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कपड़े की बर्बादी रोकने और गार्मेन्ट विनिमार्ताओं की मदद करने वाला सॉफ्टवेयर

        जब आप सॉफ्टवेयर के बारे में सोचते हैं, तो भारतीय वस्त्र और गार्मेन्ट उद्योग का नाम एकाएक आपके ध्यान में नहीं आता। लेकिन इस उद्योग से 8 वर्ष से ज्यादा अर्से से जुड़ी मौसमी अम्बष्ठ के मामले में ऐसा नहीं है। भारतीय वस्त्र और गार्मेन्ट उद्योग, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण क्षेत्र है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 4 प्रतिशत योगदान देता है। यह उद्योग कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है। इस उद्योग का बारीकी से निरीक्षण करते हुए, उन्होंने महसूस किया कि इसमें उन्नत और व्यवहारिक सॉफ्टवेयर की सख्त जरूरत है, जो कपड़े को बेहतर ढंग से उपयोग में ला सके।

और इस तरह इंटैलोकट के विचार ने जन्म लिया। जनवरी, 2001 की एक मुबारक शाम को मौसमी ने परिधान और गार्मेन्ट उद्योग से संबंधित अपने अनुभवों को अपने सॉफ्टवेयर और विपणन विशेषज्ञ दोस्तों-मानसिज गांगुली, अभिषेक श्रीवास्तव, ब्रतिश गोस्वामी और मधुमिता फूंकन के साथ साझा किया- वे सभी स्टार्टअप की संभावनाएं तलाश रहे थे और उन्हें यह विचार पसंद आ गया।

       एक सम्पूर्ण सॉल्यूशन- जो न केवल उत्पादकता, लाभ दिला सके, बल्कि पर्यावरण की रक्षा की दिशा में भी योगदान दे, उसको विकसित करने के जरिये इस उद्योग में योगदान देने की संभावना के विजऩ ने उनमें से प्रत्येक को जोश से भर दिया और वे इस सॉल्यूशन को विकसित करने में जुट गये। कम्पनी का नाम थ्रैडसोल सॉफ्टवेयर्स प्राइवेट लिमिटेड है और 2 साल की उत्पादन पूर्व अवधि गुजरने के बाद जनवरी 2013 के आरंभ में इंटैलोकट अस्तित्व में आया। मौसमी अम्बष्ठ ने रोजग़ार समाचार से बातचीत में अपने अनुभव साझा किए। उनके साक्षात्कार के अंश निम्नलिखित हैं:

प्रश्न : आपको कारोबार का विचार कहां से आया

उत्तर : कपड़ा सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल है और परिधान उद्योग में यह वस्त्र उत्पादन की लागत का 70-80 प्रतिशत है। मैं इस उद्योग से पिछले 10 वर्षों से संबद्ध रही हूं और इस अवधि के दौरान मैंने महसूस किया कि इसमें उन्नत और व्यवहारिक सॉफ्टवेयर की बहुत सख्त जरूरत है, जो कपड़े को बेहतर ढंग से उपयोग में ला सके । कपड़ा, श्रम और समय की कारगर और स्मार्ट तरीके से बचत करते हुए सिलेसिलाए उत्पादों के उद्योग को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से मैंने इस विचार के बारे में टैक्नॉलोजी में दिलचस्पी रखने वाले अपने दोस्तों के साथ चर्चा की। उस समय हम नया स्टार्टअप उद्यम लगाने पर विचार कर रहे थे। हमने इस बारे में गहन विचार-विमर्श किया और प्रतिस्पर्धी दृष्टिकोण, बाजार में प्रवेश, प्रगति के परिदृश्य और भविष्य की संभावनाओं के आधार पर बाजार का महत्वपूर्ण विश्लेषण किया। संभावित बाजार के अवसर पर गौर करते हुए, हमने इस अवधारणा को मूर्त रूप देने का फैसला किया और थ्रैडसोल सॉफ्टेवेयर प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की और क्रांतिकारी उत्पाद इंटैलोकटविकसित किया।

प्रश्न : शुरूआत में आपका मिशन क्या था?

