विशेष लेख


Volume-11, 16-22 June, 2018

 
भारत में योग पर्यटन

मोहित मिश्र

हाल के वर्षों में भारत मेडिकल पर्यटन के लिए एक वैश्विक गंतव्य के रूप में उभरा है. अनुमानित 22 प्रतिशत वार्षिक वृद्ध दर के साथ यह एक अत्यंत तेजी से बढ़ता हुआ वेलनेस पर्यटन गंतव्य बन गया है. हालांकि ऐतिहासिक रूप से अपना देश नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, पश्चिमी और मध्य एशियाई देशों जैसे पड़ोसी देशों के लिए क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवा का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. विदेशी पर्यटनों का लेखा-जोखा और विभिन्न प्रलेख जैसे पुरातात्विक साक्ष्य हमें स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले प्राचीन अस्पतालों के बारे में बताते हैं. राजाओं तथा शासकों द्वारा प्रदत्त धन से इन सुविधाओं की स्थापना की गई थी. हमारे देश में पारम्परिक उपचार की विधियां और रोग निवारण तकनीकों में से अधिकांश का विकास आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध तथा होम्योपैथी (आयुष) की औषधियों तथा उपचारों से विकसित हुए हैं. प्राचीन भारत में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यासों तथा अनुशासन के एक समूह के तौर पर योग की शुरूआत हुई है. योग की  उत्पत्ति संस्कृत शब्द योग से हुई है, जिसका अर्थ जुडऩा है. इस प्रकार, योग किसी व्यक्ति की अपनी चेतना तथा व्यापक चेतना के बीच एक मिलन है. योग का अंतिम लक्ष्य आत्मन का अनुभव अथवा आत्मानुभव है. योग एक विज्ञान है जो शरीर, दिमाग और आध्यात्म को जोड़ता है. भक्ति योग, राज योग, ज्ञान योग आदि जैसे विभिन्न तरीके से इसे पूरा किया जा सकता है. हालांकि, वर्तमान समय में योग का सबसे प्रचलित पहलू हठ योग है. सामान्यतया हठ योग का अर्थ वे योग मुद्राएं हैं, जिनके माध्यम से कोई अभ्यासकर्ता अपने शरीर तथा दिमाग को दुरुस्त रखता है. ध्यान इन अभ्यासों का एक आंतरिक हिस्सा है, जिसका लक्ष्य मानसिक स्वास्थ्य पर टिका है. इसे एक ऐसी स्थिति के रूप में बताया जाता है, जिसमें अत्यधिक राहत मिलने के साथ-साथ ध्यान केन्द्रित होता है तथा सामान्य तौर पर शरीर आराम की स्थिति में होता है और दिमाग सतही विचारों से मुक्त होता है. ध्यान के बल पर दिमाग को केन्द्रित करने तथा विचार प्रक्रिया को सकारात्मक बिन्दुओं से जोडऩे में मदद मिलती है. इससे हमारे उप चेतनशील दिमाग में वर्षों से जमा नकारात्मक विचारों तथा कड़वी यादों को दूर भगाने में मदद मिलती है. योग की विभिन्न मुद्राएं शरीर के विभिन्न हिस्से को लक्षित करती हंै. सांस लेने की तकनीक पर विशेष जोर दिया जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि सांस लेना शरीर में जीवन का स्रोत है तथा दिमाग और शरीर, दोनों के स्वास्थ्य तथा क्रियाकलाप में सुधार लाने हेतु इस पर नियंत्रण होना चाहिए.
