विशेष लेख


Volume-43, 20-26 January, 2017

 
सरकार ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 शुरू किया

श्री हरदीप पुरी, आवास एवं शहरी विकास मंत्री ने बताया है कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में फ़ोकस प्रोसेस एवं आउटपुट आधारित संकेतकों की अपेक्षा परिणाम और स्थिरता संकेतकों में परिवर्तित हो गया है. स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के शुभारंभ की जानकारी देते हुए श्री पुरी ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण शहरी अभिशासन में विशिष्ट हस्तक्षेपों के जरिए चुनौतियों से निपटने की व्यापक क्षमता के साथ बदलाव के एक कारक के तौर पर काम करता है. स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 की शुरूआत के साथ, हम एक ऐसे स्वच्छ भारत की ओर अग्रसर हैं जहां प्रत्येक भारतीय नागरिक ने राष्ट्र में बदलाव लाने
के लिये अपनी-अपनी भूमिका निभाई
है. वे आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय
के कार्यक्रम में बोल रहे थे जिसमें श्री
दुर्गा शंकर मिश्रा, सचिव और श्री वी के जिंदल, एसबीएम-यू के मिशन निदेशक भी मौजूद थे.
स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 का ब्यौरा देते हुए मंत्री महोदय ने बताया कि यह 40 करोड़ से अधिक शहरी जनसंख्या के संबंध में ये सबसे बड़ा सर्वेक्षण है और इसी प्रकार छोटे शहरों में कार्य संचालन के लिये स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में रैंकिंग की दो श्रेणियां होंगी:-
1) 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले 500 शहरों में राष्ट्रीय रैंकिंग होगी.
2) 1 लाख से कम जनसंख्या वाले 3541 शहरों की राज्य और क्षेत्रीय रैंकिंग होगी. सर्वेक्षण में निम्नलिखित 6 व्यापक मानदंडों में प्रगति का जायजा लेने का प्रयास किया जायेगा:-
1. नगरीय ठोस कचड़े का संग्रह और ढुलाई: यह सुनिश्चित करना कि घरों से सूखे और गीले कचड़े को अलग-अलग संग्रह किया जाता है और हमारे सार्वजनिक क्षेत्र स्वच्छ हैं.
2. नगरीय ठोस कचड़े की प्रोसेसिंग और निपटान: शहरों को अपने कचड़े को प्रोसेस करने के लिये प्रोत्साहित करना और जहां कहीं संभव है सूखे कचड़े का पुनर्शोधन करना.
3. स्वच्छता संबंधी प्रगति: यह जांच करना कि क्या शहर नागरिकों के लिये उपलब्ध शौचालय की पहुंच के साथ खुले में शौच से मुक्त है. इस वर्ष यहां तक कि देश के सभी पेट्रोल पंप अपने शौचालयों को सार्वजनिक शौचालयों के तौर पर इस्तेमाल करने देने के लिये आगे आ रहे हैं.
4. आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार): क्या शहरों ने शहरी नागरिकों को कचड़ा प्रबंधन, सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों आदि के रखरखाव में शामिल करते हुए स्वच्छ सर्वेक्षण को प्रोत्साहित करने का अभियान शुरू किया है.
5. क्षमता निर्माण: यह पता लगाना कि क्या यूएलबीज में अधिकारियों को प्रशिक्षण प्राप्त करने और जागरूकता दौरों पर जाने के लिये पर्याप्त अवसर प्रदान किये गये हैं.
6. नवाचार और उत्कृष्ट व्यवहार: इस सर्वेक्षण में इस बात को पहली बार शामिल किया गया है-शहरों को प्रोत्साहित करना और उन्हें स्वच्छ भारत मिशन में अपनाये गये अपने उत्कृष्ट व्यवहारों की जानकारी देना. यह देश को यह जानने में सहायता करेगा कि किस प्रकार हमारे शहरों ने मेक इंडिया क्लीन और अक्तूबर 2019 तक खुले में शौच से मुक्त करने की दिशा में क्या कार्रवाई की है.
पत्र सूचना कार्यालय से साभार