विशेष लेख


Volume-13, 30 June- 6 July, 2018

 
चौथे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर देहरादून में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री का संबोधन


मंच पर उपस्थित सभी वरिष्ठ महानुभाव और इस विशाल, सुंदर मैदान में उपस्थित मेरे सभी साथियों, मैं देवभूमि उत्तराखंड की इस पावन धरती से दुनियाभर के योग प्रेमियों को चौथे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देता हूं.
मां गंगा की इस भूमि पर, जहां चारधाम स्थित हैं, जहां आदि शंकराचार्य आए, जहां स्वामी विवेकानंद कई बार आए, वहां योग दिवस पर हम सभी का इस तरह एकत्रित होना, किसी सौभाग्य से कम नहीं.
उत्तराखंड तो वैसे भी अनेक दशकों से योग का मुख्य केंद्र रहा है. यहां के ये पर्वत स्वत: ही योग और आयुर्वेद के लिए प्रेरित करते हैं.
सामान्य से सामान्य नागरिक भी जब इस धरती पर आता है, तो उसे एक अलग तरह की, एक दिव्य अनुभूति होती है. इस पावन धरा में अद्भुत स्फूर्ति है, स्पंदन है, सम्मोहन है.
साथियों,
ये हम सभी भारतीयों के लिए गौरव की बात है कि आज जहां-जहां उगते सूर्य के साथ जैसे-जैसे सूरज अपनी यात्रा करेगा,  सूरज की किरण पहुंच रही है, प्रकाश का विस्तार हो रहा है, वहां - वहां लोग योग से सूर्य का स्वागत कर रहे हैं.
देहरादून से लेकर डबलिन तक, शंघाई से लेकर शिकागो तक, जकार्ता से लेकर जोहानिसबर्ग तक, योग ही योग, योग ही योग है.
हिमालय के हजारों फीट ऊंचे पर्वत हों या फिर धूप से तपता रेगिस्तान, योग हर परिस्थिति में, हर जीवन को समृद्ध कर रहा है.
जब तोडऩे वाली ताकतें हावी होती है तो बिखराव आता है.  व्यक्तियों के बीच समाज के बीच  देशों के बीच बिखराव आता है. समाज में दीवारें खड़ी होती है, परिवार में कलह बढ़ता है और यहां तक कि व्यक्ति अंदर से टूटता है और जीवन में तनाव बढ़ता जाता है.
इस बिखराव के बीच योग जोड़ता है. जोडऩे का काम करता है.
आज की आपाधापी और तेज़ भागती जि़ंदगी में योग मन, शरीर और बुद्धि आत्मा को जोडक़र व्यक्ति के जीवन में शांति लाता है.
व्यक्ति को परिवार से जोडक़र परिवार में ख़ुशहाली लाता है.
परिवारों को समाज के प्रति संवेदनशील बना कर समाज में सद्भावना लाता है.
समाज राष्ट्र की एकता के सूत्र बनते हैं
और ऐसे राष्ट्र विश्व में शांति और सौहार्द लाते हैं. मानवता, बंधुभाव से पल्लवित और पोषित होती है.
यानी योग व्यक्ति-परिवार-समाज-देश-विश्व और सम्पूर्ण मानवता को जोड़ता है.
जब यूनाइटेड नेशन्स में योग के लिए प्रस्ताव रखा और ये यूनाइटेड नेशन्स का रिकॉर्ड है, ये पहला ऐसा प्रस्ताव था जिसको दुनिया के सर्वाधिक देशों ने कॉस्पान्सर किया. ये पहला ऐसा प्रस्ताव था जो यूएन के इतिहास में सबसे कम समय में स्वीकृत हुआ और ये योग आज विश्व का हर नागरिक, विश्व का हर देश योग को अपना मानने लगा है और अब हिन्दुस्तान के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है कि हम उस महान विरासत के धनी हंै, हम उन महान परम्परा की विरासत को संजोय हुए हैं.
अगर हम अपनी विरासत पर गर्व करना शुरू करें जो कालबाह्यी है उसे छोड़ दें और वो टिकता भी नहीं है. लेकिन जो समय के अनुकूल है, जो भविष्य के निर्माण में उपकारक है ऐसी हमारी महान विरासत को अगर हम गर्व करेंगे तो दुनिया गर्व करने में कभी भी हिचकिचाहट नहीं अनुभव करेंगे. लेकिन अगर हमें, हमारी शक्ति, सामथ्र्य के प्रति भरोसा नहीं होगा, तो कोई स्वीकार नहीं करेगा. अगर परिवार में परिवार ही बच्चे को हमेशा नकारता रहे और अपेक्षा कि मोहल्ले  वाले बच्चे को सम्मान करे, तो वह संभव नहीं है. जब मां, बाप, परिवार, भाई, बहन बच्चे को जैसा भी हो स्वीकार करते हैं तब जा करके मोहल्ले के लोग भी स्वीकार करना शुरू कर देते हंै.
आज योग ने सिद्ध कर दिया है कि जैसे हिन्दुस्तान ने फिर से एक बार योग के सामथ्र्य  के साथ अपने साथ जोड़ दिया दुनिया अपने आप जुडऩे लग गई.
योग आज दुनिया की सबसे शक्तिशाली एकजुटता ताकतों में से एक बन गया है.
मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यदि आज पूरी दुनिया में योग करने वालों के आंकड़े जुटाए जाएं तो अद्भुत तथ्य विश्व के सामने आएंगे.
