विशेष लेख


Volume-50, 10-16 March, 2018

 

मुद्रा योजना’ : साकार होगा रोजग़ार का सपना

नीरज कुमार मिश्रा

आम बजट 2018—19 में केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में ढांचागत बड़े बदलावों और स्किल डेवलपमेंट पर जोर के बाद अब हम इस अंक में सरकार द्वारा बजट के मध्यम से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से किए गए खास पहल पर बात करेंगे.

केंद्र सरकार ने इस बार बजट में मुद्रा योजनाके लिए 3 लाख करोड़ का प्रावधान किया है, जबकि इस योजना के लिए पिछली बार 2.44 लाख करोड़ का ही प्रावधान था. सरकार ने मुद्रा योजनाके तहत एमएसएमई सेक्टर को और अधिक  बढ़ावा देने के लिए पिछली बार की अपेक्षा 20 फीसदी की दर से कुल 56 हजार करोड़ का  अधिक प्रावधान किया है.  सरकार का मुद्रा योजनाके तहत छोटे उद्योगों के लिए इतनी बड़ी मात्रा में रुपए का प्रावधान किए जाने की भी कई वजह हैं.  दरअसल केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि आज के युवा सिर्फ नौकरियां मांगने वाले नहीं बनें, बल्कि मुद्रा योजनाकी सहायता से स्वयं युवा उद्यमी बनें. सिर्फ इतना ही नहीं आज के युवा उद्यमी  इस लायक बन सकें कि वे नौकरी मांगने नहीं, बल्कि दूसरों को भी रोज़गार देने के लायक बन सकें. इस बार के बजट में केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए भी कई अहम फैसले लिए हैं, जिसमें जहां एक ओर टेक्सटाइल सेक्टर के लिए सरकार ने 6 हजार करोड़ का प्रावधान किया है, वहीं बजट में छोटे और मझौले उद्योगों के लिए भी केंद्र सरकार ने अलग से 3994 करोड़ का प्रावधान किया है. जिससे देश भर में तेजी से छोटे उद्योग पनपें और इससे उद्यमिता को भी बढ़ावा मिले. साथ ही केंद्र सरकार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को भी बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई प्रकार से पहल कर रही है. इन उद्योगों से मिले फीडबैक के आधार पर इस बार के अपने बजट भाषण में भी वित्त मंत्री ने कहा है कि देश में बिजनेस करने में आसानी हो, इसके लिए उन्होंने 370 से भी ज्यादा सुधार करने की बात कही है.    

गौरतलब है कि देश भर में जीएसटी लागू होने के बाद केंद्र सरकार का पहला बजट है, लिहाजा वित्त मंत्री ने इस बार सूक्ष्म, मध्यम और सीमांत उद्योगों को ध्यान में रखते हुए, उन्हें जीएसटी पर बड़ी राहत दी है. केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स में बड़ी राहत का ऐलान किया है. 

एक ओर जहां सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स को लघु और सीमांत उद्योगों के लिए टैक्स 30 प्रतिशत से कम कर 25 प्रतिशत किया है, वहीं 250 करोड़ से कम टर्नओवर वाली कंपनियों को भी अब 25 प्रतिशत ही कॉरपोरेट टैक्स देना होगा. साथ ही 50 करोड़ तक का वार्षिक कारोबार करने वाली छोटी कंपनियों का आयकर घटाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी किया गया है.  सूक्ष्म, मध्यम और सीमांत उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की गई हंै, जिसमें एमएसएमई के लिए ऑनलाइन लोन सैंक्शन फैसिलिटी में सुधार करने का भी ऐलान सरकार ने किया है. साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमियों के लिए सबसे खास बात सरकार की ओर से यह कहा जाना कि जल्द ही  एमएसएमई को फायदा पहुंचाने के उनके लिए बैड लोन्स की समस्या को दूर किया जायेगा. वहीं सरकार ने एमएसएमई को ट्रेड डिस्काउंटिंग सिस्टम से जोडऩे की भी घोषणा की है, साथ ही एमएसएमई सेक्टर में बढ़ रही एनपीए की समस्या के समाधान का भरोसा भी दिया गया है. वहीं कई आर्थिक जानकारों का भी ये मानना है कि कॉरपोरेट टैक्स में कमी से करीब 99 फीसदी एमएसएमई को फायदा मिलेगा.  इनका मानना है कि एमएसएमई को कॉरपोरेट टैक्स में छूट देने से सरकार का रेवेन्यू 7,000 करोड़ रुपये घटेगा. वहीं मुद्रा योजना के लिए 3 लाख करोड़ रुपए की घोषणा पर जानकारों का कहना है कि सूक्ष्म, मध्यम और सीमांत उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल 2.44 लाख करोड़ का ही प्रावधान था और इस बार यह रकम पहले से भी ज्यादा है, जो कि एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए निश्चित रूप से एक बड़ा कदम है.

(लेखक एक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)  लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं.