नौकरी फोकस


Vol.29, 2017

 
भौगोलिक सूचना प्रणालियों में कॅरिअर : अपनी सफलता के मार्ग की योजना तैयार करें

रुचि श्रीमाली

आपने कितनी बार एक गंतव्य के लिये अपने मार्ग की तलाश में गूगल मानचित्र का प्रयोग किया है? क्या आपने कभी सोचा है कि ओला और उबर कैब ड्राइवर अपने रूटों का पता लगाने के लिये जिस एप्प का इस्तेमाल करते हैं उसे किसने विकसित किया है? अथवा क्या आपने कभी किसी एप्प का प्रयोग किया है जिससे आप यह पता लगाने में समर्थ होते हैं कि वसा को नष्ट करने के लिये आप कितनी दूरी तय कर चुके हैं? अच्छा, तो ये सभी एप्स भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) पर आधारित होते हैं.
जीआईएस सभी प्रकार के भौगोलिकीय या आकाशीय विवरण को एकत्र, भण्डारण, प्रबंधन, विश्लेषण, जोड़तोड़ और प्रस्तुत करने की एक प्रणाली है. सरल शब्दों में, हम कह सकते हैं कि जीआईएस हमें पृथ्वी पर एक खास स्थान के बारे में अच्छी तरह से जानने में समर्थ बनाती है. किसी खास स्थान बिंदु के चित्र को जुटाने के साथ-साथ, जीआईएस मूल तत्व के विवरण पर भी निर्भर होती है. मूल तत्व विवरण अंतरिक्ष के किसी बिंदु विशेष के बारे में अतिरिक्त सूचना होती है.
माना कि आपके घर के निकट एक स्कूल है. स्कूल की वास्तविक स्थिति आकाशीय विवरण है परंतु अतिरिक्त सूचना जैसे कि स्कूल का नाम, पढऩे वाले छात्रों की संख्या, इसमें कितनी कक्षाएं हैं, आदि इसका मूल तत्व विवरण होगा.
इन दिनों जीआईएस एक बहुत ही प्रगामी प्रौद्योगिकी है. इसका समस्याओं के निदान और सरकारी स्तरों, कार्पोरेट स्तरों और यहां तक कि व्यक्तिगत स्तरों पर निर्णय लेने में इस्तेमाल किया जा रहा है. यह अन्य बातों के अलावा, हमारी आतंकवादियों की गतिविधियों का पता लगाने, एक समयावधि के बाद तस्वीरों का विश्लेषण करके किसी स्थान की भौगोलिक विशेषताओं या वन्य कटाव की स्थिति का पता लगाने, एक खास क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सघनता को समझने में सहायता करती है.
जीआईएस से जुड़े छह प्रमुख सेवा
क्षेत्र हैं:
1. मैपिंग फीचर्स: यह प्रौद्योगिकी हमारी वास्तविक-दुनिया की विशेषताओं का पता लगाने और उनके बीच आकाशीय संबंध का विश्लेषण करने में मदद करती है.
2. मात्राओं का चित्रण: मान लो कि आप कपास का स्रोत ढूंढऩा चाहते हैं. जीआईएस आपकी उन स्थानों का पता लगाने में सहायता कर सकती है जहां प्रचुर मात्रा में कपास उगाई जाती है और साथ ही आप उन क्षेत्रों को ढूंढ़ सकते हैं जहां यह कम मात्रा में होती है. मात्राओं का चित्रण संसाधन और आपूर्ति प्रबंधन में सहायता कर सकता है.
3. सघनता का चित्रण: सघनता का आशय है एक परिभाषित क्षेत्र में खास फीचर की संख्या या मात्रा. जीआईएस हमारे दिल्ली के जनसंख्या घनत्व के मुकाबले कोलकाता के जनसंख्या घनत्व अथवा मुंबई में मैकडोनल्डस के मुकाबले चेन्नई में मैकडोनल्डस की संख्या के निर्धारण में मदद कर सकती है.