उत्तर : शुरूआत में हमारा मिशन भारतीय गार्मेन्ट उद्योग के लिए वास्तविक नियोजन प्रणाली बनना था। जब हमने इस कम्पनी की शुरूआत की थी, तो हमने सोचा था कि हमारे पास ज्यादा से ज्यादा 25 कर्मचारी होंगे 1 उत्पाद भारत में बेचा जाएगा। आज, 3 वर्षों में, हमारे पास 100 कर्मचारी हैं, 3 उत्पाद हैं और उनका विस्तार 13 देशों में है। आज हमारा मिशन विश्व की नम्बर-1 गार्मेन्ट टैक्नॉलोजी कम्पनी बनना है।

प्रश्न : आपके उद्यमों में कितने कर्मचारी काम करते हैं?

उत्तर : इस समय विभिन्न कार्यालयों और देशों में थ्रैडसोल के 100 कर्मचारी काम कर रहे हैं। हमारे यहां उत्पाद का विकास करने के लिए सॉफ्टवेयर डेवलपर्स से लेकर विश्व स्तरीय परामर्शदाताओं की टीम, बिक्री टीम, विपणन, वित्त, प्रशासन, उत्पाद विकास और सपोर्ट- तक कई तरह की प्रतिभाएं हैं।

प्रश्न : आप कौन-सी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं?

उत्तर : हमने अपने प्रमुख उत्पाद इंटैलोकट से शुरूआत की थी, जो सामग्री का समझदारी से नियोजन और बेहतर ढंग से उपयोग करने वाला सॉफ्टवेयर है। यह सिलेसिलाये वस्त्र उद्योग (परिधान, फुटवियर, ऑटोमोटिव, घरेलू साजसज्जा, टैक्नीकल टैक्सटाइल्स आदि) के लिए सामग्री के उपयोग और उत्पादकता का आकलन, अनुमान और अनुकूलन  करता है। बाद में हमने इंटैलोबाय की संकल्पना और विकास किया- जो सामग्री की खरीदारी के लिए बुद्धिमानी से अनुमान लगाने वाला सॉफ्टवेयर है। यह किसी ऑर्डर के लिए आवश्यक कपड़े की मात्रा का  न कम न ज्यादा, बिल्कुल सटीक अनुमान लगाता है।  इस समय हम अपने तीसरे उत्पाद- इंटैलो ट्रेस की बीटा टेस्टिंग अवस्था में हैं, जो विश्व की पहली एनएफसी आधारित उत्पादन प्रबंधन व्यवस्था है। यह कपड़े के स्टोर से लेकर उसकी फिनिशिंग और लदान तक कपड़े के प्रत्येक इंच पर नजर रखने में विनिर्माताओं की सहायता करता है। हमने इंटैलोग्रीन जैसे सहायता अनुप्रयोग भी विकसित किए हैं- जो एक स्मार्ट टैबलेट अनुप्रयोग है, तो वर्तमान में अपैरल कटिंग फ्लोर में उपयोग में लाए जाने वाले ऑन-फ्लोर लेस्लिप्स का स्थान ले रहा है और उद्योग को कागज रहित और पर्यावरण के अनुकूल बना रहा है। इसके अलावा, हमने इंटैलोमोबाइल विकसित किया है- जो वास्तविक कपड़ा उपयोग का विश्व में प्रथम मोबाइल रिपोर्टिंग सिस्टम है- जो उपयोगकर्ताओं को किसी भी समय, किसी भी स्थान से सभी रिपोर्ट्स को देखने में सक्षम बनाता है।

प्रश्न : आप अपने कारोबार का विज्ञापन कैसे करते हैं?

उत्तर : सच कहूं, तो हम सीधे तौर पर अपने उत्पादों का विज्ञापन नहीं करते।  इसका मुख्य कारण उत्पादों के पीछे की अवधारणाएं हैं, जिन्हें सबसे पहले जागरूकता और समझ, उसके बाद गार्मेन्ट उद्योग में लोगों द्वारा स्वीकार किए जाने की आवश्यकता है। विषयवस्तु इसकी कुंजी है। विषयवस्तु का उपयोग हम लोगों को शिक्षित करने तथा कपड़े के उपयोग और बचत के दृष्टिकोण बारे में उन्हें जागरूक बनाने में करते हैं। आगे चलकर यह हमें उद्योग के सर्वसाधारण तक पहुंच कायम करने में मदद करेगा, जो तब सॉल्यूशन्स की जटिलताओं और कपड़े की बचत के महत्व को समझने में बेहतर रूप से सक्षम होंगे। वर्तमान में, मेरा स्टिच डायरीनामक एक ब्लॉग है, जिसके माध्यम से मैं इतने वर्षों में हासिल किए गए अपने ज्ञान को उद्योग से जुड़े लोगों तक पहुंचाती हूं। मैंने,

