नौकरी फोकस


Volume 24, 2017

विदेशी भाषाओं में कॅरिअर

श्रीप्रकाश शर्मा

भाषा का ज्ञान विवेक का द्वार-मार्ग है
-रोजर बेकन

भाषा मनुष्य की आत्मा कही जाती  है. जो हम अनुभव करते हैं और सोचते हैं भाषा उसके संचार एवं अभिव्यक्ति का एक अत्यधिक सहज साधन है. यह तथ्य निर्विवाद है कि विशेष रूप से उदारीकरण, निजीकरण और वैश्विकरण के संक्रांति काल के बाद, बदल रहे विश्व परिदृश्य के साथ ही विदेशी भाषाओं का महत्व भी और बढ़ा है. बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आगमन में तीव्र वृद्धि एवं भारतीय कंपनियों द्वारा विदेश में निवेश की त्वरित दर के कारण, विदेशी भाषा का ज्ञान देश एवं विदेश में कॅरिअर के अवसरों का अधार (पासपोर्ट) माना जाने लगा है.
कोई विदेशी भाषा क्यों सीखे?
विदेशी भाषा सीखने से न केवल जीवन-शैली समृद्ध होती है और सांस्कृतिक लोकाचार बढ़ता है बल्कि इससे कॅरिअर के और अधिक विकल्प तथा बेहतर कार्य अनुभव मिलते है. हम अपने आस-पास के जीवन तथा माहौल के विभिन्न परिप्रेक्ष्यों तथा दृष्टि प्राप्त करने में भी सफल होते हैं. हमारी संज्ञानात्मक कोटि तथा जीवन-कौशल में अत्यधिक स्वाभाविक सुधार आता है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोई रोज़गार मिलने से हमें आकर्षक आय, विश्व-परिप्रेक्ष्य और अंतर्राष्ट्रीय पहचालन मिलती है. हम विभिन्न पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों के साथ सांस्कृतिक सहनशीलता तथा धार्मिक सामंजस्य की कला सीखते हैं. कला, संस्कृति, संगीत, सिनेमा, उपासना, पाक-कौशल के हमारे ज्ञान का स्तर व्यापक हो जाता है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि आज के विश्व की खुली अर्थव्यवस्था में विदेशी भाषाओं का ज्ञान एक अच्छा कॅरिअर प्रदान करता है.
एक अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, आगामी दो दशकों में विशेष रूप से तब, जबकि विश्व में विभिन्न देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियां तीव्र गति से विकसित हो रही होंगी, १.५ मिलियन से भी अधिक विदेशी भाषा विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी. विदेशी भाषा व्यवसायियों की भारत में विभिन्न बी.पी.ओ., आई.टी. तथा के.पी.ओ. में भर्ती किए जाने की संभावना होती है. इन व्यवसायियों को योरोपीय देशों से आई कंपनियों में भी भर्ती किया जा सकता है.
विश्व रोज़गार बाजार तथा कार्पोरेट संस्कृति की नवीनतम प्रवृत्ति के अनुसार, निम्नलिखित विदेशी भाषाओं में विशेषज्ञ व्यवसायियों की मांग अत्यधिक संभावनापूर्ण एवं आकर्षक प्रमाणित हो सकती है-फ्रैंच, रूसी, जर्मन, चीनी, पुर्तगी, जापानी, कोरियन, स्पेनिश.
आवश्यक पात्रताएं :
किसी विदेशी भाषा में डिग्री प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्ति को किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड से जमा २ परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए. स्नातक डिग्री पाठ्यक्रम की अवधि सामान्यत: तीन वर्ष होती है. विदेशी भाषा में डिग्री प्राप्त करने के बाद इच्छुक व्यक्ति २ वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और उसके बाद पी.एच.डी. कर सकता है.