21 जून को पूरे विश्व में योग को फैलाने में सरकार की अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस जैसी पहलों का महत्वपूर्ण योगदान हुआ है. ऐसे लोग जो चुस्त-दुरुस्त रहना चाहते हैं, उनके लिए योग एक तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी एक थेरेपी बन गया है. योग पर्यटन, पर्यटन उद्योग के एक ऐसे अभिन्न हिस्से के रूप में उभरा है, जिसमें बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित करने के साथ-साथ रोजग़ार सृजन करने की व्यापक संभावना है. पर्यटकों का एक बड़ा हिस्सा भारत को अपने गंतव्य के रूप में चुनता है, क्योंकि हमारा देश नीरवता और आध्यात्मिकता का अहसास कराता है. वे यहां आकर योग तथा स्वस्थ जीवन की दिशा में अन्य पारम्परिक तरीके सीखते हैं. हिमालय की तराइयों में स्थित नीरवता और शांति से लेकर दूरस्थ दक्षिणी हिस्से में हिंद महासागर के किनारे तक फैले योग और पारम्परिक औषधीय केंद्रों में विश्वभर से आने वाले पर्यटकों को स्वास्थ्य लाभ मिलता है और इन स्थानों पर उनके लिए आश्चर्यजनक उपचार के तरीके उपलब्ध होते हैं. पूर्णत: स्वास्थ्य आधारित पर्यटन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्तराखंड  से लेकर तमिलनाडु तक देशभर में अत्यधिक संख्या में वेलनेस रीट्रीट तथा आश्रम तैयार किए गए हैं. पर्यटकों तथा योग में रुचि रखने वालों के लिए सर्वश्रेष्ठ यौगिक सेवाएं उपलब्ध कराने वाले भारत के कुछ आश्रमों तथा रीट्रीटों का विवरण इस प्रकार है:-
मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली- यह एक स्वायत्त संस्थान है, जो देशभर में योग संस्कृति के विकास तथा बढ़ावे के लिए एक शीर्ष एजेंसी के रूप में काम करता है. देश के सभी हिस्से में योग संस्कृति को पुनर्जीवित करना तथा योग दर्शन का प्रसार करना इसका उद्देश्य है. आयुष विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन इस संस्थान का क्रियाकलाप होता है. यह संस्थान यौगिक अध्ययन में अल्पकालिक पाठ्यक्रमों से लेकर पीएच.डी पाठ्यक्रम तक कई पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है. यह ग्रीष्मकालीन योग शिविर आयोजित करता है और दो घंटे का नि:शुल्क योग सत्र दिल्ली के विभिन्न हिस्से में स्थित पार्कों में सुबह तथा शाम में आयोजित किया जाता है. इसकी शुरूआत करने व्यक्ति सप्ताहांत योग कार्यक्रमों के लिए प्रवेश ले सकते हैं. ये पाठ्यक्रम अल्प लागत वाले हैं तथा इनसे योग के अभ्यास तथा दर्शन के क्षेत्र में मूलभूत धरातल उपलब्ध होता है. यहां एक महीने के पाठ्यक्रम भी हैं, जिसमें सामान्यतया प्रत्येक सप्ताह के खुले दिनों में सुबह कक्षाएं आयोजित की जाती हैं. अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए यहां छात्रवृत्तियां भी उपलब्ध हैं.
बिहार स्कूल ऑफ योगा, मुंगेर, बिहार- गृहस्थों के साथ-साथ सन्यासिनों को यौगिक प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से श्री स्वामी सत्यानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1964 में बिहार स्कूल ऑफ योगा की स्थापना की गई थी, वहां विकसित अनेक योग तकनीक, व्यक्तिगत विकास की दिशा में अनेक प्रकार की पहुंचों का सम्मिश्रण है, जो पारम्परिक वेदान्तिक, तांत्रिक और यौगिक शिक्षाओं को समसामयिक शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य विज्ञानों को आपस में जोड़ती है. बिहार योग भारती द्वारा अब ये तकनीक सिखाई जा रही है. स्कूल का गंगा दर्शन परिसर पावन गंगा नदी के तट पर स्थित है, जो शांति, नीरवता और कार्मिक कल्याण का एक स्थान है. इस परिसर में प्रात: 4 बजे दिन की शुरूआत होती है तथा शाम में 8 बजे सत्संगी और कीर्तन के साथ समाप्त होता है. यह स्कूल वर्ष में दो बाद यौगिक अध्ययन में चार माह का पाठ्यक्रम संचालित करता  है अनेक क्षेत्रों में रुचि रखने वाले तथा विभिन्न पृष्ठभूमि वाले छात्रों को प्रवेश मिलता है. यह परिसर गुरुकुल के रहन-सहन और अनुशासन का अनुसरण करता है, जिसमें यौगिक जीवन और आध्यात्म का सहज अनुभव किया जा सकता है. यौगिक शिक्षा के साथ-साथ, सेवा, निस्वार्थ सेवा, समर्पण, करुणा के जीवन और आध्यात्म पर भी जोर दिया जाता है, जिसे साधकों द्वारा आत्मसात किया जाता है. साधकों के लिए पाठ्यक्रम की पूरी अवधि के दौरान आश्रम के भीतर रहना आवश्यक है तथा उन्हें ईमेल, बैंकिंग और शॉपिंग सहित बाहरी सेवाओं तक पहुंच करने की अनुमति नहीं होती है. कोई व्यक्ति स्कूल की वेबसाइट www.biharyoga.net. देखकर जानकारी प्राप्त कर सकता है.
