विशेष लेख


Volume-17, 28 July- 3 August, 2018

 

वन धन योजना

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय मामले मंत्रालय और ट्राईफैड की वन धन योजना का शुभारंभ 14 अप्रैल, 2018 को बीजापुर, छत्तीसगढ़ में आम्बेडकर जयंती समारोहों के दौरान किया था. जनजातीय लोगों की आमदनी बढ़ाने में मूल्यवद्र्धन की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा था कि वन धन, जन धन और गोबरधन योजनाओं में जनजातीय-ग्रामीण आर्थिक व्यवस्था में बदलाव की क्षमता है. इस उद्देश्य के लिये इन सभी तीनों योजनाओं को राज्य सरकारों द्वारा मिलकर प्रोत्साहित किया जाना चाहिये. ‘‘वन धन विकास केंद्र’’ की स्थापना कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण प्रशिक्षण उपलब्ध कराना और प्राथमिक प्रोसेसिंग तथा मूल्यवद्र्धन सुविधा की स्थापना करना है.

पहला आदर्श वन धन विकास केंद्र बीजापुर में प्राथमिक स्तर की प्रोसेसिंग और अवसंरचना तथा केंद्र की स्थापना हेतु बिल्डिंग और उपकरणों तथा औज़ार उपलब्ध करवाने के लिये 43.38 करोड़ रु. के कुल परिव्यय के साथ 300 प्रशिक्षण लाभार्थियों के लिये कार्यान्वित किया जा रहा है. इस केंद्र की शुरूआत के साथ ही इसमें टेमरिंड ईंट निर्माण, महुआ फूल भण्डारण और चिरौंजी की साफ-सफाई तथा पैकेजिंग की सुविधा होगी. वन धन के अधीन 30 जनजातीय संग्रहकर्ताओं के 10 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जाता है. इसके बाद उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है और उन उत्पादों में मूल्यवद्र्धन के लिये कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जाती है, जो वे जंगल से इकट्ठा करते हैं. संग्रहकर्ता के अधीन कार्य करते हुए ये समूह अपने उत्पादों को न केवल राज्यों के भीतर बल्कि राज्यों के बाहर भी बेच सकते हैं. प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता ट्राईफैड प्रदान करता है. देश में इस तरह के 30,000 केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव है. इस दृष्टिकोण में जनजातियों को आकर्षक मूल्य सुनिश्चित करने में मूल्यवद्र्धन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. योजना के अधीन जनजातीय लोगों की आमदनी बढ़ाने के लिये तीन चरण का मूल्यवद्र्धन महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा. कार्यान्वयन एजेंसियों से संबद्ध स्वयं सहायता समूहों के जरिए ज़मीनी स्तर पर उत्पादों की खऱीद किये जाने का प्रस्ताव किया गया है. आजीविकाजैसे मौजूदा स्वयं सहायता समूहों की सेवाओं के इस्तेमाल के लिये अन्य सरकारी विभागों/योजनाओं के साथ कन्वर्जेंस और नेटवर्किंग की जायेगी. इन स्वयं सहायता समूहों को स्थाई खेती/संग्रह, प्राथमिक प्रोसेसिंग और मूल्यवद्र्धन पर उपयुक्त प्रशिक्षण दिया जायेगा तथा उनके स्टॉक को व्यापार योग्य मात्रा में जमा करने और उन्हें वन धन विकास केंद्र में प्राथमिक प्रोसेसिंग की सुविधा से जोडऩे के लिये कलस्टरों का निर्माण किया जायेगा. प्राथमिक प्रोसेसिंग के बाद स्टॉक इन स्वयं सहायता समूहों द्वारा राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों को सप्लाई किया जायेगा अथवा कार्पोरेट सेकेंडरी प्रोसेसर को आपूर्ति हेतु सीधा समझौता किया जायेगा. जिला स्तर पर सेकेंडरी स्तरीय मूल्यवद्र्धन सुविधा और राज्य स्तर पर प्रदेश स्तरीय मूल्यवद्र्धन के निर्माण के लिये पीपीपी मॉडल के अधीन बड़े कार्पोरेट घरानों को शामिल किया जायेगा. यह पीपीपी मॉडल उत्पाद की प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के संचालन में निजी उद्यमिता कौशलों के इस्तेमाल तथा प्रणालीगत वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मूल्यवद्र्धन संचालित करने के लिये अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने तथा अवसंरचना के सृजन के वास्ते केंद्रीय/ राज्य सरकार का सहयोग प्राप्त करने पर आधारित होगा. ये निजी उद्यमियों द्वारा प्रबंधित अत्याधुनिक बड़ी मूल्यवद्र्धन हब होंगी. वन धन विकास केंद्र एमएफपीज के संग्रह में संलग्न जनजातियों की उनकी प्राकृतिक संसाधानों के अधिकतम उपयोग में मदद करके और एमएफपी-धनी जि़लों में सतत् एमएफपी-आधारित आजीविका उपलब्ध करवाते हुए जनजातियों के आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होंगे.

पत्र सूचना कार्यालय