत होने के साथ-साथ रेडियोलॉजिस्ट्स को अपने पूरे कॅरिअर में अध्ययन करने की आवश्यकता होगी ताकि वे सुनिश्चित कर सकें कि रोगियों की जांच करने एवं निदान करने के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली जांच तकनीकों में हुई प्रगति की उन्हें जानकारी है.
रेडियोलॉजिस्ट, रेडियोग्राफर एवं एक्स-रे तकनीशियन पर रेडिएशन का प्रभाव पड़ता है और अधिकांश समय तक कम रोशनी वाले कमरों में रहते हैं. इसलिए उन्हें रक्षात्मक उपस्कर पहनने चाहिएं, विशेष रूप से महिलाओं को रेडियो सक्रिय सामग्रियों को हस्तन करने में अत्यधिक सावधानी रखनी चाहिए.
पात्रता :
जो व्यक्ति बौद्धिक चुनौतियां स्वीकार करना चाहते हैं और जटिल मामलों का समाधान करना चाहते हैं तथा विश्लेषिक मस्तिष्क वाले हैं एवं विस्तृत ब्यौरे के लिए तीक्ष्ण दृष्टि रखते हैं वे रेडियोलॉजी को एक कॅरिअर के रूप में चुन सकते हैं. उनकी, जीव विज्ञान, भौतिकी तथा अनाटॉमी जैसे विज्ञान विषयों में रुचि होनी चाहिए.
यद्यपि रेडियोलॉजी एक ऐसा चिकित्सा विषय है जिसके लिए बुनियादी एम.बी.बी.एस. योग्यता आवश्यक होती है, किंतु 10+2 या समकक्ष योग्यता गणित, भौतिकी एवं रसायन विज्ञान में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक लेकर उत्तीर्ण उम्मीदवारों के लिए रेडियोग्राफी में डिग्री एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी है.
अर्हताप्राप्त एम.बी.बी.एस डॉक्टर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या राज्य बोर्डों अथवा राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा ली जाने वाली स्नातकोत्तर एनईईटी प्रवेश परीक्षाओं में अर्हताप्राप्त करने के बाद रेडियोलॉजी में एम.डी./डी.एन.बी. का अध्ययन कर सकते हैं. एम.डी. (डॉक्टर ऑफ  मेडिसिन)/डी.एन.बी. (राष्ट्रीय बोर्ड का डिप्लोमेट) के दौरान नियमित शिक्षा, वार्ड ड्यूटी करने और अपना ज्ञान बढ़ाने के अतिरिक्त, अनुसंधान करने होते हैं. उसके बाद कोई भी व्यक्ति तीन वर्षीय सीनियर रेजिडेंसी और/या सब-स्पेशलिटी प्रशिक्षण कर  सकता है और इसके बाद वह रेडियोलॉजिस्ट के रूप में प्रैक्टिस कर सकता है. कोई भी रेडियोलॉजिस्ट निम्नलिखित एक या अधिक क्षेत्रों में विशेषज्ञता कर सकता है:- वक्ष, कार्डियक, गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल, हेड एवं नेक, मस्कुलोस्केलटल, न्यूरो रेडियोलोजी, ओंकोलॉजिकल, पीडिएट्रिक, रेडियोन्यूक्लाइड, थोरॉसिस, यूरो-गायनेकोलॉजिकल तथा वस्कुलर.
रेडियोग्राफी तथा रेडियोथैरेपी में तीन वर्षीय बी.एस.सी.  पाठ्यक्रम भी है और इस क्षेत्र में अर्हता प्राप्त करने के लिए चिकित्सा तकनीशियनों के लिए दो वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी है. स्नातकों के लिए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी उपलब्ध है.
रेडियोलॉजिस्ट बनने के लिए अपेक्षित कौशल :
रेडियोग्राफी अनिवार्यत: एक सेवा-उन्मुखी क्षेत्र है, इसके लिए निम्नलिखित अपेक्षित अनिवार्य कौशल होने चाहिएं:-
*व्यापाक ब्यौरे के लिए एकाग्रता.
*एक विशेषज्ञ के रूप में विशेषज्ञ चिकित्सा दल के एक भाग के रूप में कार्य करने की क्षमता.
*उत्कृष्ट संचार कौशल.
*तनावपूर्ण स्थिति में कार्य करने में समर्थता.
*विवेचनात्मक सोच.
*अवलोकन की अच्छी शक्ति.
*सतर्क रिकॉर्ड रख-रखाव क्षमता.
*रोगी को शीघ्र ठीक होने में सहायता करने की मूल इच्छा.
*रोगियों की समस्याओं और चिंताओं की समझ.
*मशीनों के हस्तन की तकनीकी क्षमता और दक्षता.
*कौशल सीखने एवं उसमें सुधार लाने की इच्छा.
