विशेष लेख


Volume-8

ग्रामीण विकास में रोज़गार के अवसर

डॉ. पी. बालामुरुगन

भारत मुख्य रूप से गांवों का देश है, जिसकी विस्तृत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है. 2011 की जनगणना के अनुसार 68.85 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे थे. इस बात की परम आवश्यकता है कि गरीबी रेखा से नीचे रह रही ग्रामीण आबादी की आजीविका सुरक्षा बढ़ाई जाए और उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर लाया जाए. ऐसे मुद्दों के समाधान के लिए ग्रामीण विकास की अवधारणा का विभिन्न आयामों के साथ विभिन्न चरणों में विकास हुआ है. रॉबर्ट चेम्बर्स के अनुसार ग्रामीण विकास ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के समूहों का विकास है. इनमें अत्यंत निर्धन और कमजोर, सामाजिक दृष्टि से उपेक्षित वर्ग, महिलाएं और वृद्धजन शामिल हैं. ग्रामीण विकास के अंतर्गत लोगों के विभिन्न वर्गों का विकास और ग्रामीण क्षेत्र का विकास शामिल है.
ग्रामीण विकास का स्वरूप अंतर-विषयी है, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वास्थ्य, सामाजिक कार्य, आर्थिक विकास, मानव संसाधन विकास, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, भागीदारीपूर्ण प्रौद्योगिकी, जनसांख्यिकी, सांख्यिकी, वित्त, ग्रामीण उद्योग और ऐसे ही अन्य विषय शामिल हैं. ग्रामीण विकास एक महत्वपूर्ण विषय है, इसे सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों रूपों में देखा जा सकता है. इसका अर्थ है, ग्रामीण क्षेत्रों से बाहर स्थित सार्वजनिक एजेंसियों जैसे राष्ट्रीय सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा योजनाबद्ध परिवर्तन. इसमें ग्रामीण क्षेत्र को एक सक्रिय अवस्था में लाना और देश के गांवों को गतिविधियों के संदर्भ में कुछ श्रेष्ठ बनाना भी समाहित है. विश्व बैंक के अनुसार ग्रामीण विकास का स्पष्ट खाका तैयार किया जाना चाहिए, ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके. विश्व बैंक यह मानता है कि परिष्कृत खाद्य आपूर्ति और पोषण के साथ स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाएं प्रदान करने से न केवल ग्रामीण निर्धनों की भौतिक खुशहाली और जीवन की गुणवत्ता में प्रत्यक्ष सुधार आएगा, बल्कि परोक्ष रूप से इससे उनकी उत्पादकता भी बढ़ेगी. इससे स्वयं का उत्थान करने की ग्रामीण आबादी की योग्यता बढ़ेगी और समाज के निचले तबके के सशक्तिकरण से राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनका योगदान प्राप्त किया जा सकेगा. ग्रामीण विकास ग्रामीण समाज का आधुनिकीकरण सुनिश्चित करता है. इसके जरिए ग्रामीण समाज को परंपरागत एकांगी पड़े रहने की बजाए, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ा जा सकता है. इसका संबंध शहरी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ है. ऐसा करना अनिवार्य है ताकि विदेशी मुद्रा अर्जित की जा सके और सार्वजनिक एवं निजी खपत तथा निवेश के लिए राजस्व आकर्षित किया जा सके. उत्पादन वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए, ग्रामीण विकास निवेश और ग्रामीण लोगों के लिए कल्याण सेवाओं का एक पैकेज प्रस्तावित करता है. ऐसी जानकारी और कल्याण सेवाओं में अन्य बातों के अलावा भौतिक निवेश (जैसे फीडर सडक़ों, जल और विद्युतीकरण के प्रावधान), सामाजिक निवेश (जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं) और संस्थागत निवेश (जैसे ऋण सुविधाएं, कृषि अनुसंधान सुविधाएं, ग्रामीण विस्तार सेवाएं) शामिल हैं.
  