4. रुचि के क्षेत्र की विशेषताओं का निर्धारण: हम किसी खास क्षेत्र की भिन्न-2 खूबियों का अध्ययन करके वहां रह रहे लोगों की प्रकृति और उनके लाइफस्टाइल के बारे में अच्छी जानकारी हासिल कर सकते हैं. उदाहरण के लिये यह जानने के लिये कि पालम हवाई अड्डे के निकट कितने लोग ध्वनि प्रदूषण अनुभव कर रहे हैं और उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति क्या है, नीतियों के निर्धारण में उपयोगी हो सकती है जिससे उनकी बेहतर सहायता हो सकती है. इसी प्रकार किसी क्षेत्र विशेष में किसान क्या उगा रहे हैं, जानने से सरकार की उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये उत्कृष्ट योजनाएं शुरू करने में सहायक हो सकती हैं.
5. आसपास के बारे में पता लगाना : आपातस्थिति के मामले में, यह अपने आसपास के एक विनिर्दिष्ट क्षेत्र में (दूरी जिसको आप तय कर सकते हैं) शेल्टर होम का पता लगाने में सहायक होता है. जीआईएस इसमें बीयूएफएफईआर जैसे जियोप्रोसेसिंग टूल्स के सहारे मदद करता है.
6. परिवर्तन की मैपिंग : कुछ वर्षों या दशकों की अवधि के दौरान विशेषताओं का आकलन करके यह अनुमान लगाना आसान हो जाता है कि भविष्य में क्या होने वाला है. यदि कोई नदी धीरे धीरे अपनी दिशा को बदल रही है या कोई वन धीरे धीरे समाप्त हो रहा है और शहरी विकास के लिये रास्ता दे रहे हैं? जीआईएस चित्रों को एकत्र और भण्डारण कर सकता है जिनकी स्थान विशेष पर हो रहे बदलावों को देखने के लिये किसी भी समय तुलना की जा सकती है.
जीआईएस के क्षेत्र में रोजग़ार की संभावनाएं
जीआईएस में व्यापक प्रकृति के अनुप्रयोग शामिल होते हैं. अंतरिक्ष से पृथ्वी पर ध्यान लगाकर रखने से हमें भूगोल और भूविज्ञान से संबंधित विभिन्न समस्याओं से निपटने में सहायता मिलती है. चित्रों का दूरसंवेदन, मैपिंग, माडलिंग, भू-आकाशीय डाटाबेस का विकास, सूचना प्रणालियों का डिज़ाइन, भूसंगणना, जियोविजुएलाइजेशन और जीआईएस विश्लेषण ऐसे कुछेक क्षेत्र हैं जिनमें कोई विशेषज्ञता प्राप्त कर सकता है और इस क्षेत्र में कार्य कर सकता है.
जीआईएस विशेषज्ञ सरकारी विभागों जैसे कि कृषि, शहरी और ग्रामीण योजना, वानिकी, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, अवसंरचना विकास, जन स्वास्थ्य और रक्षा क्षेत्र में बृहत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जीआईएस विश्लेषक और प्रौद्योगिकीविद  उन्नतम इन-कार नेविगेशन सिस्टम्स और ऑटोमेटिक व्हीकल लोकेशन सिस्टम्स के बृहत निर्माण में संलग्न रहते हैं. वे विमानन क्षेत्र, समुद्री क्षेत्र और यातायात प्रबंधन में भी कार्य करते हैं.
जियोइन्फारमेटिक डाटा विश्लेषकों की भूगोल और पृथ्वी विज्ञान क्षेत्रों जैसे कि समुद्रीविज्ञान, मौसम विज्ञान, जलवायु परिवर्तन अध्ययन, आपदा प्रबंधन और पर्यावरणीय मॉडलिंग एवं विश्लेषण, अपराध विज्ञान (विशेषकर अपराध सिमुलेशन), दूरसंचार, वास्तुकलात्मक और पुरातात्विक पुनर्निर्माण, और बिजनेस स्थान नियोजन आदि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर जीआईएस विशेषज्ञों की भारी मांग है.
केंद्रीय सरकार की एजेंसियां जैसे कि हैदराबाद में उन्नत डाटा प्रसंस्करण अनुसंधान संस्थान (एडरिन) और राष्ट्रीय दूर संवेदी एजेंसी (एनआरएसए), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) बंगलुरू, उत्तर पूर्व अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एनईएसएसी) शिलांग, क्षेत्रीय दूर संवेदन अनुप्रयोग केंद्र (आरआरएसएसी), बंगलुरू, देहरादून, खडग़पुर, जोधपुर और नागपुर तथा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) अहमदाबाद, अक्सर जीआईएस विश्लेषकों के लिये रोजग़ार के अवसरों को विज्ञापित करते रहते हैं.