कार्य अवसर :
विशेषज्ञता के विशेष क्षेत्र में प्रशिक्षण के बाद रेडियोग्राफर, रेडियोथैरापिस्ट, एक्स-रे एवं ई.सी.जी. तकनीशियन अस्पतालों, क्लीनिकों, निजी नर्र्सिंग होम्स, सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठनों, अनुसंधान संस्थाओं, भेषज संस्थाओं में और रक्षा, केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों द्वारा नियंत्रित चिकित्सा संस्थाओं में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड तथा अन्य नैदानिक विभागों में कार्य कर सकते हैं. वे अध्यापन अथवा नाभिकीय औषधि तथा अनुसंधान कार्य को भी चुन सकते हैं.
रेडियोलॉजिस्ट और रेडियोग्राफर की निम्नलिखित में बड़ी संख्या में आवश्यकता होती है:-
*नर्सिंग होम
*अस्पताल
*निदान केंद्र
*सुपर स्पेशलिटी अस्पताल
*चिकित्सा संस्थाओं के एक्स-रे/अल्ट्रासाउंड विभाग
*रक्षा बल
*प्राइवेट प्रैक्टिस
रेडियोग्राफी में कार्य-प्रोफाइल
किसी रेडियोलॉजिस्ट को निम्नलिखित विशेष कार्य करने आवश्यक होते हैं:-
*एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड स्कैन, कीमोथैरेपी, रेडियो एक्टिव आइसोटोप तथा हार्मोन थैरेपी जैसी जांच तकनीकों और उपचार के कार्य करना.
*जांच के दौरान रोगी को सहज बनाए रखना और यह सुनिश्चिित करना कि वे जांच प्रक्रिया को समझते हैं.
*जांच-परिणामों का विश्लेषण एवं व्याख्या करना तथा यथा संभव शीघ्र किसी निदान का निर्णय लेना.
*विशेषज्ञों से भिन्न चिकित्सा व्यवसायियों के साथ कार्य करना.
*सशस्त्र बलों जैसे निजी संगठनों के लिए एवं अस्पतालों, विशेषज्ञ जांच केंद्रों पर कार्य करना.
*चिकित्सा इमेजिंग के माध्यम से रोगियों के निदान में किसी प्रगति के बारे में अद्यतन रहना.
*रोगियों के स्वस्थ होने के दौरान, विशेष रूप से कैंसर तथा अन्य असाध्य रोगों से ग्रस्त रोगियों के साथ जुडक़र कार्य करना.
पिछला दशक देशभर के स्वास्थ्य परिचर्या केंद्रों-अस्पतालों, स्वास्थ्य परिचर्या केंद्रों, पोलिक्लीनिक्स, नर्सिंग होम, ग्रामीण क्लीनिकों, निदान केंद्रों आदि में व्यापक सुविधा प्राप्ति का रहा है. औषधि के क्षेत्र में भी प्रौद्योगिकी बड़े पैमाने पर उन्नति कर रही है, इसके परिणामस्वरूप नए उपस्करों को चलाने, इनका प्रयोग करने तथा परिणामों की व्याख्या करने के लिए प्रशिक्षित कार्मिकों की आवश्यकता तीव्र गति से बढ़ रही है. अत: प्रशिक्षित डॉक्टरों, सर्जनों तथा विभिन्न अद्र्ध-चिकित्सा विशेषज्ञों एवं रेडियोग्राफर और चिकित्सा तकनीशियनों जैसे तकनीशियनों की मांग बढ़ रही है. रेडियोग्राफी, रेडियोथैरेपी तथा रेडिएशन औषधि बड़ी संख्या में रोगों के उपचार तथा निदान में महत्वपूर्ण साधन बन गए हैं. स्वास्थ्य परिचर्या के विस्तार होने से इस कॅरिअर की भावी संभावनाएं अत्यधिक उज्जवल हैं. और इसके साथ व्यावसायिक तथा तकनीकी कार्य की देशभर में आवश्यकता होगी.
संस्थाओं की सूची
*अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली
*क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सी.एम.सी.), वेल्लोर
*सशस्त्र बल चिकित्सा कॉलेज (ए.एफ.एम.सी.), पुणे
*जे.आई.पी.एम.ई.आर. कॉलेज, पुदुच्चेरी
*मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एम.ए.एम.सी), दिल्ली
*लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एल.एच.एम.सी.), दिल्ली
*मद्रास मेडिकल कॉलेज, चेन्नै
*स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, चंडीगढ़
*सेठ जी.एस. मेडिकल कॉलेज (के.ई.एम. अस्पताल), मुंबई
*ग्रांट मेडिकल कॉलेज एवं सर जे.जे. अस्पताल समूह, मुंबई
*कस्तूरबा चिकित्सा कॉलेज (मंगलौर एवं मणिपाल)
सूची उदाहरण मात्र है.
उषा अल्बुकर्क़  कॅरिअर स्मार्ट प्राइवेट लि. की निदेशक हैं, ई-मेल : careerssmartonline@gmail.com निधि प्रसाद उत्तर दिल्ली शाखा की अध्यक्ष हैं, ई-मेल: nidhiprasadcs@gmail.com
चित्र: गूगल के सौजन्य से