शैक्षिक पाठ्यक्रम: एमआरएस (मास्टर ऑफ  रूरल स्टडीज) (स्नातकों के लिए दो वर्षीय पाठ्यक्रम), एमआरएस (+2/एचएससी उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए ग्रामीण अध्ययन में 5 वर्षीय एकीकृत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम) एमफिल (ग्रामीण अध्ययन-1 वर्षीय) पीएच. डी. (ग्रामीण अध्ययन)
शैक्षिक संस्थान: अन्ना मलै यूनिवर्सिटी, अन्नामलै नगर, तमिलनाडु
शैक्षिक पाठ्यक्रम: एमए (ग्रामीण विकास) 2 वर्षीय पाठ्यक्रम (दूरस्थ शिक्षा के जरिए)नई दिल्ली
शैक्षिक संस्थान: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, (इग्नू), नई दिल्ली
शैक्षिक पाठ्यक्रम: एमए ग्रामीण विकास एफफिल और पीएच. डी(ग्रामीण विकास) एमबीए (ग्रामीण परियोजना प्रबंधन)
शैक्षिक संस्थान: गांधी ग्राम ग्रामीण विश्वविद्यालय, गांधीग्राम,डिंडिगुल, जिला, तमिलनाडु
शैक्षिक पाठ्यक्रम: एमए, एमफिल और पीएच.डी (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक संस्थान: एमए, एमफिल और पीएच.डी (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय, नागार्जुन नगर, आंध्र प्रदेश
शैक्षिक संस्थान: एमए, एमफिल और पीएच.डी (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: अलगप्पा विश्वविद्यालय, कराईकुडी, तमिलनाडु
शैक्षिक संस्थान: एमए, एमफिल और पीएच.डी (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: बैंगलौर विश्वविद्यालय, तिरुचिरापल्ली
शैक्षिक संस्थान: ग्रामीण विकास में पीएच.डी पाठ्यक्रम
शैक्षिक पाठ्यक्रम: आईआईटी दिल्ली, आईआईटी खडग़पुर, आईआईटी मुम्बई
शैक्षिक संस्थान: ग्रामीण विकास प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा
शैक्षिक पाठ्यक्रम: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डिवेलपमेंट एंड पंचायती राज, हैदराबाद
शैक्षिक संस्थान: ग्रामीण विकास प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा
शैक्षिक पाठ्यक्रम: इंस्टीट्यूट आफ  रूरल मैनेजमेंट, आणंद, गुजरात
शैक्षिक संस्थान: पीजी प्रोग्राम/एमबीए (ग्रामीण प्रबंधन)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ  रूरल मैनेजमेंट, जयपुर
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: आंध्र यूनिवर्सिटी, विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश
शैक्षिक संस्थान: एमए एमफिल और पीएच.डी (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: डॉ. बीआर आम्बेडकर यूनिवर्सिटी, श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास) ग्रामीण विकास में प्रमाणपत्र एमआरएस (मास्टर आफ  रूरल स्टडीज)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: हेमचन्द्राचार्य, उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय, पाटण, गुजरात
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास) (ग्रामीण विकास प्रबंधन)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, सतना, मध्य प्रदेश
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, विद्यापीठ रोड, वाराणसी, (उत्तर प्रदेश
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी, पटना (बिहार)
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: पटना यूनिवर्सिटी पटना (बिहार)
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: रांची विश्वविद्यालय, शहीद चौक, रांची (झारखंड)
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, सरस्वती विहार,       जयपुर
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: सोलापुर विश्वविद्यालय, सोलापुर, (महाराष्ट्र)
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: श्री वेंकेटेश्वर विश्वविद्यालय, सागर (मध्य प्रदेश)
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: कल्याणी, नादिया, (पश्चिम बंगाल)
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, (उत्तर प्रदेश)
शैक्षिक संस्थान: एमए (ग्रामीण विकास) एमबीए (ग्रामीण विकास प्रबंधन)
शैक्षिक पाठ्यक्रम: विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, (मध्य प्रदेश)
शैक्षिक संस्थान: बी.एससी और एम.एससी (ग्रामीण विकास विज्ञान)    
शैक्षिक पाठ्यक्रम: पीएमटी कॉलेज, यूजीलामपट्टी, मदुरै जिला, (तमिलनाडु)
