विशेष लेख


Volume-7, 19-25 May, 2018


 
टॉपर्स कॉर्नर

‘‘निरंतर अध्ययन और बुनियादी विषयवस्तु से सुसंगत रहना
आईएएस परीक्षा में सफलता की कुंजी है.


रोजग़ार समाचार की ओर से आपको इस विशिष्ट उपलब्धि के लिये हार्दिक बधाई! हमें खुशी है कि आपकी कड़ी मेहनत रंग ले आई है.
श्री गुप्ता: बहुत-बहुत धन्यवाद सर!
रो.स.: उस वक्त कैसा महसूस किया जब आपको पता चला कि आपने न केवल भारत की एक सबसे कठिन परीक्षा में प्रतिस्पर्धा की है बल्कि आपका नाम टॉपर्स की सूची में है? क्या आप अपनी खुशियों के उन पलों को हमारे पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे?
श्री गुप्ता: परिणाम देखने के बाद अपनी भावना को व्यक्त करने के लिये मेरे पास शब्द नहीं थे. यह एक मिलाजुला अहसास था जो कि संपूर्ण कड़ी मेहनत, ऐसे क्षण जब मैंने हल्का महसूस किया और अंतत: उस सीढ़ी पर चढऩा जिसकी मुझे सदैव चाहत थी. लेकिन खुशी के एहसास से अधिक मुझे उस मिथ्या को तोडऩे की संतुष्टि को लेकर महसूस हुई कि सिविल सेवाएं केवल असाधारण लोगों के लिये ही है. मैं एक साधारण पृष्ठभूमि से और हरियाणा में एक पिछड़े जिले सिरसा से हूं परंतु मैंने ये कर दिखाया है जिसके बारे में मुझे विश्वास है कि यह देश के विभिन्न भागों में लाखों युवाओं में आत्मविश्वास जगाने का काम करेगा.
इसके अलावा मैं ये विश्वास करता हूं कि यह बदलाव का समय है जिसका मैं सदैव आकांक्षी रहा हूं. इस सफलता ने मुझे उस कार्य के प्रति अधिक से अधिक जिम्मेदार बना दिया है जो मैंने शुरू किया था और मेरा विश्वास है कि मेरी यात्रा समाप्त नहीं हुई है बल्कि ये तो एक शुरूआत है.
रो.स.: आपकी सफलता का राज क्या है?
श्री गुप्ता: कड़ी मेहनत+बुद्धिमत्ता+$निरंतरता=स्मार्ट कार्य
मेरा मानना है कि हम सभी अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिये कड़ी मेहनत कर रहे हैं, परंतु हम कई बार अपनी कमज़ोरियों को छिपाने की कोशिश करते हैं और इस यात्रा ने मुझे ये सीख दी है, हमें इसे छिपाने की जरूरत नहीं है परंतु इस पर काम करने की जरूरत है. ऐसे क्षण होते हैं जब कोई हल्का महसूस करता है. यहां पर दृढनिश्चयता कुंजी का काम करती है.
रो.स.: आपने इस परीक्षा को कैसे लिया? आपकी सामान्य रणनीति क्या थी (प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार)?
श्री गुप्ता: यद्यपि मैंने इसके लिये एक ब्लॉग लिखा है परंतु मैं यहां पुन: इसका जिक्र करना चाहूंगा. चार पेपर्स होते हैं, विशेषकर सामान्य अध्ययन के लिये, पेपर I, II, III विषयवस्तु को लेकर होते हैं. इसका यह अर्थ नहीं कि किसी को भी केवल विषयवस्तु के लिये भागदौड़ करनी है. उस विषयवस्तु को संसूचित करना भी महत्वपूर्ण होता है. सबसे पहले तैयारियों के दौरान मन में चित्रण कीजिए, जैसा कि मैंने किया था. आइए, एक विषय गऱीबीका उदाहरण लेते हैं: मैंने इसके लिये एक प्रतिष्ठित संगठन जैसे अच्छे स्रोत से गऱीबी पर अच्छी परिभाषा को तैयार किया. इसके बाद मैंने पिछले कुछ वर्षों में गऱीबी पर बनी समितियों की रिपोर्टों को देखा और तदुपरांत महत्वूर्ण तथ्यों और आंकड़ों को देखा. इसके उपरांत मैंने अन्य मुद्दों जैसे कि शिक्षा, महिलाओं, वंचित वर्गों, भूखमरी, कुपोषण आदि से इसके संबंधों पर नजऱ डाली. इस प्रकार मैं यह सुनिश्चित कर सका कि जब भी मैं उत्तर लिखूंगा यह एक स्पष्ट ढांचा है और तार्किक तरीके से संगठित है. यही एक तरीका है जिसके तहत मैंने प्रत्येक विषय की तैयारी की है. दिमाग में नक्शा खींचने की इस रणनीति ने अंतिम समय में दोहराने की प्रक्रिया को भी सरल बना दिया था.
