विशेष लेख


Volume-11

राष्ट्रीय विकास में युवाओं का योगदान

लवी चौधरी


‘‘यदि हम अधिक सुरक्षित, अधिक समानता पर आधारित विश्व का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें युवाओं के कार्यों को स्वीकार करना चाहिए और उनकी सराहना करनी चाहिए. हमें नीतियों, कार्यक्रमों और निर्णय करने की प्रक्रियाओं में युवाओं को शामिल करने के प्रयासों को सुदृढ़ करना चाहिए ताकि युवाओं को और अन्य वर्गों को लाभ पहुंचे’’ 
- बान की मून, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव
किसी राष्ट्र का मूल्यांकन उसकी परिसंपत्तियों अथवा आधिपत्य से नहीं किया जाता, बल्कि उसके लोगों के आधार पर मूल्यांकन होता है. किसी भी देश में युवा उसके भविष्य का प्रतिरूप होते हैं. युवा न केवल कल के भाग्य विधाता हैं बल्कि वर्तमान का निर्माण करने वाले भी हैं. उनके पास एक सक्रिय उत्साह होता है, जिसे नियमित और सही दिशा में इस्तेमाल करते हुए किसी राष्ट्र को उत्कर्ष के शिखर पर पहुंचाया जा सकता है. अत: यहां से जीवन की सही दिशा में युवाओं का मार्गदर्शन करने और उनकी जोशपूर्ण ऊर्जा तथा राष्ट्र की समृद्धि बढ़ाने की इच्छाशक्ति का इस्तेमाल करने की राष्ट्र की प्रमुख भूमिका प्रारंभ होती है. इस कार्य को अंजाम देने के लिए समुचित शिक्षा प्रणाली, नैतिक शिक्षा और बेहतर राजनीतिक स्थिति पूर्वापेक्षित है. इससे हम निश्चय ही तीव्र राष्ट्रीय विकास सुनिश्चित कर सकते हैं. युवाओं ने विश्व की सभी गतिविधियों में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. युद्ध, राजनीति, निर्माण या विध्वंस, जो भी हो, युवा ऐसी सभी गतिविधियों से सम्बद्ध देखे गए हैं. युवाओं की भूख, इच्छा शक्ति, प्रेरणा, प्रतिबद्धता और उच्च उत्साह आदि गुण किसी राष्ट्र के निर्माण या विध्वंस में योगदान करते हैं.
युवावस्था एक ऐसा काल है, जिसमें महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी विचार दिमाग में आते हैं और उस जगत की रूपरेखा तैयार करते हैं, जिसमें हम रह रहे हैं. उनकी कर्मण्यता और अकर्मण्यता दोनों ही राष्ट्र की स्थिति का निर्धारण करती हैं. माइक्रोसॉफ्ट कार्पोरेशन के संस्थापक बिल गेट्स इसका जीता जागता उदाहरण हैं. उन्होंने अपने मौलिक विचार का इस्तेमाल किया और बड़े अद्भुत तरीके से विश्व का काया पलट कर दिया. विश्वभर में ऐसे अनेक क्रांतिकारी युवा नेता हुए हैं, जिन्होंने अपने कार्यों से दुनिया को बदल दिया. जैसा पहले कहा गया है, युवा परिवर्तन और प्रगति के सामाजिक कार्यकर्ता हैं. वे राष्ट्र के विकास में अग्रणी भूमिका अदा करते हैं, जो एक ऐसा दायित्व है, जिसका वे निर्वाह करते हैं. कोई राष्ट्र तभी धनवान बन सकता है, जबकि सम्पदा को अर्जित करने के लिए लोगों की सामूहिक बुद्धिमता और विवेक का समुचित इस्तेमाल किया जाता है. यदि किसी राष्ट्र की युवा पीढ़ी अपने पूर्वजों के साथ गति बनाए रखने और नवाचार एवं विकास में अक्षम रहती है, तो कोई समृद्ध राष्ट्र भी दरिद्र बन सकता है. दूसरी तरफ  विकासशील राष्ट्र विवेकपूर्ण आयोजना और उत्साही युवाओं के साथ अपनी खुशहाली बढ़ा सकते हैं.