शैक्षिक संस्थान: बी.एससी, एम.एससी, एम.फिल और पीएच.डी(ग्रामीण विकास विज्ञान)   
शैक्षिक पाठ्यक्रम: अरूल आनंदर कॉलेज, करूमातुर, मदुरै, (तमिलनाडु)
ग्रामीण विकास के अंतर्गत लोगों की आर्थिक बेहतरी और अधिक सामाजिक रूपांतरण भी शामिल है. ग्रामीण विकास प्रक्रियाओं में लोगों की अधिक भागीदारी, आयोजना का विकेंद्रीकरण, भूमि सुधारों का बेहतर प्रवर्तन और ऋण एवं निवेश तक पहुंच बढ़ाना, ये सब ऐसे उपाय हैं, जो ग्रामीण लोगों को आर्थिक विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध करा सकते हैं. स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, ऊर्जा आपूर्ति, स्वच्छता और आवास जैसी सुविधाओं के साथ धारणात्मक परिवर्तन भी उनके सामाजिक विकास में सहायक है.
ग्रामीण विकास में शैक्षिक पाठ्यक्रम
भारत में विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और कुछ महत्वपूर्ण कॉलेजों द्वारा अनेक शैक्षिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं. इनमें ग्रामीण विकास/ग्रामीण अध्ययन/ग्रामीण प्रबंधन  जैसे विषयों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशानुसार डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर, एम फिल और पीएच डी पाठ्यक्रम शामिल हैं.
भारत में निम्नांकित शैक्षिक पाठ्यक्रम विविध शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं.
ग्रामीण विकास व्यवसायियों के लिए रोजगार के अवसर
ग्रामीण विकास व्यवसायियों के लिए रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं. शैक्षिक पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले व्यक्तियों के लिए निम्नांकित संस्थाओं में रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं.
विभाग/संस्थान/विश्वविद्यालय
*विश्वविद्यालय, कॉलेजों जैसे शैक्षिक संस्थान - जहां ग्रामीण विकास/प्रबंधन की शिक्षा दी जाती है.
*विभिन्न कल्याण मंत्रालय और विभाग (बच्चों/महिलाओं/जनजातीय/श्रमिक/ अल्पसंख्यक/युवा/वृद्ध आदि).
*राज्य ग्रामीण विकास एजेंसियां
*विभिन्न सामाजिक/विकास अनुसंधान संस्थान
*राष्ट्रीय जन-सहयोग और बाल विकास संस्थान (एनआईपीसीसीडी)
*केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड (सीएसडब्ल्यूबी)
*ग्रामीण विकास बैंक जैसे नाबार्ड आदि.
*सीएपीएआरटी (कपार्ट) आदि
अंतरराष्ट्रीय संगठन
यूनिसेफ, यूएनडीपी, डीएफआईडी, विश्व बैंक, यूनेस्को, पाथ इंटरनेशनल, केयर, क्राई, यूएसएआईडी, वाटर ऐड, एक्शन ऐड, यूनिफेम, चिल्ड्रन्स इंटरनेशनल, सेव द चिल्ड्रन, वल्र्ड विजन, जेआईसीए, आक्सफेम, साइट सेवर्स इंटरनेशनल, डब्ल्यूएचओ, एसओएस, कैथोलिक रिलीफ सर्विसेज, आगाखां फाउंडेशन, प्लान इंटरनेशनल, गोल इंडिया, सीसीएफ, हैंडीकैप इंटरनेशनल, सीड्स, रेडक्रॉस सोसायटी आदि.
ग्रामीण विकास में शैक्षिक पाठ्यक्रम उत्तीर्ण कर लेने के बाद कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों, कॉर्पोरेट घरानों, निजी और गैर-सरकारी संगठनों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं.
इसके अतिरिक्त ग्रामीण विकास व्यवसायी ग्रामीण निर्धनों के कल्याण के लिए काम करने वाले गैर-सरकारी संगठन या स्वयंसेवी एजेंसी भी शुरू कर सकते हैं. वर्तमान में गैर-सरकारी संगठनों की ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धन व्यक्तियों को संगठित कर सकते हैं. इस तरह के गैर-सरकारी संगठन संचालित करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों, दोनों से ही धन उपलब्ध हो सकता है, जो ऐसे संगठन की परियोजनाओं और जरूरतों के अनुसार दिया जाता है.
ग्रामीण विकास/ग्रामीण प्रबंधन/ग्रामीण अध्ययन में योग्यता रखने वाले व्यक्तियों को ग्रामीण निर्धनों के लिए सेवा का अवसर प्राप्त हो सकता है. कभी कभी समाज शास्त्री ग्रामीण विकास की अनदेखी करते हैं और उनमें से कुछ अन्य विषयों के नाम पर ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीण अध्ययन के क्षेत्र में काम करने लगते हैं.
ग्रामीण विकास में रोजगार एक संतोषजनक अनुभव हो सकता है, क्योंकि इससे समाज के निर्धन और उपेक्षित वर्गों की सेवा करने के अवसर प्राप्त होते हैं.
(लेखक ग्रामीण विकास विभाग, अन्नामलै यूनिवर्सिटी, अन्नामलै नगर - 608002 में फैकल्टी मेंम्बर (शिक्षक) हैं ई-मेल: drbalamuruganarasi@gmail.com)
चित्र: गूगल के सौजन्य से