रमामण आयंगर स्मारक योग संस्थान (आरआईएमवाईआई), पुणे महाराष्ट्र : योगाचार्य बी के एस आयंगर द्वारा वर्ष 1975 में यह संस्थान स्थापित किया गया था. यह पुणे, महाराष्ट्र में स्थित है. विश्वभर से छात्र यहां आकर योग का सार ग्रहण करने के साथ-साथ जीवन के मूल्यों को सीखते हैं. संस्थान की अद्वितीय रूपरेखा का अपना महत्व है. इसके तीन तल शरीर, दिमाग और आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसकी
ऊचांई 71 फुट है तथा इसके 8 स्तंभ हैं, जो अष्टांग योग के आठ अंगों यानी यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धरना, ध्यान और समाधि का प्रतिनिधित्व करते हैं. योगाचार्य ने अनुसंधान और अनुभव के बल पर योग की विशेष तकनीक विकसित की, जिसे अब ‘‘आयंगर योग’’ के रूप में जाना जाता है. यह तकनीक एक साधारण मानव को भी योग सूत्र के ज्ञान का अनुभव कर पाने में समर्थ बनाती है. आरआईएमवाईआई में आयंगर योग की कक्षाएं शुरूआती स्तर से लेकर उन्नत तक; महिलाओं, बच्चों और बीमार व्यक्तियों के लिए विशेष कक्षाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाती हैं.
श्री के. पट्टाभि जॉइस अष्टांग योग संस्थान, मैसूर, कर्नाटक : योगाचार्य पट्टाभि जॉइस को 1930 के दशक में अपने गुरू से अष्टांग योग का ज्ञान प्राप्त हुआ, जो योग की एक प्राचीन प्रणाली है. दर्शन और ध्यान जैसे योग के घटकों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए, जॉइस ने शारीरिक क्रियाकलापों और श्वसन के पूर्णत: साधन पर जोर दिया. उनके द्वारा विकसित तरीके से योग की दुनिया में क्रांति आई और इसके परिणामस्वरूप अष्टांग को आयंगर के साथ-साथ अत्यधिक पहचान मिली. यहां एक पाठ्यक्रम उपलब्ध है, जो तीन माह तक सीमित है तथा वापसी के लिए आवेदन करने से पूर्व छह माह का अंतर होना चाहिए. संस्थान की ओर से छात्रों को आवास की सुविधा नहीं दी जाती है तथा वे पास पड़ोस में रहने का प्रबंध करते हैं. विश्वभर से छात्र यहां आकर योग की तकनीक सीखते हैं. सुबह में योगाभ्यास कराया जाता है. कोई व्यक्ति www.kpjayi.org से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकता है.
अंतर्राष्ट्रीय शिवानंद योग वेदांत केंद्र (अखिल भारतीय)- स्वामी विष्णुदेवानंद ने अपने गुरु स्वामी शिवानंद के नाम पर इस संगठन की स्थापना की थी, जो 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरुओं में से एक थे. सबसे पहले शिवानंद योग केंद्र की स्थापना मोंट्रियाल, कनाडा में हुई थी, और अब तो विश्वभर में बहुत से ऐसे केंद्र, संबद्ध केंद्र और आश्रम हैं. इन केंद्रों में कर्म योग (नि:स्वार्थ सेवा) के माध्यम से शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य तथा आध्यात्मिक उत्थान के लिए अनेक योग पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं. ये केंद्र दैनिक जीवन में यौगिक दर्शन लागू करने में साधकों की मदद करते हैं. शिवानंद आश्रम द्वारा उपलब्ध योग अवकाश कार्यक्रम एक बहुत लोकप्रिय पाठ्यक्रम है. एक दिन में योग की दो कक्षाओं के साथ-साथ दो प्रात:कालीन सत्संग कार्यक्रम से प्रत्येक दिन के तनाव से मुक्ति मिलती है. यह सशक्त और सुसंगत अवकाश कार्यक्रम एक व्यस्त आधुनिक जीवन से रोकने का एक आश्चर्यजनक मार्ग है.