कोई उत्तर लिखने से पहले आपको प्रश्न को दो, तीन या अधिक बार पढऩा चाहिये क्योंकि जैसे ही मैंने कोई प्रश्न को देखा, मैंने दो या अधिक प्रमुख शब्दों की पहचान की और उनके आधार पर उत्तर दिया. इस तरीके से मैं उसका उत्तर वही दे पाया जो कि मैं समझ पाया था न कि परीक्षक के लिये क्या अपेक्षित था. यह एक प्रमुख गलती थी. इस बार, मैंने किसी प्रश्न का उत्तर देने से पहले कई बार प्रश्न को पढऩे का अभ्यास करने का पालन किया और तब मैंने यह पक्का करने के लिये इसका आकलन किया कि मैं सही दिशा में आगे बढ़ रहा हूं. समापन करने से पहले भी मैंने प्रश्न को यह स्पष्ट करने के लिये कि मैं क्या कहना चाहता हूं दोबारा पढ़ा क्योंकि इन दिनों प्रश्न विचार आधारित होते हैं. उनके बारे में स्पष्ट राय दें कि आपके पास जो मुद्दा है उसके बारे में आप क्या महसूस करते हैं.
प्रारंभिक परीक्षा की http://www. insightsonindia.com/2018/05/03/sachin-gupta-rank-3-upsc-cse-2017-insights-offline-student-preparation-strategy-upsc-civil-services-preliminary-examination/
मुख्य परीक्षा की रणनीति: http://www. insightsonindia.com/2018/05/05/sachin-gupta-rank-3-upsc-cse-2017-insights-offline-student-preparation-strategy-upsc-civil-services-preliminary-examination-second-article/
व्यक्तित्व परीक्षण: यहां पर ‘‘स्वयं को जानने‘‘ की कुंजी सदैव बनी रहेगी. मेरा मानना है कि व्यक्तित्व परीक्षण मात्र ज्ञान के बारे में नहीं है बल्कि स्वयं को जानने के बारे में है. उस हरेक कार्य को लेकर जो किसी व्यक्ति ने अपने जीवन में किया है. उसने इसे क्यों किया है. इसके अलावा किसी को भी पर्याप्त जिज्ञासा होती है जो अपने आसपास घटित होने वाली बातों को समझने का प्रयास करता है.
रो.स.: क्या आप अपनी प्रारंभिक अथवा मुख्य परीक्षा की तैयारी को एकीकृत करते हैं अथवा बदलते परिदृश्य में ये अलग-अलग थीं?
श्री गुप्ता: जब मैं तैयारी की बात करता हूं मैं समन्वित और समग्र तरीके से अध्ययन में पूर्ण विश्वास करता हूं.
इससे हमें न केवल मुद्दों की बारीकियों का पता चलता है बल्कि हमारे भीतर विश्वास जगता है. हालांकि मेरा मानना है कि हमें प्रारंभिक, मुख्य और व्यक्तित्व परीक्षण से पहले इनके लिये क्रमश: अध्ययन पर फ़ोकस करने के लिये कुछ विनिर्दिष्ट समय देना चाहिये.
रो.स.: आपने निबंध की तैयारी कैसे की?
श्री गुप्ता: निबंध पेपर के लिये मैंने सभी विषयों पर तैयारी करने का प्रयास किया. इनमें कुछेक मूल दार्शनिक बातों के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला आदि जैसे  प्रमुख विषय थे. इसके लिये मैंने पिछले वर्षों के टॉपर्स के बहुत से निबंध पढ़े जिससे कि यह मालूम हो सके कि वे इस प्रकार लिखते हैं. मैंने कुछ बातें सामान्य रूप से पाईं जैसे कि अच्छा प्रवाह, खास विषय की भिन्न-भिन्न विशेषताएं और एक ठोस निष्कर्ष. परिचय खंड में मैंने कुछ नवाचार के साथ, जैसे कि विषय को हाल के किसी घटनाक्रम से जोडऩे की कोशिश की ताकि निबंध अधिक नवीन और पढऩे में रोचक बन सके. प्रवाह को बरकरार रखने के लिये विभिन्न विषयक्षेत्रों पर प्रकाश डालें और उनकी चर्चा करें तथा कोई उप-शीर्षकों का भी प्रयोग कर सकता है.
रो.स.: तैयारी के दौरान आपने समय का प्रबंधन कैसे किया?
श्री गुप्ता: मेरे विचार में तैयारी की रणनीति में, विशेषकर कार्यरत पेशेवरों के लिये समय प्रबंधन एक प्रमुख क्षेत्र होता है. मैंने 3 माह की योजना तय की जिसमें यह उल्लेख किया कि मैं इस अवधि में रिवीजन के साथ-साथ क्या कुछ अध्ययन पूरा करूंगा. इसके बाद इसे मासिक और दैनिक अनुसूची में बांटा. इससे न केवल किसी की कार्यकुशलता में सुधार होता है बल्कि आंतरिक मन की शांति भी होती है कि 3 महीने बाद इतना कुछ कवर हो जायेगा.