इसी प्रकार समय-समय पर राज्य सरकारें भी जीआईएस से संबंधित अनेक रोजग़ारों के विज्ञापन देती हैं. राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), राज्य बिजली बोर्ड और अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र भूसूचनाविज्ञान विशेषज्ञों की नियुक्तियां करते हैं.
कोई भी अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संयुक्त राष्ट्र, यूटिलिटी कंपनियों, पर्यावरणीय एजेंसिंयों, खनिज अन्वेषण कंपनियों, राष्ट्रीय सर्वेक्षण और मानचित्रीकरण संगठनों, पर्यटन उद्योग, इमरजेंसी सेवाओं और बाज़ार विश्लेषण तथा ई-कामर्स उद्योगों में भी आवेदन कर सकता है.
जियोइन्फारमेटिक्स में विशेषज्ञता रखने वाले व्यक्तियों के लिये निजी क्षेत्र में भी व्यापक अवसर हैं. टेक. और टेलीकॉम संगठन जैसे कि गूगल, टीसीएस, रिलायंस कम्यूनिकेशन्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, रिलायंस एनर्जी के साथ-साथ आगामी कंपनियों जैसे कि मैग्नासॉफ्ट टेक्नोलॉजी सर्विसिज, साइबरटेक सिस्टम्स और जियोफाइनी टेक्नोलॉजिज जीआईएस विशेषज्ञों को रोजग़ार प्रदान करती हैं.
अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी जैसे कि सेल्फ-ड्राइविंग कारें, वर्चुअल रियल्टी, सिटीजन सेंसर्स, मानवरहित एरियल व्हीकल्स और वियरेबल्स आदि कुछेक नये आकर्षक क्षेत्र हैं जिनमें जीआईएस विशेषज्ञ काम कर सकते हैं. ऑटोडेस्क, ईएसआरआई, ओरेकल स्पेशियल, बेंटले और मैपइन्फो आदि इस क्षेत्र की कुछेक वैश्विक जानी पहचानी कंपनियां हैं.
जिनकी उद्यमशीलता में रुचि है वे इस क्षेत्र में अपना स्वयं का व्यवसाय लगा सकते हैं जबकि जिनकी शैक्षिक अभिरुचि है, वे अकादमिक और अनुसंधान क्षेत्र में रीडर और प्रोफेसर जैसे पदों पर जा सकते हैं.
जैसा कि अधिक से अधिक उद्योग अपनी गतिविधियों की योजना और प्रबंधन में आकाशीय डाटा का इस्तेमाल कर रहे हैं, इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की मांग बहुत तेज़ी से बढ़ रही है. अमरीकी श्रम विभाग ने जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजिज की गिनती नेनोटेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी के साथ की है क्योंकि 21वीं सदी में ये तीनों सर्वाधिक महत्वपूर्ण और तेजी से विकसित हो रहे उद्योग हैं.
जीआईएस विशेषज्ञ का वेतन प्रति वर्ष
रु. 2,50,000 से शुरू होता है और शीघ्र ही बढक़र रु. 5,00,000 तथा अधिक तक पहुंच जाता है.
इस क्षेत्र में प्रवेश के वास्ते आपको क्या कुछ अध्ययन करने की आवश्यकता होती है?
श्री चंद्रशेखर बालाचंद्रन, भौगोलिक अध्ययन संस्थान के संस्थापक का कहना है, ‘‘जियोइन्फारमेटिक्स में कॅरिअर का सबसे सामान्य मार्ग भूगोल, कम्प्यूटर विज्ञान और जीआईएस में डिप्लोमा या डिग्री हासिल करना है. यद्यपि इन दिनों भौगोलिकविदों की अपेक्षा भूगोल स्नातक को कई तरह के प्रस्ताव प्राप्त हो सकते हैं. इस क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के लिये भूगोल संबंधी ज्ञान और कौशल के साथ-साथ प्रोग्रामिंग और अनुप्रयोग कौशलों के संबंध में जीआईएस विनिर्दिष्ट पाठ्यक्रम उत्तम रहेगा.‘‘
ज़्यादातर नियोक्ता स्नातकोत्तर अर्हता वाले उम्मीदवारों को वरीयता देते हैं. विज्ञान पृष्ठभूमि होना भी अनिवार्य है. जिन्होंने आईटी और कम्प्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में बी.एससी, बी.टैक या बीई की है अथवा कृषि, भूगोल और भूविज्ञान में स्नातक अर्हता प्राप्त की है वे जियोइन्फारमेटिक्स और दूर संवेदन में एम.एससी या एम.टैक में प्रेवश प्राप्त कर सकते हैं. इस क्षेत्र में उच्चतर अध्ययन और पीएच.डी का भी विकल्प है.