पैकेज एवं अनुलाभ :
अन्य रोज़गारों की तरह ही, विदेशी भाषा रोज़गार भी अधिक अनुभवी उम्मीदवार को अधिक वेतन देता है. तथापि, प्रारंभ में, उम्मीदवार को ३०,००० से ४०,००० रु. प्रति माह वेतन दिया जाता है. विदेशी दूतावासों तथा व्यावसायिक वाणिज्य दूतावासों में रोज़गार मिलने पर भी इतना ही वेतन पैकेज मिलता है, किंतु दुभाषिया एवं अनुवाद के रोज़गार में इन व्यवसायियों को पर्याप्त रूप से अत्यधिक ऊंचा वेतन-पैकेज मिल सकता है. एक कुशल दुभाषिये को रु. १००० प्रति घंटा से लेकर एक दिन में २५०००/- रु. तक का भुगतान किया जा सकता है. अनुवादक १ रु. प्रति शब्द से लेकर १० रु. प्रति शब्द की दर से भुगतान प्राप्त कर सकते हैं. ये सभी वेतन, सेवाएं लेने वालों तथा संगठनों की भाषा की प्रकृति तथा आर्थिक पृष्ठभूमि पर निर्भर करते हैं.
छात्रवृत्तियां :
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संरक्षण में अनेक अंशकालिक रोज़गार के माध्यम से अर्न एज़ यू लर्ननामक छात्रवृत्ति प्रदान करता है. यह छात्रवृत्तियां भी देता है. विभिन्न देशों के दूतावास भी छात्रवृत्ति
देते हैं.
विदेशी भाषा कहां सीखें :
कई शैक्षिक संस्थान अपने पाठ्यक्रमों में विदेशी भाषा रखते हैं, इसलिए छात्र वहां प्रारंभ से ही और वह भी बिना किसी विशेष प्रयास तथा अतिरिक्त शुल्क के, विदेशी भाषा सीख सकते हैं. किंतु वहां उनमें अधिकांशत: ऐसे छात्र भी होते हैं जो विदेशी भाषा में स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम एवं पीएच.डी. करने के लिए केवल हायर सेकेंडरी पूरी करने के बाद विदेशी भाषा का अध्ययन करने के लिए प्रवेश लेते हैं. तथापि विभिन्न संस्थान कम अवधि तथा कम लागत वाले डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी चलाते हैं.
विभिन्न विदेशी भाषा अध्ययन संस्थान
१.कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र, हरियाणा.
२.गरूनानक देव विश्वविद्यालय, विदेशी भाषा विभाग, अमृतसर, पंजाब.
३.सिम्बियोसिस विदेशी भाषा एवं भारतीय भाषा संस्थान, पुणे.
४.विदेशी भाषा विभाग, पुणे विश्वविद्यालय, पुणे.
५.रामनारायण रुइया, कॉलेज, मुम्बई.
६.सेंट टेरेसा कॉलेज, एर्णाकुलम, केरल.
७.केन्द्रीय अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा संस्थान (सी.आई.ई.एफ.एल.), हैदराबाद.
८.जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय भाषा विद्यालय, नई दिल्ली.
९.बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
१०.विदेशी भाषा स्कूल, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय, नई दिल्ली.
११.सुदूर शिक्षा निदेशालय, अन्नामलै विश्वविद्यालय.
१२.सुदूर शिक्षा संस्थान, मद्रास विश्वविद्यालय.
१३.सुदूर शिक्षा विद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय
१४.सुदूर एवं ऑनलाइन शिक्षा निदेशालय
१५.विदेशी भाषा प्रशिक्षण संस्थान, बंगलौर.