रो.स.: आपने अपनी गति को कैसे बनाए रखा और तैयारी की नीरसता को दूर करने के लिये क्या किया?
श्री गुप्ता: सिविल परीक्षा चक्र में एक वर्ष लग जाता है और इसमें किसी को भी सभी तीन चरणों को पार करना होता है. मेरे मन में कई बार संदेह के क्षण आये जब मैंने महसूस किया कि मैं इसे उत्तीर्ण कर पाने में समर्थ नहीं हूं अथवा सिविल सेवाएं मेरे लिये आसान नहीं हैं. ऐसा भी हुआ कि मैं तैयारी के दौरान, विशेषकर असफलता के क्षणों के पश्चात, हीन भावना से ग्रसित हो गया. परंतु मेरे ऊपर विश्वास कीजिए यह सामान्य बात है और इसे तैयारी के चरण के तौर पर लीजिए. अपने शुभचिंतकों, माता-पिता से बात करें जिससे आपको सकारात्मक मजबूती मिलेगी और यथाशीघ्र पढ़ाई में पुन: जुट जाइये. मैं अपने पिता जी से बात करता रहता था और वे मुझे मेरी छोटी-छोटी उपलब्धियों के बारे में बताते थे जिसने मेरे भीतर पुन: विश्वास जगाने में सहायता की. जब कभी भी मैं दबाव में होता था हमेशा बार-बार ये कहता था सब कुछ ठीक है, सब कुछ ठीक है, मैं सर्वोत्तम हूं. मुझ पर भरोसा कीजिए यह मेरे काम आया, इसने मेरे सिर से दबाव कम करने में मदद की और कुछ राहत प्रदान की.
इसके अलावा मैं राज्यसभा टीवी पर होने वाली चर्चाओं को देखता था और आकाशवाणी को सुनता था. इसने न केवल तैयारी करने में मेरी सहायता की बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को सुनने के उपरांत  मुझे अवगत करने और राय बनाने में सहायता की. मैं ज़ोर देकर सभी उम्मीदवारों से यह कहूंगा कि वे भी ऐसा ही करें.
रो.स.: आने वाले उम्मीदवारों के लिये आपकी सलाह.
श्री गुप्ता: मैं एक साधारण पृष्ठभूमि से आया हूं, मेरे पिता एक किसान हैं और मेरी माता जी सरकारी प्राथमिक स्कूल अध्यापिका हैं. मेरे संपूर्ण जीवन में यद्यपि मैं एक होनहार छात्र रहा हूं परंतु कोई असाधारण छात्र की तरह नहीं था. मैं जब अपनी माता जी के साथ मेरी छुट्टियों के दौरान उनके स्कूल जाता था मैं शिक्षण सुविधाओं में अंतर को देखता था जो कि मेरे और मेरी माता जी के स्कूल में हो रही पढ़ाई में हुआ करता था. उस वक्त मैं एक बच्चा था और सोचता था कि जीवन केवल इसी प्रकार से होता होगा. परंतु कालेज की एक घटना ने मेरे जीवन के संपूर्ण क्षेत्र को ही बदल दिया. तब मैंने जानीमानी हस्तियों महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू के बारे में जानना शुरू कर दिया तथा इसके बाद ई श्रीधरण, ओ पी चौधरी, आम्र्सस्ट्रांग पामे के बारे में जाना, जिनसे मुझे बहुत प्रेरणा मिली.
इसके अलावा मैं इस परीक्षा में निरंतरता के महत्व पर प्रकाश डालना चाहूंगा, विशेषकर जब हम एक ही तरह के नोट्स, पुस्तकों को बार-बार  पढ़ते हैं अथवा हर रोज उत्तर लिखते हैं, उत्साह कम होने लगता है. परंतु  उस वक्त निरंतरता बनाये रखना और बुनियादी बातों से जुड़े रहना महत्वपूर्ण होता है. यह सुनिश्चित करें कि विभिन्न संसाधानों के बीच न उलझें, बुद्धिमानी से संसाधनों का चुनाव करें और उन्हें समेकित करें तथा ‘‘बार-बार उनका अध्ययन करें‘. किसी भी तरीके से उत्तर लिखने को नजऱअंदाज न करें. एक दिन यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि आप परीक्षा में 150-200 शब्द किस तरह लिखते हैं. एक अच्छा परिचय देते हुए प्रत्येक प्रश्न के सभी हिस्सों का उत्तर देना सुनिश्चित करें, पेपर में 7-8 प्रश्नों में प्रवाह चार्ट बनाने का प्रयास करें और स्पष्ट विचार के साथ समापन करें. यह मुख्य परीक्षा की कुंजी है.
मैं श्री हरिवंश राय बच्चन के इन शब्दों के साथ अपनी बात को समाप्त करना चाहूंगा जो मुझे अपनी संपूर्ण यात्रा में प्रेरित करते रहे:-
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है.
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढक़र गिरना, गिरकर चढऩा अखरता है.
आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.