अन्य क्षेत्रों के लोग एमए पाठ्यक्रम कर सकते हैं और अपने कौशलों को उन्नत करने के लिये लघु प्रमाणपत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी कर सकते हैं. उदाहरण के लिये इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइन्फामेटिक्स एंड रिमोट सेन्सिंग (आईजीआरएस) जीआईएस विषयक्षेत्र में छह माह के दो पाठ्यक्रम जैसे कि जीआईएस का परिचय और आरएस, फोटोग्रामीट्री, स्पेशियल एनालिसिस, जियोस्टेस्टिक्स, जीआईएस परियोजना विकास, वेब जीआईएस और जियोडाटाबेस संचालित करता है. भारतीय दूरसंवेदी संस्थान (आईआईआरएस) निम्नलिखित में विशेषज्ञताओं का प्रस्ताव करता है:
*कृषि और मृदा
*वन्य संसाधन और पारिस्थितिकी विश्लेषण
*भूविज्ञान
*समुद्री और वातावरणीय विज्ञान
*प्राकृतिक ख़तरे और आपदा जोखिम प्रबंधन
*फोटोग्रामिट्री और रिमोट सेन्सिंग
*शहरी और क्षेत्रीय अध्ययन
*जल संसाधन
अधिकतर जीआईएस पाठ्यक्रमों में डाटाबेस प्रबंधन, परियोजना प्रणालियां, दूर संवेदन प्लेटफार्म, एनोटेशन डाइमेन्शन और प्लॉटिंग, 3डी विजुअलाइजेशन, थेमेटिक मैपिंग, भौगोलिक सूचना प्रणालियां, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम्स और जियोस्पेशियल विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवीनतम रुझान में प्रयुक्त विभिन्न मॉडयूल्स, तकनीकें और प्रौद्योगिकियां शामिल होती हैं. जीआईएस और रिमोट सेन्सिंग के अलावा, कोई भी आपदा प्रबंधन, ग्लोबल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम्स, कार्टोग्राफी (मानचित्र निर्माण), फोटोग्रामिट्री (सर्वेक्षण और मानचित्रीकरण में फोटोग्राफी का प्रयोग करते हुए), वेब मैपिंग और जियोडेसी (पृथ्वी को 3डी में प्रस्तुत करने के लिये गणित का इस्तेमाल) में विशेषज्ञता हासिल कर सकता है.
जीआईएस-संबंधी पाठ्यक्रमों में किसे जाना चाहिये?
जीआईएस का क्षेत्र अब भी अपनी नवजात अवस्था में है और इसकी बहुत मांग है. आपकी इसमें वास्तविक रुचि होनी चाहिये और हररोज नये समाधानों की खोज करने का उत्साह होना चाहिये. स्व-प्रेरणा, सृजनात्मकता और मजबूत मौखिक और सम्प्रेषण कौशल इस क्षेत्र में आपकी सफलता के लिये अनिवार्य हैं. आपके पास व्यापक विश्लेषणात्मक कौशल, समस्या समाधान कौशल और सतत अध्ययन और अपने कौशलों के उन्नयन की इच्छा होनी चाहिये. आप भारत और विदेश में जीआईएस हबों की तलाश करने के लिये मानसिक रूप से भी तैयार होने चाहियें.
भारत में जीआईएस प्रशिक्षण संस्थान
भारत में जीआईएस से संबंधित पाठ्यक्रम संचालित करने वाले कुछेक संस्थान, विश्वविद्यालय और संगठन हैं:-
१. अहमदाबाद
*ब्लेजिंग एरोज प्रा. लिमि. इंजीनियरों और तकनीशियनों को क्यूजीआईएस, आर्कजीआईएस, ओपन जियोसर्वर, ओपनलेयर्स आदि में प्रशिक्षित करता है.
*सीईपीटी विश्वविद्यालय में जियोमेटिक्स और स्पेस एप्लीकेशन्स संकाय इंटरप्राइज में विशेषज्ञता के साथ जियोमेटिक्स में एम.टैक, एम.एससी और पीजी संचालित करता है.