युवा राष्ट्र की रीढ़ होते हैं. कहा जाता है कि युवावस्था जीवन का वसंत होती है. भारत को इस तथ्य पर गर्व है कि वह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, परंतु, यदि राष्ट्र को समुचित शासित किया जाना है, तो यह कार्य ऐसे जिम्मेदार व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए, जो सत्ता का इस्तेमाल राष्ट्र की स्थिति बेहतर बनाने में मदद करने की बजाए निजी स्वार्थों के लिए न करें. युवावस्था नवाचार और परिकल्पनाओं की अवस्था होती है. उनमें इतनी शक्ति होती है कि वे राष्ट्र को बेहतर और स्वस्थ स्थिति में पहुंचा सकते हैं. उनके पास देशवासियों को सही दिशा में ले जाने की नेतृत्व क्षमता है. युवा योद्धा होते हैं. वे समाज में वैयक्तिकता, समानता, आश्रयहीनता, बदमाशी, बेरोजगारी, शोषण, गरीबी और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करते हैं, जिनका सामना आज विश्व को करना पड़ रहा है.
युवा निरक्षरता: विकास के मार्ग में सबसे बड़ा अभिशाप युवा निरक्षरता है. आज विश्वभर में गरीबी का मूलभूत कारण निरक्षरता है. ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले करीब 90 प्रतिशत लोग निरक्षर हैं. इसका कारण यह है कि घोर अज्ञानता और संसाधन हीनता के कारण वे सही दिशा में आगे बढऩे में अपने को असमर्थ पाते हैं. उन्हें ऊपर उठने के लिए किसी की मदद की आवश्यकता है और इस काम में युवा उनकी व्यापक मदद कर सकते हैं. प्रत्येक युवा संभावनाओं और अवसरों की उम्मीद करता है, अत: उनके मुक्त मस्तिष्क उन्हें बेहतर व्यक्ति बनने और उनका उत्थान करने में मददगार हो सकते हैं. ऐसे सभी देश अधिक परिपक्व और अधिक स्वस्थ तभी बनते हैं, जबकि उनके अधिकतर युवा परिष्कृत और शिक्षित होते हैं और तब शिक्षा का इस्तेमाल राष्ट्र की अधिक बेहतरी के लिए किया जाता है. उन्हें उत्कृष्ट नैतिकता और उच्च मूल्य स्तर की आवश्यकता होती है, ताकि वे संघर्षों को रचनात्मकता में परिवर्तित कर सकें. हमारे पास महत्वाकांक्षी शल्य चिकित्सक, उद्योगपति, अन्वेषक हैं और कौन जानता है कि अगला राष्ट्रपति उन्हीं में से कोई एक होगा.
युवा नागरिकता और सम्बद्धता की राजनीति: आज के युग में युवाओं की सशक्त भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो गई है. उन्होंने अपने को राजनीति के क्षेत्र में उतारा है. सामाजिक आंदोलनों में युवा सुदृढ़ घटक के रूप में योगदान करते हैं. हमारे राष्ट्र को सर्वाधिक भीषण समस्याओं के समाधान में युवाओं को शामिल करने की आवश्यकता है. राष्ट्र बड़ी समस्याओं से जूझ रहा है, और मुझे विश्वास है कि युवा वर्ग उनसे निपटने में सक्षम होगा. नस्लवाद विश्वभर में एक सतत समस्या है. त्वचा के रंग और बालों की संरचना के कारण लोग एक दूसरे के प्रति क्रुध रहते हैं. धर्म एक अन्य सरोकार है. युवा अपने जोड़ीदारों को शांति, सद्भाव और प्रेम के साथ रहने के लिए राजी कर सकते हैं. हम सब एक हैं और समान हैं, हमें  क्षुद्र भेदभाव को इस बात की अनुमति नहीं देनी चाहिए कि वह हमें विभाजित करे.