रोज़गार-संभावना :
किसी विदेशी भाषा का अध्ययन विश्व की वर्तमान सार्वभौमिक अर्थव्यवस्थाओं में अनेक रोज़गार अवसरों के द्वार खोल देता है. यह, किसी विदेशी भाषा का ज्ञान प्राप्त करने के लिए शिक्षार्थियों के न केवल उत्साह एवं गर्व को बनाए रखता है, बल्कि किसी प्रत्याशी को आज के प्रतिस्पर्धा-भरे बाजार का बेहतर रूप में सामना करने में भी सक्षम बनाता है. किसी विदेशी भाषा में शैक्षिक डिग्री और निपुणता पर्यटन, शिक्षा, डिप्लोमटिक सेवाओं, दुभाषिया, अनुवाद, अंतर्राष्ट्रीय व्यापर एवं संबंध, मनोरंजन, जन-सम्पर्क, मास मीडिया एवं पत्रकारिता, प्रकाशन, संचार, दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों तथा भविष्य में रोज़गार देने की संभावनाओं वाले अन्य विभिन्न संस्थान में असंख्य रोज़गार का एंट्री-टिकट प्रमाणित हो सकती है. विश्व के विभिन्न देशों में अपना सुनियोजित नेटवर्क रखने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी अपने विभिन्न पदों पर विदेशी भाषा विशेषज्ञ भर्ती करती हैं. इसके अतिरिक्त, इंटरनेट क्रांति ने भी ऑनलाइन कोंटेंट राइटर, तकनीकी अनुवादकों एवं दुभाषियों के पदों पर विदेशी भाषा व्यवसायियों की मांग बढ़ाने में भी सहायता की है. संयुक्त राष्ट्र संघ (यू.एन.ओ.) की विभिन्न एजेंसियों सहित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठनों-जिन्हें विदेशी भाषा विशेषज्ञों की बड़ी संख्या में आवश्यकता होती है, उनमें खाद्य कृषि संगठन, विदेश मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक शामिल हैं. तथापि, विदेशी भाषा व्यवसायियों के लिए रोज़गार के कुछ विशेषज्ञतापूर्ण क्षेत्रों में भाषाविज्ञान, दुभाषिया, अनुवाद एवं अध्यापन क्षेत्र शामिल हैं.
इन पाठ्यक्रमों पर लगने वाला शुल्क?
जहां तक विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रमों के शुल्क का संबंध है, यह शुल्क एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय तथा एक संस्थान से दूसरे संस्थान में अलग-अलग होता है. तथापि जे.एन.यू. दिल्ली विश्वविद्यालय अन्य विश्वविद्यालयों तथा संस्थानों की तुलना में बहुत कम शुल्क लेते हैं. इन पाठ्यक्रमों के लिए शुल्क संरचना भाषा तथा किसी विशेष विदेशी भाषा को चुनने वाले छात्रों की संख्या निर्भर होती है. तथापि, कोरियाई, जापानी तथा चीनी जैसी विदेशी भाषाएं अत्यधिक कठिन मानी जाती हैं और उनके संस्थान भी कम हैं, इसलिए इन भाषाओं के पाठ्यक्रमों पर तुलनात्मक रूप से अधिक लागत लगती है. अरबी और परसियन भाषा के पाठ्यक्रम देश के सभी विश्वविद्यालयों में उपलब्ध हैं, इसलिए ये पाठ्यक्रम तुलनात्मक रूप से कम लागत पर कराए जाते हैं.
छात्रवृत्तियां एवं वित्तीय सहायता :
विदेशी भाषाओं के अध्ययन के लिए पाठ्यक्रमों के उच्च शुल्क को देखते हुए विश्वविद्यालयों और सरकार द्वारा छात्रवृत्तियों और वित्तीय सहायता के विभिन्न प्रावधान हैं. इस संबंध में, भारत में मैक्स म्यूलर भवन की एक आकर्षक योजना है जिसके अंतर्गत विदेशी भाषाओं के उच्च स्तर का अध्ययन करने वाले दो श्रेष्ठ छात्रों को छात्रवृत्तियां दी जाती हैं. इसी तरह, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का एक अत्यधिक शानदान एक्सचेंज कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत छात्रों को जे.एन.यू. में अपने नियमित अध्ययन के दौरान विदेशी विश्वविद्यालयों में तथा वहां के छात्रों को जे.एन.यू. में अध्ययन करने का विकल्प दिया जाता है. इसके अतिरिक्त दिल्ली विश्वविद्यालय में भी मैरिट छात्रवृत्तियां देने का प्रावधान है. तथापि, कोरिया एवं जापान जैसी विदेशी सरकारों के अपने निजी कार्यक्रम हैं, जिनके अंतर्गत वे उनकी संबंधित भाषाओं का अध्ययन करने का विकल्प लेने वाले छात्रों को छात्रवृत्तियां देते हैं.
