नौकरी फोकस


Volume-37, 9-15 November, 2017

 
पेशेवर विज्ञापनकर्मी के रूप में रोजग़ार के अवसर

डॉ. शीतल कपूर

यह एक भ्रांति है कि सृजनशील प्रकृति के लोग ही विज्ञापन के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं. असल में यह एकदम आधारहीन धारणा है. अच्छे विज्ञापन हमेशा ही दिलचस्प होते हैं और हमारा ध्यान बांधे रखते हैं. वे हमारी अंतर्दृष्टि पर आधारित होते हैं और नीतिगत रूप से निरंतरता लिए हुए होते हैं. विज्ञापन बहुआयामी विधा है. यह व्यक्ति से इतर संचार का एक रूप है और विपणन का शक्तिशाली औजार है. विज्ञापन हमारी आर्थिक प्रणाली का एक घटक है, यह जन संचार के आर्थिक साधनों का स्रोत है, यह एक सामाजिक संस्था है और रोजग़ार व व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है. आज हम अपने आप को चारों ओर से विज्ञापनों से घिरा पाते हैं और उनकी ओर देखने या उन्हें सुनने से बच नहीं सकते. आज के डिजिटल युग में विज्ञापन सर्वव्यापी हो गया है. चाहे हम कोई अखबार पढ़ रहे हों या पत्रिका, या रेडियो सुन रहे हों अथवा टेलीविजन देख रहे हों, या फिर इंटरनेट पर कार्य कर रहे हों, रोजाना हजारों विज्ञापनों से हमारा साबका पड़ता है.
एक अनुसंधान के अनुसार प्रतिदिन 1500 से अधिक विज्ञापनों से हमारा वास्ता पड़ता है. इस तरह यह कहा जा सकता है कि विज्ञापन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है. यह हमारे समाज के सांस्कृतिक और आर्थिक ताने-बाने का भी एक हिस्सा बन गया है.        
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार विज्ञापन का मतलब है: ‘‘आम तौर पर या सार्वजनिक रूप से अवगत कराना, बिक्री को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक रूप से बताना.’’ इस तरह विज्ञापन की शुरूआत इसलिए हुई क्योंकि किसी के पास बेचने को कुछ था और कोई उस खास सामान को खरीदना चाहता था. सामान को बेचने और सौदा पक्का करने के लिए दुकानदार और खरीददार को एक मंच पर लाने का कोई तरीका खोजना जरूरी है. इसके लिए दोनों के बीच किसी तरह का संवाद होना आवश्यक है और इसी संवाद को बढ़ावा देने की प्रक्रिया को विज्ञापन कहा जाता है. तकनीकी प्रगति से व्यापार और वाणिज्य का विस्तार हुआ है. वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करने की तमाम गतिविधियों के लिए विभिन्न संगठनों को विभिन्न गतिविधियों में संलग्न होना पड़ता है. इस प्रक्रिया में विज्ञापन एक जटिल कारोबार बन गया है जिसमें ज्ञान की विभिन्न विधाओं और संस्थागत ढांचे की भागीदारी रहती है. 
विज्ञापन की परिभाषा ऐसी गतिविधि के रूप में की जाती है जिसमें लोगों को किसी वांछित कार्रवाई के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कई तरह के जनसंचार माध्यमों के जरिए पैसा देकर सूचनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाता है.
इस तरह विज्ञापन कोई मुफ्त में किया जाने वाला कार्य नहीं है. इसके लिए समाचार पत्र, पत्रिका या ऑन लाइन पोर्टल में विज्ञापन के लिए जगह खरीदी जाती है या फिर टेलीविजन या रेडियो पर समय लिया जाता है. यानी खरीदी गयी जगह और समय के माध्यम से सूचनाओं को प्रसार किया जाता है. विज्ञापनदाता ग्राहकों की पहचान परिवार के रूप में नहीं करते, बल्कि जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के आधार पर करते हैं. ग्राहकों के विभिन्न वर्गों की पहचान किसी उत्पाद के खास उपयोक्ता के रूप में की जाती है. 