उद्योग के अन्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर विविध धारणाओं से संबंधित विषयों पर वेबिनार यानी इंटरनेट के माध्यम से सेमिनार और कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं। मेरी टीम वीडियो लॉग्स शुरू करने की भी प्रक्रिया में है, जो मेरे ब्लॉग स्टिच डायरीका विस्तार होगा। तो इस प्रकार वीडियो इस उद्योग के बारे में मेरी समझ को दूसरों तक पहुंचाने का एक अन्य माध्यम होगा। इसके अलावा, थ्रैडसोल लोगों तक पहुंच बनाने के लिए विभिन्न स्थानों पर परिधान उद्योग के विभिन्न ट्रेड शोज़ में भाग लेती रही है।

प्रश्न : आप अपनी कामयाबी का श्रेय किसे देती हैं?

उत्तर : मेरा मानना है कि सफलता दिशा में हमारा पहला कदम, शुरूआती दिनों से ही, अपने कारोबार का वैश्विक स्तर पर विस्तार करना था। यह फैसला बेहतरीन रहा। भारत का परिधान बाजार उत्पाद को स्वीकार करने में कुछ हद तक प्रतिरोधी रहा है। बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे बड़े बाजार हैं, जहां हमारे राजस्व का बड़ा स्रोत मौजूद है। एक अन्य कारण यह है कि हम जो भी विकसित करते हैं, उसे लगातार नष्ट करते हैं। यह किसी मशीन को तोडऩे और दोबारा बनाने- नया और उन्नत स्वरूप में बनाने जैसा है। हम अपने हर एक उत्पाद के लिए ऐसा ही करते आ रहे हैं। हम उसका निर्माण करते हैं, स्थापित करते हैं, नष्ट करते हैं और उसके बाद उसे उन्नत बनाते हैं। थ्रैडसोल की सफलता का सबसे आखिरी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण श्रेय हमारी टीम को जाता है। टीमवर्क, विशेषज्ञता और परिश्रम हमारी टीम का विजऩ है और इस उद्यमिता की यात्रा का संकेत है। बहुत शानदार, नयी सोच वाले लोग, इस संगठन के भावी नेता हैं।

प्रश्न : आपके वर्तमान स्थान का चयन आपने क्यों किया?

उत्तर : पिछले साल थ्रैडसोल ने अपना बेस बेंगलुरू से नोएडा स्थानांतरित कर दिया। इसका प्रमुख कारण यह था कि हमारी टीम को विभिन्न स्थानों की जरूरतें पूरी करने के लिए लगातार यात्रा करनी पड़ती है और बेंगलूरू में विभिन्न स्थानों के लिए वीजा मंजूर कराने में काफी समस्या होती थी। इसलिए हम नोएडा चले आए, जहां ये औपचारिकताएं पूरी करना सुगम होगा। हमारा कार्यालय कोलकाता में भी है, जहां हमारी कोर डेवलेपमेंट टीम बैठती है।

प्रश्न : आपके कारोबार में विलक्षण बात क्या है?

उत्तर : थ्रैडसोल ने सिलेसिलाये उत्पाद (गार्मेन्ट) बनाने वाले उद्योग के लिए सामग्री के उपयोग और दक्षता की तर्ज पर एक बिल्कुल नया बाजार खंड शुरू किया है। सिलेसिलाये उत्पादों का उद्योग वर्तमान में कपड़ों के उपयोग को अधिकतम बनाने में सहायता के लिए काफी हद तक सीएडी पर निर्भर करता है। थ्रैडसोल कपड़े की लागत में बचत को नए दृष्टिकोण से देखते हुए उद्योग की मौजूदा मानसिकता को चुनौती देती है। केवल वही खरीदा जाए जिसकी जरूरत है और जो है, उसका दक्षता से उपयोग किया जाए -  इसे उत्पाद की जगह में बेतहाशा रूप से अलग-थलग कर दिया है, क्योंकि पूरे विश्व में यह सिर्फ एक अकेला स्टार्टअप है, जो बाजार के इस खंड में काम करने का प्रयास कर रहा है।

प्रश्न : कम्पनी में बॉस होने के नाते आपके क्या उत्तरदायित्व हैं?

उत्तर : थ्रैडसोल के बारे में सबसे मज़ेदार, लेकिन अनोखी बात यह है कि यहां कोई बॉस नहीं है। हम नौकरशाही के वातावरण में काम नहीं करते। यहां केवल लीडर्स और मेंटर्स हैं। हां, मैं सीओओ हूं, लेकिन इस संगठन को आकार प्रदान करने वाली मैं अकेली नहीं हूं। इस कम्पनी में सीओओ के रूप में यात्रा में कई विभागों की देखरेख करना शामिल है। उत्पाद के विकास से लेकर वित्त तक, विपणन और सहायता तक, संगठन के विजऩ के अनुरूप कार्य करने की दिशा में, मैं प्रत्येक विभाग की मेंटर रही हूं।

प्रश्न : आपने इस प्रकार के कारोबार का चयन क्यों किया?

उत्तर : हम सभी कपड़े पहनते हैं और हम हमेशा कपड़े पहनते रहेंगे। मानव जाति के पाषाण युग में लौटने के कोई आसार नहीं हैं। और जब तक इंसान फैशन को पसंद करते रहेंगे, परिधान उद्योग फलता-फूलता रहेगा। वैश्विक परिधान उद्योग का मूल्य आज 1 ट्रिलियन डॉलर है, जो हर साल 9 प्रतिशत सीएजीआर की दर पर बढ़ रहा है। यह उद्योग प्रगति कर रहा है। यह उद्योग बहुत तेज गति से बढ़ रहा है, ऐसे में परिधान विनिर्माताओं को अपनी लागत में कमी लाने की नितांत आवश्यकता है। यह केवल उनके सबसे बड़े निवेश- कपड़े में कटौती करके किया जा सकता है। अकेले भारत में ही 30,000 से ज्यादा फैक्ट्रियां 30 बिलियन डॉलर निर्यात और 60 बिलियन डॉलर घरेलू गार्मेन्ट का उत्पादन कर रही हैं। वर्ष 2020 तक इसके कुल मिलाकर 220 बिलियन डॉलर तक बढऩे की संभावना है। विश्व में लगभग 150,000  फैक्ट्रियां हैं, जो कुल 660 बिलियन डॉलर मूल्य के गार्मेन्ट्स का उत्पादन कर रही हैं। चमड़े/इन्फ्लैटेबल/कमरे की साज-सज्जा/फुटवियर/घरेलू साज-सज्जा से संबंधित अन्य विनिर्माताओं को साथ जोड़े तो इस बाजार का आकार कहीं अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न : क्या आपकी कम्पनी जहां स्थित है, वहां के समुदाय की सहायता करती है?

उत्तर : थ्रैडसोल सॉल्यूशन्स का प्रमुख लाभ कपड़े की बचत में है, जिसे पर्यावरण के दृष्टिकोण से देखा जाए, तो कपड़े की बर्बादी घटाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। हम में से बहुत से लोग कपड़े की बर्बादी से पर्यावरण पर पडऩे वाले प्रभाव से अनजान हैं। वस्त्र उद्योग, तेल उद्योग के बाद, दुनिया का दूसरा बड़ा प्रदूषण फैलाने वाला उद्योग है। सच्चाई तो यह है कि इसकी समाप्ति अपशिष्ट भराव क्षेत्र में होती है। और यह अर्द्ध सत्य मात्र है। कपड़ों के निर्माण में होने वाली पानी की बर्बादी और प्रदूषण कुछ ऐसी बात है, जिसके बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं है। थ्रैडसोल कपड़े की बर्बादी में कमी लाकर और कपड़े की बचत करते हुए इस दिशा में कुछ हद तक योगदान दे रही है, अन्यथा पर्यावरण उससे बड़े पैमाने पर प्रभावित होगा।

प्रश्न : हाल ही में शुरूआत करने वालों को अगर आप कोई सलाह देना चाहें, तो वह क्या होगी?