*स्कैनप्वाइंट एजुकेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसईआरआई) 6 माह का प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, 1-वर्षीय पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम और 2 वर्षीय स्नातकोत्तर डिग्री पाठ्यक्रम संचालित किये जाते हैं जो सभी गुजरात विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त हैं.
२. अजमेर
*एमडीएस यूनिवर्सिटी रिमोट सेंसिंग और जियोइन्फारमेटिक्स में एमएससी और पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करता है.
३. इलाहाबाद
*इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग दूर संवेदन और जियो-इन्फारमेटिक्स में एमएससी और पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करता है.
*एमएनआईटी इलाहाबाद जीआईएस और रिमोट सेन्सिंग में पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करता है.
*एमएनएनआईटी इलाहाबाद जीआईएस और रिमोट सेन्सिंग में एम.टैक और पीएचडी पाठ्यक्रम संचालित करता है.
*साम हिगिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसिस, इलाहाबाद कृषि विश्वविद्यालय रिमोट सेन्सिंग और जीआईएस में भी स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करता है.
*भूगोल विभाग, एसएसजे कैम्पस, कुमाऊं विश्वविद्यालय रिमोट सेन्सिंग और जीआईएस में एमएससी संचालित करता है.
4. अनंतपुर
*श्री कृष्णादेवा यूनिवर्सिटी जीआईएस में स्नातकपूर्व और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करते हैं.
5. बेंगलुरू
*अख्यांशा टेक्नोलॉजी लिडार, एरोट्रांगुलेशन, फोटोग्रामिट्री, आर्थोफोटो मोबाइल मैपिंग, थर्ड सिटी मॉडलिंग आदि में पाठ्यक्रम संचालित करता है.
*बंगलौर विश्वविद्यालय जियोइन्फारमेटिक्स में 1 वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा संचालित करता है.
*एजमैप साफ्टवेयर्स (प्रा.) लिमि. विशिष्ट जीआईएस प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के साथ-साथ भर्ती सेवाएं संचालित करता है.
*कर्नाटक राज्य दूर संवेदी अनुप्रयोग केंद्र (केएसआरएसी) विश्वेश्वर्या टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (वीटीयू) से मान्यताप्राप्त जियोइन्फारमेटिक्स में 2 वर्षीय एम.टैक पाठ्यक्रम संचालित करता है.
*शार्पमाइंड इन्फो ट्रेन जीआईएस और दूर संवेदी साफ्टवेयर में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है और इंटर्नशिप के अवसर और प्लेसमेंट सहायता उपलब्ध कराता है.
*सनसाफ्ट टेक्नोलॉजिज इंक जीआईएस और कैड पर व्यापक रेंज के प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है. यह सनसाफ्ट टेक्नोलॉजिज, आस्ट्रेलिया का भारत कार्यालय है.
6. बर्दमान
*बर्दवान यूनिवर्सिटी में डीडीई दूर संवेदन और जीआईएस में दूरस्थ शिक्षण के माध्यम से एमए और एम.एससी कार्यक्रम संचालित करता है.
7. बारिपदा
2              नार्थ ओडि़शा यूनिवर्सिटी रिमोट सेन्सिंग और जीआईएस में एम.एससी कार्यक्रम संचालित करता है.
8. भोपाल
*बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी एप्लाइड जियोलॉजी और जियोइन्फारमेटिक्स में एम.एससी और रिमोटर सेन्सिंग में एम.एससी (टेक) संचालित करता है.
*मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रिमोट सेन्सिंग और जियोइन्फारमेटिक्स में 2 वर्षीय एम-टैक संचालित करता है.
*राष्ट्रीय मानव पुनर्वास और पर्यावरण केंद्र जीआईएस में डिप्लोमा संचालित करता है.
*योजना और वास्तुकला विद्यालय जीआईएस पाठ्यक्रम भी संचालित करता है.
9. भुवनेश्वर
*कैडकैम अकादमी अल्पावधि प्रशिक्षण परियोजनाएं और डिप्लोमा पाठ्यक्रम अपनी जीआईएस ओडि़शा अकादमी के जरिए संचालित करती है. यह जीआईएस और जीपीएस सिस्टम पर लाइव परियोजनाएं भी संचालित करता है.