युवा अपराध रोकने में मददगार हो सकते हैं. समाज का वर्तमान स्तर गिरता जा रहा है. महिलाओं पर उनके अत्याचारी पतियों, परिवारों और समाज द्वारा हमले किए जाते हैं, वे उत्पीडि़त की जाती हैं, उनके अधिकारों का हनन किया जाता है और यहां तक कि उनकी हत्या कर दी जाती है. व्यक्तिगत मकानों, व्यापारों में सेंधमारी की जाती है. आपराधिकता और उग्रता पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है. यहां भी युवाओं में वह क्षमता है, कि वे अपने राष्ट्र की स्थिति बदल सकते हैं. वे अपने जोड़ीदारों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं. वे अपने सहभागियों को जीवन में उपयोगी चीजों की जानकारी दे सकते हैं, उन्हें उनमें शामिल कर सकते हैं और उनका सशक्तिकरण कर सकते हैं. वे उन्हें यह समझने में मदद कर सकते हैं कि अच्छी शिक्षा का महत्व क्या होता है.
युवा सामूहिक बेहतरी के लिए अवश्य काम कर सकते हैं. लोग सिर्फ  अपनी प्रगति और आर्थिक बढ़ोतरी को लेकर धक्का-मुक्की करते हैं, जबकि किसी भी तरह से राष्ट्र के विकास में कुछ योगदान करना भूल जाते हैं. हमें बृहद चित्र दिमाग में रखने की आवश्यकता है. हमें यह सोचना होगा कि हम सब मिल कर किस तरह राष्ट्र के विकास में योगदान कर सकते हैं और किस तरह कार्यशैलियों में बदलाव राष्ट्र के बच्चों, उसकी अर्थव्यवस्था और उसके विकास को प्रभावित कर सकता है.
आगे आएं. राष्ट्र का विकास सिर्फ  वेतन लेने से नहीं होगा, बल्कि देश के उन हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करने से होगा, जिनकी अनदेखी हुई है अथवा जो स्वेच्छा से पीछे रह गए हैं. यदि युवा स्वयंसेवक पिछड़े वर्गों का उत्थान करने और उनकी वृद्धि एवं विकास में मदद करते हैं, तो राष्ट्र पर्याप्त तेजी से प्रगति कर सकता है.
संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग: हम भाग्यशाली हैं कि भारत जैसे देश के नागरिक हैं, जो मानव शक्ति, ईंधन, प्रौद्योगिकी जैसे संसाधनों का भंडार है और बहुत सारी अन्य चीजें हैं, परंतु नागरिकों के रूप में हमें कर्तव्य भावना की पहचान करने और इन संसाधनों का हर संभव उत्कृष्ट तरीके से इस्तेमाल करने की आवश्यकता है. उदाहरण के लिए प्राइवेट वाहन की बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करके हम ईंधन में बचत करने, सार्वजनिक परिवहन का बेहतर उपयोग करने, प्रदूषण का स्तर कम करने और अधिक किफायती जीवन जीने में सहायता कर सकते हैं.
दूरदराज के क्षेत्रों का परित्याग करना छोड़ें: देश के दूरदराज के क्षेत्रों पर अत्यधिक ध्यान देने और उनका विकास करने की आवश्यकता है. जब तक उपेक्षित और दूरदराज के क्षेत्रों को व्यापक परिप्रेक्ष्य में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक राष्ट्र संपूर्णता के साथ नहीं फलफूल सकता. ऐसे अनेक ग्रामीण क्षेत्र हैं, जहां औषधियां और बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाती हैं. ऐसे क्षेत्र उपेक्षित हैं या फिर सरकार की पहुंच से भी बाहर हैं. पिछड़े क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों को एक यूनिट के रूप में हल किया जाना चाहिए, चाहे वे विद्युत, सडक़, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल, जिससे भी संबंधित हों. युवा गरीबों की मदद करने, उन्हें शिक्षित और साक्षर बनाने, जरूरतमंदों की सहायता करने और स्वास्थ्य देखभाल के समय उनका मार्गदर्शन करने में उल्लेखनीय मदद कर सकते हैं. युवाओं को इन क्षेत्रों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने की दिशा में काम करना चाहिए, क्योंकि भारत इसी वजह से पीछे है कि यहां सुविधाओं और संसाधनों का एक समान वितरण नहीं है.