अलग-अलग देशों में, पार्कों में, खुले मैदानों में, सडक़ों के किनारे, दफ्तरों में, घरों में, अस्पतालों में, स्कूलों में, कॉलेजों में, ऐतिहासिक विरासतों के सानिध्य में, योग के लिए जुटते सामान्य लोग, आप जैसे लोग, विश्व बंधुत्व के भाव और वैश्विक मैत्री  को और ऊर्जा दे रहे हैं.
मित्रो, दुनिया ने योग को गले लगाया है और इसकी झलक इस बात से परिलक्षित होती है कि जिस तरह हर साल अंतर्राष्ट्रीय  योग दिवस मनाया जाता है.
दरअसल, योग दिवस अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की तलाश में सबसे बड़ा जन आंदोलन बन गया है.
मित्रो, टोक्यो से टोरंटो, स्टॉकहोम से साओ पाउलो तक योग लाखों जिंदगियों में एक सकारात्मक प्रभाव लेकर आया है.
योग सुंदर है क्योंकि यह प्राचीन परंतु आधुनिक है.........यह स्थिर है परंतु अभी विकसित हो रहा है. यह हमारे अतीत का उपहार है और भविष्य की आशा की किरण है. हम जिन समस्याओं का समाज में अथवा व्यक्तिगत तौर पर सामना करते हैं योग में उसका सटीक समाधान है. हमारी एक दुनिया है जो कभी सोती नहीं है. हर समय दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कुछ न कुछ घटित हो रहा होता है. तेज़ी से पनप रहे अस्तित्व  के साथ बहुत-सा तनाव भी है. मुझे जानकर हैरानी हुई कि दुनिया भर में हर साल लगभग 18 मिलियन लोगों की दिल से संबंधित बीमारियों के कारण मौत हो जाती है. करीब 1.6 मिलियन लोग मधुमेह से हार जाते हैं. योग शांति, सृजनात्मकता और संतुष्ट जीवन का मार्ग है. यह तनाव से मुक्ति और दिमागी शांति का मार्ग दिखा सकता है. योग बांटने की अपेक्षा सदैव जोड़ता है.
योग वैमनस्य को बढ़ाने की अपेक्षा आत्मसात करता है.
योग पीड़ा बढ़ाने की अपेक्षा, घाव को भरता है.
योग अभ्यास में शांति, खुशी और भाईचारे को बढ़ाने की ताक़त है.
अधिक से अधिक लोगों द्वारा योग का अभ्यास करने का अर्थ है कि दुनिया को शिक्षित करने के लिये अधिक लोगों की आवश्यकता है. पिछले तीन वर्षों में बहुत से व्यक्ति योग की शिक्षा दे रहे हैं, नये संस्थान स्थापित किये जा रहे हैं और यहां तक कि प्रौद्योगिकी लोगों को योग से जोड़ रही है. मेरी आप सब से अपील है कि आने वाले समय में इस गति को बनाए रखें.
मैं आशा करता हूं कि यह योग दिवस योग से हमारे जुड़ाव को गहरा करने का एक अवसर बने और हमारे आसपास के लोगों को इसके अभ्यास करने की प्रेरणा मिले. यह इस दिवस का स्थायी प्रभाव हो सकता है. 
साथियों, योग ने दुनिया को बीमारी से स्वस्थता का रास्ता दिखाया है.
यही वजह है कि दुनिया भर में योग की स्वीकार्यता इतनी तेजी से बढ़ रही है.
कॉवेन्ट्री यूनिवर्सिटी और रैडबाउड यूनिवर्सिटी के अध्ययन में भी सामने आया है कि योग सिर्फ शरीर को आराम ही नहीं देता बल्कि ये हमारे डीएनए में होने वाले उन आणविक प्रतिक्रियाओं को भी उलट सकता है जो हमें बीमार करते हैं और डिप्रेशन को जन्म देते हैं.
यदि हम आसन और प्राणायाम का नियमित अभ्यास करते हैं तो हम अच्छे स्वास्थ्य के साथ-साथ अनेक रोगों से अपना बचाव भी कर सकते हैं. नियमित योग का सीधा प्रभाव किसी भी परिवार के मेडिकल खर्चों पर पड़ता है.
राष्ट्र निर्माण की हर प्रक्रिया से, हर गतिविधि से जुडऩे के लिए हम सभी का स्वस्थ रहना आवश्यक है और निश्चित तौर पर इसमें योग की भी बड़ी भूमिका है.
इसलिए आज के दिन मेरा आग्रह है कि जो लोग योग के साथ जुड़े हैं, वो नियमितता लाएं और जो अब भी योग से नहीं जुड़ पाएं हैं, वो एक बार प्रयास जरूर करें.
साथियों, योग के बढ़ते प्रसार ने विश्व को भारत के और भारत को विश्व के ज्यादा निकट ला दिया है. हम सभी के निरंतर प्रयासों से आज योग को दुनिया में जो स्थान मिला है, वो समय के साथ और मजबूत होगा.
स्वस्थ और खुशहाल मानवता के लिए, योग के बारे में समझ को और अधिक विकसित बनाना हमारी जिम्मेदारी है. आइए, अपनी इस जिम्मेदारी को समझते हुए अपने प्रयास तेज करें.
एक बार फिर मैं इस देवभूमि से दुनिया भर के योग प्रेमियों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं.
इस महान कार्यक्रम के आयोजन के लिये मैं उत्तराखंड की सरकार का भी बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं.
बहुत-बहुत धन्यवाद.
पत्र सूचना कार्यालय से साभार