विदेशी भाषा - कॅरिअर एवं रोज़गार के अवसर :
बाजार अर्थव्यवस्था के वर्तमान परिदृश्य में, किसी विदेशी भाषा का अध्ययन करना किसी भाषाविद् के लिए जोश या उमंग बन सकता है किंतु यह एक अंतिम पड़ाव नहीं है. विदेशी भाषाओं का कौशल, आज के तीव्र गति से आगे बढ़ रहे विश्व में अत्यधिक वांछित रोज़गार अवसर प्रदान करता है. सरकारी, व्यावसायिक एवं विभिन्न उद्यम संगठनों में विदेशी भाषा विशेषज्ञों की मांग ने २१वीं शताब्दी की युवा-पीढ़ी को अत्यधिक आकर्षित किया है.
विदेश सेवाएं :
विश्व अर्थव्यवस्था के आज के खुले, वैश्विक एवं राजनीतिक संवेदनशील परिदृश्य में, सभी देशों के पूरे विश्व में दूतावास, व्यवसाय वाणिज्यदूतावास हैं. ये राजनीतिक संगठन अपने मूल देशों के हितों का ध्यान रखते हैँ और इस तरह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं संबंधों के प्रबंधन एवं प्रोत्साहन में महत्वपूर्ण सहायता लेते हैं. देशों की सरकारों को विदेशी भाषा बोलने वालों की आवश्यकता होती है जिन्हें निम्नलिखित कार्यों के लिए विदेश में रखा जाता है:-
*विदेशी नागरिकों, सरकार एवं विभिन्न अन्य शिष्ट व्यक्तियों को सुनना
*विदेशी भाषा में खुफिया निष्कर्ष एवं जांच रिपोर्टों को पढऩा, अध्ययन करना, अनुवाद करना एवं उत्तर देना.
*विभिन्न देशों में विभिन्न विभागों के साथ सम्पर्क
*विभिन्न विदेशी भाषाओं में अनुसंधान कार्य संचालन
*पासपोर्ट एवं वीजा जारीकर्ता कार्यालयों में विभिन्न कार्य करना
*राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों, ऐतिहासिक महत्व के स्थानों पर यात्रियों की फ्रिस्किंग
अंतर्राष्ट्रीय संस्थान एवं संगठन
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.), संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को), संयुक्त राष्ट्र बाल आपातकाल निधि (यूनिसेफ) जैसी विभिन्न संयुक्त राष्ट्र संगठन एजेंसियों और रेड क्रॉस सोसायटी, एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों तथा विभिन्न अन्य संगठनों को ऐसे विभिन्न कार्य करने के लिए विदेशी भाषा विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है जो कार्य प्रबंधन एवं प्रशासन के लिए अनिवार्य होते हैं. अंग्रेजी के अतिरिक्त, जो अन्य भाषाएं इन अंतर्राष्ट्रीय निकायों में अधिक मांग में हैं वे भाषाएं फ्रैंच, स्पेनिश, जर्मन एवं अरबी हैं.
पर्यटन एवं आतिथ्य उद्योग :
आज विश्व-पटल पर पर्यटन एक अत्यधिक बड़े व्यवसाय के रूप में उभरा है और जिन राष्ट्रों में पर्यटक अत्यधिक संख्या में जाते हैं उन राष्ट्रों को ऐसे विदेशी भाषा विशेषज्ञों की हमेशा आवश्यकता होती है जो विदेशी मेहमानों की भाषा संबंधी आवश्यकता को पूरा कर सकें. इसके अतिरिक्त होटलों, रेस्तरां, शॉपिंग माल्स, मल्टीप्लेक्स सिनेमा हाल्स तथा मनोरंजन पार्कों आदि को, विदेशी अतिथियों से कार्य-संव्यवहार के लिए विभिन्न विदेशी भाषा विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है. विदेश में उद्यम स्थापित करने वाली कंपनियां स्थानीय एवं आयोजक देश की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विदेशी भाषा विशेषज्ञों की भर्ती करती हैं इस तथ्य को कोई नहीं ठुकरा सकता कि इन अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों की सफलता, गुणवत्तापूर्ण ग्राहक सेवा प्रदान करने के लिए विभिन्न आउटलेट्स पर कार्य करने वाले व्यक्तियों के भाषायी कौशल पर अधिक निर्भर होती है.
अनुवाद एवं दुभाषिया कार्य :
आज के विश्व में संचार तथा ज्ञान-अर्जन कार्य-प्रणाली में व्यापक परिवर्तन आया है. हमें वाणिज्य एवं कल्याण-दोनों उद्देश्यों के लिए किसी आतिथेय भाषा के प्रसिद्ध लेखकों की श्रेष्ठ कृतियों/विचारों के अनुवाद के लिए भाषाविज्ञानियों की आवश्यकता होती है. लेखकों की पुस्तकों के अनुदित पाठ, उनकी बिक्री में आश्चर्यजनक रूप में वृद्धि करने में उनकी सहायता करते हैं और इससे उनके लाभ में वृद्धि होती है. विदेशी एवं राजनयिक संबंध बनाए रखने के संदर्भ में सरकारी अधिकारी एवं राष्ट्राध्यक्ष विभिन्न देशों का दौरा करते हैं और बेहतर संचार के लिए उन्हें विदेशी भाषा के दुभाषियों की आवश्यकता होती है. दुभाषिया- व्यवसाय न केवल आकर्षक है, बल्कि हमेशा मांग में रहता है. दुभाषिए व्यक्ति विभिन्न राष्ट्रों की सरकारों के सेलीब्रेटीज तथा नीति-निर्माताओं के साथ विदेश के दौरे करते हैं. इसलिए इस कार्य में रोज़गार की उच्च संभावनाएं हैं.
अध्यापन :
विदेशी भाषाओं में विशेषज्ञता करने वाले व्यक्तियों के लिए किसी रोज़गार की कोई कमी नहीं होती. अध्यापन न केवल एक शालीन कार्य है, बल्कि निरंतर अभ्यास के माध्यम से कई और भाषाएं सीखने का एक मंच भी है. छात्रों को विदेशी भाष शिक्षा देने के लिए स्कूल विदेशी भाषा शिक्षकों की नियुक्ति कर रहे हैं. केन्द्रीय विद्यालय संगठन अपने स्कूलों में जर्मन शिक्षा देता है. विश्वविद्यालय एवं कॉलेज नियमित संकाय सदस्यों के रूप में विभिन्न विदेशी भाषा विशेषज्ञों की भर्ती करते हैं.
रोज़गार के अन्य क्षेत्रों से भिन्न विदेशी भाषा किसी इच्छुक उम्मीदवार को निम्नलिखित रोज़गार विकल्प देती है :-
*विदेशी भाषा प्रशिक्षक
*राजनयिक सेवा व्यवसायी
*अनुसंधान एसोशिएट
*विभिन्न कंपनियों और सरकारी संगठनों के लिए अनुवादक
*फ्रीलांस लेखक
*अनुवादक
*दुभाषिया
*जन सम्पर्क अधिकारी
*एयर होस्टेस एवं फ्लाइट स्टीवर्ड
(लेखक एक कॅरिअर सलाहकार हैं. ई-मेल :spsharma.rishu@gmail.com)
चित्र: गूगल के सौजन्य से