ऐसे असंख्य तरीके हैं, जिनसे युवा राष्ट्र विकास में योगदान कर सकते हैं. वे जिस भी क्षेत्र में संलग्न हों, चाहे वह शिक्षण हो, यांत्रिकी, चिकित्सा या खेती, सभी में कठिन परिश्रम करके वे एक बेहतरीन नागरिक के दायित्वों का निर्वाह कर सकते हैं. राष्ट्र सेवा और उसके फायदों के बारे में युवाओं का मार्गदर्शन करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करने की परम आवश्यकता है.
राष्ट्र के युवा सरकारी, निजी क्षेत्र, सिविल सोसायटी और अपने माता-पिता की सहायता और समर्थन से राष्ट्र के हित के लिए सक्रिय भागीदारी निभा सकते हैं. यह सत्ता में बैठे लोगों का दायित्व है कि वे युवाओं को विकास कार्यों के संचालन का दायित्व सौंपें. युवाओं को स्वयं पर और अपनी क्षमताओं पर अवश्य भरोसा होना चाहिए क्योंकि यही चीजें व्यक्तिगत रूप में और सामूहिक रूप में बड़ी परिसंपत्तियां हैं, जो विकास की हमारी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हमें संचालित करती हैं. यह भी जरूरी है कि राष्ट्र विकास में युवाओं को भागीदार बनाने के लिए उन्हें निर्णय करने की प्रक्रिया, विशेषकर उनके जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दों के बारे में निर्णय करने में उन्हें सक्रिय भागीदार बनाया जाए. यदि किसी राष्ट्र के युवा शिक्षित होंगे, और प्रगतिशील बदलाव लाने के लिए अतिरिक्त श्रम करने के इच्छुक होंगे, तो करिश्मा संभव है.
यदि हम अपने राष्ट्र को एक वैश्विक महाशक्ति बनाना चाहते हैं, तो हम सभी को मिल कर सद्भावनापूर्वक देश को ऊंचा उठाने में सरकार की मदद करनी होगी. इसके लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता है और गिने-चुने लोग सभी कार्य नहीं कर सकते. प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ योगदान करना होगा. ग्रामीण युवाओं को आगे बढऩा होगा और अपने रियायती क्षेत्र से बाहर आना होगा. इसी प्रकार शहरी युवाओं को स्वयं की भौतिक संतुष्टि से बाहर निकल कर सोचना होगा और अवधि के अन्य हिस्सों को न केवल युवाओं को प्रेरित करना होगा, बल्कि हर रोज स्वयं भी कुछ बेहतर करने का प्रयास करना होगा. भारत के पास आज जो कुछ है, वह उससे बहुत कुछ अधिक प्राप्त कर सकता है, लेकिन यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि हम अपने सपनों का राष्ट्र विकसित करने के लिए अपनी बुद्धिमता और प्रतिभा का इस्तेमाल किस तरह करते हैं.
निष्कर्ष रूप में राष्ट्र निर्माण में युवाओं की प्रमुख भूमिका अनिवार्य है. उनमें अपनी पहचान कायम करने और राष्ट्र को आगे बढ़ाने में नेतृत्व करने की क्षमता है, परंतु वे ऐसा तभी कर सकते हैं, जबकि उनकी सरकार और जोड़ीदार युवा उनका साथ दें. नतीजतन युवा विश्व को संचालित कर सकते हैं और सफलता में अभिरुचि के साथ अपनी सुंदर भूमि के फलने-फूलने में योगदान कर सकते हैं.
(लेखक नई दिल्ली स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं. ईमेल: loveeyyy@gmail.com)
चित्र: गूगल के सौजन्य से