विज्ञापन उद्योग विद्यार्थियों के लिए रोजग़ार के अवसरों का खजाना है. इसमें बीस से अधिक रोजग़ार विकल्प उपलब्ध हैं. किसी विज्ञापन एजेंसी में नियमित रूप से कार्य करने से लेकर विज्ञापनदाता के रूप में कार्य करने, मीडिया संगठन या उससे जुड़ी किसी गतिविधि या फिर फ्रीलांस विज्ञापन के क्षेत्र में रोजग़ार के अनेक विकल्प उपलब्ध हैं. इस क्षेत्र में आने के उत्सुक विद्यार्थियों के लिए रोजग़ार के आकर्षक विकल्पों की भरमार है. इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:   
1. विज्ञापनदाता: सभी प्रमुख विज्ञापनदाता जैसे विनिर्माता, वितरण, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां या सरकारी विज्ञापन विभागों में रोजग़ार के अवसर उपलब्ध हैं. विज्ञापन प्रबंधक, मुख्य कार्यपालक अधिकारी या विपणन निदेशक या प्रभागीय प्रमुख के प्रति उत्तरदायी होता है. विज्ञापन एजेंसियों या मीडिया से संपर्क की जिम्मेदारी विज्ञापन प्रबंधक की ही होती है. वह प्रचार अभियान की योजना बनाने और मीडिया नियोजन में भी हिस्सा लेता है और विज्ञापन एजेंसी के लेखा कार्यपालक को आवश्यक निर्देश देता/देती है. जहां वह विज्ञापन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की खरीद में शामिल रहता है वहीं बिक्री बढ़ाने और विपणन संबंधी गतिविधियों में उसकी भूमिका रहती है. प्रेस के साथ संबंध बनाने और जन संपर्क की जिम्मेदारी भी उसके कंधों पर रहती है. विज्ञापन के बजट की राशि का फैसला भी विज्ञापन प्रबंधक को करना होता है. जिन विद्यार्थियों ने बीबीए, बी.कॉम. की पढ़ाई की है या जिनके पास मार्केटिंग या विज्ञापन में विशेषज्ञता के साथ एमबीए या एम.कॉम. की डिग्री है वे विज्ञापन के क्षेत्र को अपना सकते हैं.
2. विज्ञापन एजेंसियां: विज्ञापन एजेंसी विशेषज्ञों की ऐसी टीम है जिसका गठन मीडिया में ग्राहकों के लिए विज्ञापन अभियान की योजना बनाने, विज्ञापन तैयार करने और अभियान चलाने के लिए किया जाता है. भारत में कई बड़ी विज्ञापन कंपनियां कार्य कर रही हैं जैसे ओगिल्वी एंड माथर्स, जेडब्ल्यूटी हिन्दुस्तान थॉम्प्सन एसोसिएट्स, मुद्रा कम्यूनिकेशन्स, रिडिफ्यूजन, डीवाईएंडआर, मैक कैन एरिक्सन, प्रेसमैन एडवर्टाइजिंग, एफसीबी-उल्का, आरके स्वामी बीबीडीओ, त्रिकाया ग्रे, चित्रा लियो बर्नेट आदि. कुछ विज्ञापन एजेंसियां वैश्विक स्तर पर काम करती हैं और कई देशों में उनका कारोबार फैला हुआ है. विज्ञापन एजेंसी में रोजग़ार के कुछ विकल्प इस प्रकार हैं:
क) विज्ञापन लेखा कार्यपालक: विज्ञापन एजेंसी में विज्ञापन लेखा कार्यपालक रोजग़ार की दृष्टि से महत्वपूर्ण पद है. वह ग्राहक और विज्ञापन एजेंसी के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है जिसे ग्राहक के विपणन या विज्ञापन या बिक्री विभाग से निर्देश प्राप्त होते हैं. वह इन निर्देशों को अपनी एजेंसी के लोगों तक पहुंचाता है. भारतीय विज्ञापन एजेंसियों को आज विश्वव्यापी स्तर पर कार्य करने वाली कंपनियों से काम मिल रहा है.
