विशेष लेख


Volume-4, 28 April-4 May, 2018

 

 

नेपाल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा

संतेश कुमार सिंह

नेपाल के प्रधानमंत्री श्री के.पी. ओली ने हाल में 6-9 अप्रैल, 2018 तक भारत की यात्रा की. नेपाल-भारत संबंधों के बारे में प्रमुख व्यक्तियों के नेपाली सदस्यों के समूह के अनुसार, इस यात्रा ने लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय मुद्दों को हल करने में मदद की है. प्रधानमंत्री ओली के अनुसार, उनकी यात्रा का उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच संबंधों को उच्चतम स्तर तक ले जाना था, जो  कि 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुरूप हैं.

वर्तमान नेतृत्व ने नेपाल की विकास प्रक्रिया में भारत की भूमिका का प्रतिवाद करने की कोशिश न करने का सकारात्मक कदम उठाया और प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिये भारत की तरफ कदम बढ़ाने का रास्ता चुना.

प्रधानमंत्री ओली ने अपनी यात्रा के दौरान निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में भारतीय व्यापारिक समुदाय के साथ सघन और सकारात्मक वार्ताएं कीं. उन्होंने नेपाल की व्यापक जलविद्युत क्षमता के दोहन में महत्वपूर्ण निवेश का आह्वान किया. उन्होंने ज़ोर दिया कि भारत और नेपाल दोनों के पास एक दूसरे को देने के लिये बहुत कुछ है, और अंतर-निर्भरता का सिद्धांत समानता और न्याय पर आधारित होना चाहिये. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर बीरगूंज में एकीकृत जांच चौकी का उद्घाटन किया जो कि संपर्क का बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है और दूसरा महत्वपूर्ण कार्यक्रम मोतिहारी-अमलेखगंज सीमा पार पेट्रोलियम उत्पाद पाइपलाइन के उद्घाटन का था.

इस बात को मज़बूती के साथ दोहराया गया कि भारत-नेपाल संबंध समानता, परस्पर विश्वास, सम्मान और लाभ के आधार पर आगे बढ़ेंगे. सबका साथ सबका विकासऔर समृद्ध नेपाल सुखी नेपालीके सिद्धांत दोनों नेताओं के मध्य हुई चर्चा की प्रकृति को दोहराते हुए जारी 12 बिंदु के संयुक्त बयान में भी परिलक्षित हुए, जो उनकी यात्रा के दौरान जारी की गई थी.

यात्रा के दौरान तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये- भारत-नेपाल: कृषि में नई भागीदारी’, ‘रेल संपर्कों का विस्तार’: भारत में रक्सोल और नेपाल में काठमांडू को जोडऩा (यह भारत की वित्तीय सहायता से नई विद्युतीकृत रेल लाइन के साथ रक्सोल और काठमांडू को जोड़ेगी), ‘भारत और नेपाल के बीच अंतर्देशीय जलमार्गों के जरिये नया संपर्क’. इन तीन समझौतों में, भारत और नेपाल के बीच जारी परियोजनाओं को पूरा करने पर ज़ोर रहा. दोनों देशों के नेताओं ने इन परियोजना में हुई प्रगति की प्रशंसा करते हुए इनके तीव्र गति से पूरा करने पर ज़ोर दिया. अंतर्देशीय जलमार्गों पर समझौते के जरिए, नेपाल को समुद्र से अतिरिक्त संपर्क प्राप्त होगा जिससे धरती से घिरे नेपाल का भी जल संपर्क कायम हो जायेगा. कृषि में साझेदारी को सुदृढ़ करने के समझौते में, जैविक खेती, पशुपालन, मृदा परीक्षण, कृषि अनुसंधान और कृषि शिक्षा पर ज़ोर दिया  गया. रेल लाइनों के निर्माण संबंधी समझौते में, यह फै़सला किया गया कि एक वर्ष के बीच तैयारी संभाव्यता अध्ययन किया जायेगा जिसके बाद विस्तृत परियोजना के आधार पर वित्त संबंधी तौर तरीके तय किये जायेंगे. इन समझौतों ने इन लक्ष्यों को वास्तविकता में बदलने के लिये आधार तैयार किया. श्री ओली ने नेपाली प्रेस को बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को द्विपक्षीय विद्युत व्यापार समझौते के मुक्त बाज़ार प्रावधान के शीघ्र कार्यान्वयन को देखने की अपनी इच्छा भी जाहिर की है जो दोनों पक्षों के बीच 2014 में तय हुआ था.

जयनगर से जनकपुर तक और जोगबानी से बिरांतनगर तक रेलवे लाइनों का निर्माण कार्य पहले से ही जारी है और तीन और रेल मार्गों-नामत: न्यू जलपाईगुड़ी-काकरभिट्टा, नौटनवा-भैराहावा और नेपालगंज रोड-नेपालगंज को बनाया जाना है.

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री ओली को उनकी चुनावी विजय के लिये बधाई दी और प्रांतीय तथा केंद्रीय स्तरों पर  लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपना विश्वास जताने के लिये नेपाली जनता की प्रशंसा की. प्रधानमंत्री ओली ने प्रधानमंत्री मोदी को शीघ्रातिशीघ्र नेपाल की यात्रा करने का निमंत्रण भी दिया.

इस यात्रा को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. दोनों नेताओं ने अपने सभ्यतामूलक और धार्मिक संबंधों के निर्माण पर जोर दिया जब कि वे अपने स्वयं के रामायण और बौद्ध सर्किटों के विकास का इरादा रखते हैं. उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया. ऊर्जा बैंकिंग और नई पारेषण लाइनों के मामलों पर भी चर्चा की गई। नेपाल लौटने के बाद एक प्रेस बयान में प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि उन्होंने घटते व्यापार की चिंताजनक स्थिति के बारे में नेपाल की बढ़ती चिंताओं का उल्लेख किया और नेपाल का निर्यात बढ़ाने के उपाय लागू करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया.

इस यात्रा के जरिए भारत और नेपाल ने संपर्क और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों सहित आर्थिक और निवेश साझेदारी बढ़ाने के उपायों का पता लगाने का प्रयास किया. नेपाल के प्रधानमंत्री ने विश्वास बहाली और नेपाल के अपने सभी पड़ौसियों के साथ मिलकर काम करने के संप्रभु निर्णयों का सम्मान करने पर ज़ोर दिया.

यह बात ध्यान में रखनी होगी कि नेपाल लगातार राजनीतिक उथलपुथल से गुजर रहा है. नेपाल के घरेलू और विदेश नीति मामलों से जुड़े प्रमुख मुद्दों में से एक, भारत के साथ उसके संबंध, बना रहेगा.

लेखक पोस्ट डॉक्टरल फैलो, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ, यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, क्वालालम्पुर, मलेशिया से हैं. ई-मेल: shanteshjnu@gmail.com (लेखक के विचार उनके अपने हैं)