*उत्कल विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग क्षेत्रीय योजना, कचड़ा प्रबंधन, जलाशय नियोजन, तटीय प्रबंधन, वन्य प्रबंधन आदि में विशेषज्ञता के साथ रिमोट सेन्सिंग और जीआईएस में स्नातकोत्तर डिप्लोमा संचालित करता है.
*आई-स्पेस (इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेशियल प्लानिंग एंड कम्युनिटी ई-सर्विसिज) इंडिया पेशेवरों और इंजीनियरी छात्रों के लिये जीआईएस प्रशिक्षण संचालित करता है.
10. चंडीगढ़
*पंजाब विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग जीआईएस और दूर संवेदन में 2 वर्षीय मास्टर्स संचालित किया जाता है.
*पंजाब विश्वविद्यालय में यूएनआईजीआईएस सेंटर फॉर जियोइन्फारमेटिक्स, यूनिवर्सिटी ऑफ सल्जबर्ग, आस्ट्रिया (यूरोप) के साथ मिलकर दूरस्थ शिक्षण से अंतर्राष्ट्रीय मान्यताप्राप्त कार्यक्रम संचालित
करता है.
11. चेन्नई
*मद्रास विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग जियोइन्फारमेटिक्स में एम.टैक और अनुप्रयुक्त भूगोल, जियोइन्फारमेटिक्स, अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण प्रबंधन में एम.एससी  (नार्थेम्प्टन यूनिवर्सिटी, यूके के साथ), और भौगोलिकीय सूचना विज्ञान एवं सिस्टम्स में ऑनलाइन एम.एससी (सल्जबर्ग यूनिवर्सिटी आस्ट्रिया के साथ) संचालित करता है.
*इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेन्सिंग (आईआरएस), अन्ना यूनिवर्सिटी जियोइन्फारमेटिक्स में बीई संचालित करता है.
*क्यूबे कंसल्टेंसी प्रा. लिमि ओपन सोर्स जीआईएस में रियल टाइम बेसिस पर सघन प्रशिक्षण संचालित करता है.
*स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ जन स्वास्थ्य में अपने मास्टर्स और जैव सांख्यिकी पाठ्यक्रमों में एमएससी के भाग के तौर पर जीआईएस मॉडयूल का अध्ययन कराता है.
*सर्राप्स कंसलटिंग मॉडर्न सर्वेइंग तकनीकों जैसे कि फिडरेंशियल जीपीएस और टोटल स्टेशन जीआईएस, रिमोट सेन्सिंग, यूटिलिटी एवं कैडास्ट्राल मैपिंग, ओपन सोर्स मैपिंग और डाटा टूल्स आदि पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है.
*भारत में जीआईएस पाठ्यक्रम संचालित करने वाले अन्य विश्वविद्यालय और संस्थान हैं:-अन्नामलाई यूनिवर्सिटी, आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट, भरथियार यूनिवर्सिटी, आईआईआरएस, यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज, इंस्टीट्यूट ऑफ एन्वायरमेंट एंड जियो-इन्फारमेटिक्स, इंस्टीट्यूट ऑफ फोटोग्रामिट्री एंड जियोइन्फारमेटिक्स, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान धनबाद, पीएसएनए कालेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन जीआईएस, गांधीग्राम ग्रामीण विश्वविद्यालय, इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइन्फारमेटिक्स एंड टेक्नोलॉजी, असम इंजीनियरिंग कॅालेज, जीवाजी यूनिवर्सिटी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जियोस्पेशियल, सीसीएस हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, गुरु जम्बेश्वर विश्वविद्यालय, सेंटर फॉर एन्वायरमेंट, इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण प्रशिक्षण संस्थान, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सर्वेइंग एंड मैपिंग (सर्वे ऑफ इंडिया), जेएनटी यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान, ओस्मानिया यूनिवर्सिटी, सर्वे प्रशिक्षण संस्थान, मेहुल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रिमोट सेन्सिंग (डीएवीवी), राजीव गांधी यूनिवर्सिटी, बनस्थली यूनिवर्सिटी, आईआईटी रूडक़ी, एनआईटी वारंगल और कई अन्य.
(लेखक नई दिल्ली स्थित कॅरिअर काउंसलर हैं. ई-मेल: rruchishrimalli@gmail.com)
चित्र: गूगल के सौजन्य से