कैवल्यधाम आश्रम, लोनावाला, महाराष्ट्र- महाराष्ट्र के लोनावाला में 180 एकड़ भूमि में फैले इस आश्रम में एक अनुसंधान संस्थान, अस्पताल तथा आधिकारिक तौर पर स्वीकृत एक विद्यालय है. यहां यौगिक अध्ययन के क्षेत्र में अनेक लघुकालिक और दीर्घकालिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं. कैवल्यधाम आश्रम में योग पर आधारित 25,000 से भी अधिक कृत्य मौजूद हैं तथा इसे योग पर विश्व का सबसे बड़ा पुस्तकालय माना जाता है. बिहार स्कूल ऑफ योग से  भिन्न इस आश्रम में अपने अतिथियों को उनके ठहराव के दौरान आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने की अनुमति है.  इसकी वेबसाइट www.kdham.com से आवास सुविधा तथा शुल्क संरचना के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है.
अंतर्राष्ट्रीय योग शिक्षा और अनुसंधान केंद्र, पुदुच्चेरी, तमिलनाडु - यह केंद्र यौगिक दर्शन तथा रहन-सहन के सिद्धांतों पर आधारित एक पारम्परिक गुरुकुल आश्रम है. यहां उपलब्ध सभी कार्यक्रम आवासीय हैं तथा कार्यक्रम के दौरान बाहरी दुनिया से किसी प्रकार का सम्पर्क रखने की अनुमति नहीं होती है. प्रकृति से कठिन होने के बावजूद वे आश्रम का पक्का अनुभव दर्शाते हैं. इस आश्रम में प्रात: 4.30 बजे दिन की शुरूआत होती है 9 बजे अपराह्न में समाधि की स्थिति प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ समाप्ति हो जाती है, जो शरीर और दिमाग की सम्पूर्ण शुद्धि है. यह केंद्र योग के लिए एक व्यावहारिक पहुंच उपलब्ध कराता है. यहां तीन-चौथाई से अधिक छात्र विदेशी हैं.
पर्पल वैली, अस्सागांव, गोवा- पर्पल वैली, विदेशी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय एक आरामदायक योग केंद्र है. गोवा के एक सुदूर समुद्रतट पर स्थित इस स्थान पर अष्टांग योग पर आधारित विश्वस्तरीय कार्यशालाएं तथा पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाते हैं. अधिकांश केंद्र दो सप्ताहों के लिए संचालित होते हैं. इसके बावजूद, कोई अतिथि यात्रा हेतु समय कम होने पर एक सप्ताह के लिए इसमें हिस्सा ले सकता है. यहां मुख्यत: अष्टांग योग पर जोर दिया जाता है, जो आसन पर केन्द्रित है. पर्पल वैली में मैसूर के रिवाज से अष्टांग की शिक्षा दी जाती है. मैसूर के रिवाज पर आधारित स्व-आसनों के साथ सुबह की शुरूआत होती है, जबकि दोपहर के बाद दर्शन, यौगिक रहन-सहन, सत्संग तथा प्राणायाम पर आधारित विशेष कक्षाएं आयोजित की जाती हैं. दो अतिथिशालाओं में से एक में आवास सुविधा प्रदान की जाती है, जो लैंड-स्केप उद्यानों से घिरे होने के कारण वन होने का अहसास कराते हैं.