ख) कॉपीराइटर: कॉपीराइटर या शब्दशिल्पी वे लोग हैं जो विज्ञापन के लिए शब्दों का चयन करते हैं. वे विज्ञापन की कॉपीयानी लिखित विज्ञापन तैयार करते हैं जो किसी नारे के रूप में या मुद्रित विज्ञापन/पर्चे में लिखित विज्ञापन, रेडियो जिंगल में बोले जाने वाले शब्दों या टेलीविजन विज्ञापन की स्क्रिप्ट के रूप में हो सकता है. अगर आप में रचनाशीलता और कल्पनाशीलता है और उत्कृष्ट स्तर की लेखनक्षमता है तो कॉपीराइटर का व्यवसाय आपके लिए बेहतरीन रहेगा. इस तरह कॉपी राइटर अपने लेखन कौशल का उपयोग विज्ञापन के संदेश के प्रचार-प्रसार में करते हैं ताकि लोगों का ध्यान उसकी ओर आकृष्ट हो. सफल विज्ञापन अभियान चलाने के लिए कॉपीराइटर के पास कारोबारी सूझबूझ और विज्ञापन एजेंसी के कामकाज के बारे में अच्छी समझ होना जरूरी है.    
ग) विजुअलाइजर: विजुअलाइजर वह कलाकार है जो कॉपीराइटर के लिखे शब्दों को डिजाइन के जरिए कागज पर उतारता है. ललित कला/वाणिज्यिक कला, ग्राफिक डिजाइनिंग, एनीमेशन में दक्ष विद्यार्थी इस क्षेत्र को व्यवसाय के रूप में अपना सकते हैं.
घ) क्रिएटिव डायरेक्टर: क्रिएटिव डायरेक्टर कॉपीराइटिंग और डिजाइनिंग के कार्य में तालमेल रखता है. वे किसी विज्ञापन एजेंसी के वरिष्ठ पेशेवर कर्मी होते हैं.
ङ) प्रोडक्शन विभाग: यह कार्य प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी, फोटोग्राफी और टाइपोग्राफी जैसे विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी वाले के लिए उपयुक्त है.
च) मीडिया प्लानर: वह विज्ञापन के बजट का आबंटन करता है. विज्ञापन अभियान के लिए उपयुक्त माध्यम का चयन भी उसकी जिम्मेदारी है. वही इस बात का फैसला करता है कि कोई विज्ञापन कितनी बार प्रदर्शित होगा, कहां पर लगेगा और उसका आकार क्या होगा. वह पत्र पत्रिकाओं में विज्ञापन के छपने की तारीखों के बारे में भी फैसला करता है. विज्ञापन के छप जाने के बाद उसे विज्ञापन की मुद्रित प्रतियां प्राप्त होती हैं. मीडिया प्लानर को अपने कार्य में मीडिया रिसर्च से बड़ी मदद मिलती है जिसे वह स्वयं करता है या फिर किसी बाहरी एजेंसी से करवाता है.
छ) मार्केटिंग रिसर्च : बाजार अनुसंधान के आंकड़े रचनात्मक प्रक्रिया में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.     
3. मीडिया : मीडिया के विपणन/विज्ञापन स्थान की बिक्री करने वाले विभागों में कार्य करने के उत्सुक लोगों के लिए रोजग़ार के बहुत से अवसर उपलब्ध हैं.
4. सहायक सेवाएं : इनकी आवश्यकता विज्ञापनों के निर्माण के लिए होती है. स्टूडियो सेवा, फोटोग्राफी सेवा, प्रिंटिंग सेवा, उपहार वस्तु उत्पादक आदि इस श्रेणी में आते हैं.
5. फ्रीलांसर: ये ऐसे लोग हैं जो स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं और अपने काम में महारत रखते हैं. कॉपीराइटर, जिंगल गायक, रेडियो उद्घोषक, कलाकार, विजुअलाइजर्स, टेक्निकल राइटर इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं.