उत्तर : किसी उद्योग को शुरू करना मुश्किल हो सकता है, आप जो भी करेंगे, उसमें ज्यादा से ज्यादा समय, ज्यादा धन, ज्यादा प्रयास, ज्यादा कुर्बानियों की आवश्यकता होगी। इससे निपटने का एक ही रास्ता - ज्यादा से ज्यादा दृढ़, ज्यादा केंद्रित, ज्यादा प्रतिबद्ध होना है  और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो भी आप करें, उसमें आपको ज्यादा से ज्यादा आनंद आना चाहिए।

प्रश्न : वे कौन सी दो चुनौतियां हैं, जिनका आपको अपने कारोबार में सामना करना पड़ा है?

उत्तर : हमें जिस सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा वह थी-  हमारी टीम को गार्मेन्ट उद्योग की जटिलतायें और उत्पादन से संबंधित प्रक्रियायें समझाना। हमें इस बात का बहुत गर्व है कि हम इन चुनौतियों से बहुत कारगर ढंग से निपटने में सक्षम हो सके। हम सॉफ्टवेयर डेवलेपमेंट से संबंधित अपनी पूरी टीम को परीक्षण के लिए निर्माण स्थलों पर ले गये, ताकि वे पूरी प्रक्रिया को अपने सामने सम्पन्न होता देख सकें।। आज थ्रैडसोल का प्रत्येक सदस्य, चाहे वह किसी भी विभाग से संबंधित हो, वह उत्पाद और उत्पादन स्तर होने वाले कार्य को पूरी तरह समझता है। वे सॉफ्टवेयर का परीक्षण करने और मुख्य उत्पादन से जुड़े व्यक्ति को अवधारणाएं समझाने में पूरी तरह सक्षम हैं। इससे हमें बहुत मदद मिली, क्योंकि प्रत्येक सदस्य ने उत्पाद को अंतिम उपभोक्ता के नजरिये से देखना शुरू कर दिया है।

इससे टीम के भीतर केंद्रित दृष्टिकोण और सुगम कम्यूनिकेशन संभव हो सका। कोराबार के संदर्भ में एक अन्य चुनौती विविध देशों में भाषा और सांस्कृतिक अंतर थी।  उत्पाद का विस्तार विभिन्न स्थानों पर था, इसलिए हमारे कारोबार में उन स्थानों की आवश्यकताएं पूरी करने की जरूरत थी, जहां बहुत बार सॉफ्टवेयर की अवधारणा के बारे में बताने में हमें सबसे बड़ी रुकावट भाषा की दृष्टि से आयी।  इतना ही नहीं, जब हमारे परामर्शदाताओं की टीम ने इन इलाकों की फैक्ट्रियों का दौरा किया, तो उस इलाके के लोगों के साथ तालमेल बैठाने के लिए उन्हें काफी संयम बरतना पड़ा और बहुत सी नयी बातें सीखनी पड़ीं। खुशकिस्मती से, हम स्थानीय स्तर पर बोली जाने वाली 7 अलग-अलग भाषाओं वाले 13 देशों में अपने उत्पाद का कार्यान्वयन करने में सफल रहे हैं।

प्रश्न : भारत में स्टार्टअप्स की निरंतरता के बारे में आपकी क्या राय है?

उत्तर : वर्षों से, यूनिर्कान्स, बाजार में शीर्ष मूल्यांकन वाले 1 बिलियन डॉलर या उससे अधिक राशि वाले मूल्य के ब्रांड, हमेशा से निवेशकों की पसंद रहे हैं। लेकिन अब, हाल ही में भारत की विशालतम यूनिकॅार्न्स, उच्च मूल्यांकन के लिए धन जुटाने की जद्दोजहद कर रही हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि स्टार्ट-अप्स को पौराणिक यूनिकॉर्न बनने की जगह कॉकरोच बनने की आवश्यकता है। कॉकरोच, हर तरह की बाधा से बच जाता है और अन्य के नाकाम होने के बावजूद वह सशक्त होकर सामने आता है। यदि भारतीय स्टार्टअप्स को अपना अस्तित्व बचाना है, तो उनके पास एक ही विकल्प कॉकरोच बनने का बचा है-सजावटी नहीं- बल्कि लम्बे अर्से तक कायम रहने में सक्षम कारोबारी मॉडल्स वाली मजबूत कम्पनियों सहित चिरस्थायी रहने वाला कॉकरोच। इस प्रकार यदि वे धन जुटाएंगी, तो वे तेजी से प्रगति करेंगी, लेकिन यदि वे ऐसा न भी करें, तो भी निरंतर मूल्य प्राप्त करना जारी रखेंगी।

 

  अमित त्यागी