आनंद इन द हिमालयाज़, ऋषिकेश, उत्तराखंड- ऋषिकेश को योग के संदर्भ में विश्व की राजधानी माना जाता है. यहां अनेक आश्रम और स्थल हैं, जहां विश्वस्तरीय यौगिक अनुभव प्रदान कराया जाता है. इन केंद्रों में योग जीवन का एक तरीका होता है. आनंदहिमालय की तलहटी में स्थित महज एक आश्रम ही नहीं है, बल्कि एक ऐसा पुरस्कार विजेता आरामदायक स्पा  केंद्र है, जो 100 एकड़ भूमि वाले महाराजा पैलेस एस्टेट में अवस्थित है. यह साल के पेड़ों से घिरा है तथा आध्यात्मिक नगर ऋषिकेश और गंगा नदी की घाटी के ऊपर स्थित है. यह भारत का एक सर्वश्रेष्ठ आरामदायक आयुर्वेदिक केंद्र है, जो पारम्परिक आयुर्वेद, योग तथा वेदांत को अंतर्राष्ट्रीय वेलनेस अनुभवों, फिटनेस तथा स्वस्थ जैविक  आहार से जोड़ता है, ताकि संतुलन कायम होने के साथ-साथ ऊर्जा सुसंगत हो. अतिथियों के शरीर के शुद्धिकरण तथा राहत के लिए यहां योग गुरुओं द्वारा अभिन्न योग का इस्तेमाल किया जाता है, जो शारीरिक मुद्राओं, श्वसन अभ्यासों तथा ध्यान का मिश्रण है. इसकी वेबसाइट www.anandaspa.com से इसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है.
परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश, उत्तराखंड- परमार्थ निकेतन उन पर्यटकों के लिए एक सही ठहराव है, जो अपने व्यस्त जीवन से एक विराम लेना चाहते हैं. यह आश्रम ऋषिकेश में पावन गंगा नदी के किनारे स्थित है. इसके अतिथियों के लिए यहां आध्यात्मिक अनुभूति के साथ-साथ अरामदायक योग तथा ध्यान साधना कराई जाती है. यह वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का भी स्थल है, जो एक विश्व प्रसिद्ध आयोजन है, जिसमें कई प्रकार की कार्यशालाएं, विचार-विमर्श तथा योग की विभिन्न मुद्राओं में आधारित प्रदर्शों के आयोजन के साथ-साथ योग के सम्पूर्ण विश्व से प्रख्यात नामों द्वारा विचार गोष्ठियां भी आयोजित होती हैं. यहां सप्ताह भर के आधारभूत पाठ्यक्रम से लेकर सघन योग कार्यक्रम तक अनेक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं. एक योग कार्यक्रम में प्रार्थना, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, पारम्परिक हठ योग, वैदिक मंत्रोच्चारण, कर्म योग तथा प्रश्नोत्तर सत्र शामिल है. सूर्यास्त के समय गंगा हवन और आरती के बाद सत्संग के साथ प्रत्येक दिन की समाप्ति होती है. आश्रम की वेबसाइट www.parmarth.org से अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है.
कृष्णामाचार्य योग मंदिरम, चेन्नै, तमिलनाडु- कृष्णामाचार्य योग मंदिरम, दक्षिण चेन्नै में स्थित है, जो पिछले वर्षों में योग को एक सम्पूर्ण विज्ञान के रूप में प्रचारित करने में अपनी भूमिका निभा रहा है, जो शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महज अभ्यास की तुलना में सैद्धांतिक आधार पर सुव्यवस्थित है. यह संगठन विनियोगनामक एक पहुंच पर काम करता है, जो प्रत्येक छात्र के लिए  एक व्यवस्थित कार्यक्रम तैयार करने हेतु योग का इस्तेमाल करता है. यहां समस्या की जड़ तक पहुंचने, उनसे मुक्त करने तथा किसी के लिए एक अंतर्निहित यात्रा में उपचार हेतु कार्यक्रम तैयार किए जाते हैं. इस संस्थान में सभी क्रियाकलापों का केंद्रबिंदु यह है कि कोई व्यक्ति, जो इच्छुक है, वह ऐसा योगाभ्यास कर सकता है, जो उसकी जरूरतों के लिए विशेष तौर पर उपयुक्त हो तथा उनसे बहुविध लाभ का अनुभव करता हो. योग थेरेपी इस संस्थान का केंद्र बिंदु है, क्योंकि इसका मानना है कि योगाभ्यास और इसके अनेक औजारों का इस्तेमाल, निश्चित तौर पर व्यक्ति की बदलती जरूरतों के लिए उपयुक्त पाए जाने पर होना चाहिए. यहां प्रतिमाह सेवा पाने के इच्छुक तीन सौ से अधिक व्यक्ति परामर्श के लिए आते हैं तथा एक हजार से अधिक व्यक्ति को एक-एक योग थेरेपी दी जाती है. इसकी वेबसाइट www.kym.org से अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है.
(लेखक एक वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं.)