अध्ययन के लिए पाठ्यक्रम और संस्थान:
1. दिल्ली विश्वविद्यालय बीए (विज्ञापन, बिक्री संवर्धन और बिक्री प्रबंधन): इस विषय में बी.ए. स्तर का एक पाठ्यक्रम संचालित करता है. इसमें विद्यार्थी विपणन, विज्ञापन, जनसंपर्क और सेल्स मैनेजमेंट यानी बिक्री प्रबंधन में विशेषज्ञता हासिल करते हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय का कमला नेहरू कालेज इस पाठ्यक्रम को संचालित करने वाला पहला कॉलेज था. अब यह पाठ्यक्रम दिल्ली विश्वविद्यालय के जिन 10 से अधिक कॉलेजों में चल रहा है उनमें से कुछ के नाम हैं: दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट एंड कॉमर्स, लक्ष्मीबाई कॉलेज, जानकी देवी स्मारक कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज, माता सुंदरी कालेज, विवेकानंद कालेज.
2. मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन्स, शेला, अहमदाबाद-380007 (गुजरात) वेब साइट http://www.mica.ac.in: यह संस्थान मुनाफे का ध्यान रखे बगैर काम करने वाली संस्था है जिसके पाठ्यक्रम अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज से स्वीकृत हैं. भारत सरकार के विज्ञान और टेक्नोलॉजी विभाग से भी इन्हें मान्यता मिली हुई है. इसमें 1994 से मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर डिप्लोमा-कम्यूनिकेशन पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है जिसे काफी प्रतिष्ठित माना जाता है. एमबीए डिग्री के समकक्ष मान्यता वाले इस पाठ्यक्रम को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् और भारतीय विश्वविद्यालय संघ से भी मान्यता प्राप्त है. मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ  कम्यूनिकेशन विज्ञापन प्रबंधन और जन संपर्क में स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का ऑनलाइन संचालन करता है. मुद्रा कम्यूनिकेशन्स संस्थान में प्रवेश भारतीय प्रबंधन संस्थानों की संयुक्त दक्षता परीक्षा (कैट) के जरिए किया जाता है. जिसके बाद ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू होता है.
3. भारतीय जनसंचार संस्थान, अरुणा आसफ अली मार्ग, जेएनयू कैम्पस, नई दिल्ली 110067 वेब साइट www.iimc.nic.in
जन संचार के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्रदान करने और अनुसंधान करने वाला देश का अग्रणी संस्थान है. इसकी स्थापना 1965 में यूनेस्को और फोर्ड फाउंडेशन के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संचार विशेषज्ञों के एक दल की सिफारिशों के आधार पर किया गया था. संस्थान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से संबद्ध है. इस संस्थान के विज्ञापन और जन संपर्क स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है. किसी भी विषय के स्नातक जिन्होंने कम से कम 50 प्रतिशत अंकों में स्नातक परीक्षा पास की हो पाठ्यक्रम में प्रवेश के जरिए दाखिला ले सकते हैं.
4. नरसी मोनजी प्रबंध अध्ययन संस्थान, वी.एल. मेहता रोड, विलेपार्ले (पश्चिम), मुंबई-400056 (महाराष्ट्र) वेब साइट: www.nmims.edu इसमें व्यावसायिक प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम (विज्ञापन में विशेषज्ञता के साथ) उपलब्ध है. इसमें भी प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला दिया जाता है.
5. जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ कम्यूनिकेशन, सेंट जेवियर कॉलेज, 5, महापालिका मार्ग, मुंबई: 400001 वेब साइट www.xaviercomm.org स्नातकों के लिए जन संपर्क में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम आयोजित करता है. 
सिम्बिओसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्यूनिकेशन, पुणे (वेब साइट www.simc. edu) जन संचार/संचार प्रबंधन में दो साल का स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम आयोजित
करता है.
इसके अलावा भारतीय विद्या भवन, वाईएमसीए और वाईडब्ल्यूसीए देश भर में अपने कई केन्द्रों के जरिए जन संपर्क और विज्ञापन में पाठ्यक्रमों को संचालन करते हैं. जामिया मिल्लिया इस्लामिया, एमआईसीए, एएएआई जैसे कुछ संगठन विज्ञापन और जन संपर्क में ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी संचालित करते हैं. स्नातक या स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने के बाद इनमें दाखिला लिया जा सकता है.
(लेखिका दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज के वाणिज्य विभाग
में एसोशिएट प्रोफेसर हैं. ई-मेल: sheetal_kpr@hotmail.com इस लेख में व्यक्त विचार लेखिका के अपने
विचार हैं.)
चित्र: गूगल के सौजन्य से