विशेष लेख


Volume-12

भारत में योग पर्यटन

मोहित मिश्र

हाल के वर्षों में भारत चिकित्सा पर्यटन के वैश्विक लक्ष्य के रूप में उभरा है. यह चिकित्सा यात्रा लक्ष्य के रूप में सर्वाधिक तेजी से विकसित हो रहा है, जिसकी अनुमानित वार्षिक वृद्धि दर 22 प्रतिशत है. परंतु, राष्ट्र नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, पश्चिमी और मध्य एशियाई देशों आदि के लिए ऐतिहासिक रूप में क्षेत्रीय स्वास्थ्य देखभाल केंद्र रहा है. विदेशी यात्रियों के वृतांतों, जैसे पुरातत्वीय साक्ष्यों और विभिन्न ग्रंथों से हमें पता चलता है कि हमारे यहां प्राचीन अस्पताल स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं प्रदान कर रहे थे. इन अस्पतालों के लिए राजाओं और राजतंत्रों द्वारा धन दिया जाता था. हमारे देश में परंपरागत उपचार पद्धतियों और आरोग्यकर पद्धतियों का विकास अधिकतर आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) चिकित्सा शैलियों और पद्धतियों से हुआ है. एक विषय के रूप में तथा  शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक व्यायामों के समूह के रूप में योग की उत्पत्ति प्राचीन भारत में हुई. योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द योग से हुई, जिसका अर्थ है, जोडऩा. इस तरह योग व्यक्ति की स्वयं की चेतना और सार्वभौम चेतना के बीच एकीकरण का नाम है. योग का अंतिम लक्ष्य आत्मन अर्थात् स्वयं को प्राप्त करना है. योग एक विज्ञान है, जिसके दायरे में हमारा शरीर, मस्तिष्क और आत्मा आती है. योग के विभिन्न तरीकों में भक्ति योग, राज योग, ज्ञान योग आदि शामिल हैं. परंतु, वर्तमान काल के संदर्भ में योग का सर्वाधिक लोकप्रिय पहलू हठयोग है. हठयोग का सामान्य अर्थ है - आसनों का योग, जिसके जरिए एक साधक अपने शरीर और मस्तिष्क को तंदरुस्त रखता है. मेडिटेशन यानी ध्यान इन पद्धतियों का अभिन्न अंग है, जिसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य हासिल करना है. योग को आमतौर पर अत्यंत विश्रांति और संकेंद्रण की अवस्था कहा जाता है, जिसमें शरीर सामान्यत: तनावमुक्त और मस्तिष्क अचल वैचारिक स्थिति में होता है. ध्यान दिमाग के संकेंद्रण में मदद करता है और हमारी विचार प्रक्रिया को रचनात्मक वस्तुओं की ओर ले जाता है. यह उन नकारात्मक विचारों और कटु स्मृतियों का निस्तारण करता है, जो अतीत के अनुभवों के कारण हमारे अचेतन मस्तिष्क में जमा होती रहती हैं. अनेक प्रकार के योगासन हैं, जो शरीर के अलग अलग भागों से सम्बद्ध हैं. योग में सांस लेने की तकनीक पर विशेष बल दिया जाता है, चूंकि यह माना जाता है कि हमारे शरीर में सांस जीवन का स्रोत है और मस्तिष्क एवं शरीर दोनों को स्वस्थ्य रखने और उनके कार्य संचालन के लिए व्यक्ति को सांस पर नियंत्रण रखना चाहिए.
21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने जैसे सरकार के उपायों से विश्वभर में योग का प्रचार करने में महत्वपूर्ण मदद मिली है. योग बड़ी तेजी के साथ स्वास्थ्य देखभाल उपचार पद्धति के रूप में विकसित हो रहा है, जिसे लोग स्वस्थ रहने के एक माध्यम के रूप में अपनाने लगे हैं. योग पर्यटन आज पर्यटन उद्योग के अभिन्न हिस्से के रूप में उभर रहा है, जिसमें भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता है. बड़ी संख्या में पर्यटक शांति और आध्यात्मिकता के भारत के अनुभव का लाभ उठाने के लिए हमारे देश की यात्रा पर आते हैं. वे यहां योग अभ्यास करने और स्वस्थ जीवन से संबंधित अन्य परंपरागत पद्धतियों को सीखने के लिए आते हैं. हिमालय की तलहटी में स्थित निर्मल और शांत मठों से लेकर सुदूर दक्षिण में हिंद महासागर के किनारों तक स्थित योग और परंपरागत चिकित्सा केंद्र दुनियाभर से आने वाली पर्यटकों को शांति प्रदान करते हैं और इन आरोग्यकर पद्धतियों के चमत्कारिक प्रभाव को महसूस कराते हैं. उत्तराखंड से लेकर तमिलनाडु तक देशभर में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य केंद्र और आश्रम हैं, जो समग्र स्वास्थ्य आधारित यात्रा की बढ़ती मांग को पूरा करते हैं. हम इस आलेख में कुछ श्रेष्ठ आश्रमों और एकांत स्थलों पर प्रकाश डालने का प्रयास कर रहे हैं, जो पर्यटकों और योगप्रेमियों को उत्कृष्ट योग सेवाएं प्रदान करते हैं.
मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली : यह एक स्वायत्त संस्थान हैं, जो देशभर में योग संस्कृति के विकास और संवर्धन के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करता है. इसका लक्ष्य योग संस्कृति को बहाल करना और देश के सभी भागों में योग के दर्शन का प्रचार करना है. संस्थान की कार्य प्रणाली भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आयुष विभाग के अंतर्गत आती है. यह संस्थान योग अध्ययन में अल्पावधि पाठ्यक्रमों से लेकर पीएच.डी तक कई पाठ्यक्रमों का संचालन करता है. यह संस्थान ग्रीष्म योग शिविरों का संचालन करता है जिनमें दिल्ली स्थित विभिन्न उद्यानों में प्रात: और शाम के समय दो घंटे के नि:शुल्क योग सत्र आयोजित किए जाते हैं. योग अभ्यास के इच्छुक व्यक्ति सप्ताहांत में आयोजित किए जाने वाले योग कार्यक्रमों के लिए पंजीकरण करा सकते हैं. ये कार्यक्रम नि:शुल्क होते हैं और योग अभ्यास और दर्शन में बुनियादी जानकारी प्रदान करते हैं. महीने भर चलने वाले कोर्स भी आयोजित किए जाते हैं, जिनकी कक्षाएं आमतौर पर हर रोज सुबह होती हैं. अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप भी उपलब्ध है.
बिहार योग विद्यालय, मुंगेर, बिहार : बिहार में मुंगेर स्थित योग विद्यालय की स्थापना 1964 में श्री स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने की थी. इसका उद्देश्य परिवारजनों और संन्यासियों को एक समान योग का प्रशिक्षण प्रदान करना है. इस विद्यालय में विकसित योग पद्धतियां व्यक्तिगत विकास के प्रति अनेक दृष्टिकोणों का संश्लेषण हैं, जिनमें परंपरागत वेदांतिक, तांत्रिक और योगिक शिक्षाओं के साथ सम-सामयिक भौतिक और मानसिक स्वास्थ्य विज्ञानों का संयोजन किया जाता है. ये पद्धतियां अब बिहार योग भारती द्वारा सिखाई जाती हैं. इस विद्यालय का गंगादर्शन कैम्पस पवित्र नदी गंगा के किनारे पर स्थित है, जो शांति, स्थिरता और बेहतर सेवा का केंद्र है. इस कैम्पस में दिन की शुरूआत प्रात: 4 बजे से होती है और शाम 8 बजे तक सत्संग और कीर्तन होता रहता है. यह विद्यालय वर्ष में दो बार 4 महीने के योग अध्ययन पाठ्यक्रमों का संचालन करता है. विभिन्न रुचियों और पृष्ठभूमियों वाले विविध प्रकार के विद्यार्थी इस विद्यालय में दाखिला लेते हैं. यह परिसर गुरुकुल जीवनशैली और अनुशासन का अनुसरण करता है, ताकि एक ऐसा वातावरण सृजित किया जा सके, जिसमें योगिक जीवन और भावना को सूक्ष्म स्तर पर अनुभव किया जा सके. योगिक शिक्षा के साथ साथ जीवन और सेवा की भावना, नि:स्वार्थ सेवा, समर्पण, प्रतिबद्धता और करुणा जैसे गुणों पर भी बल दिया जाता है, जो साधकों में कूट-कूट कर भरे जाते हैं. विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की समूची अवधि के दौरान आश्रम के भीतर ही रहना होता है और उन्हें बाहरी सेवाओं, जैसे ईमेल, बैंकिंग और शोपिंग को एक्सेस करने की अनुमति नहीं दी जाती. अधिक ब्यौरे के लिए आप वेबसाइट www.biharyoga.net पर लॉगऑन कर सकते हैं.  
राममणि अय्यंगर मेमोरियल योग इंस्टीट्यूट (आरआईएमवाईआई) पुणे, महाराष्ट्र : इस संस्थान की स्थापना 1975 में योगाचार्य बीकेएस अय्यंगर ने की थी. यह पुणे, महाराष्ट्र में स्थित है. विश्वभर से विद्यार्थी योग का सार और जीवन मूल्यों का अध्ययन करने के लिए यहां आते हैं. संस्थान के बेजोड़ डिजाइन का अपना अलग महत्व है. इसके तीन तल शरीर, मस्तिष्क और आत्मा को व्यक्त करते हैं. इसकी ऊंचाई 71 फुट है और इसमें 8 स्तंभ हैं, जो अष्टांग योग के आठ अंगों यानी यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के प्रतीक हैं. योगाचार्य ने अनुसंधान और अनुभव के माध्यम से योग की एक विशेष पद्धति का विकास किया, जिसे ‘‘अय्यंगर योग’’ कहा जाता है. इस पद्धति से एक साधारण मानव भी योग सूत्रों की बुद्धिमत्ता को सहज रूप में अनुभव कर सकता है. आरआईएमवाईआई में अय्यंगर योग कक्षाओं का नियमित रूप से आयोजन किया जाता है, जो नव-प्रशिक्षुओं से लेकर वरिष्ठ अभ्यासकर्ताओं से सम्बद्ध होती हैं. महिलाओं, बच्चों और चिकित्सा समस्याओं से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए अलग से योग कक्षाएं आयोजित की जाती हैं.
श्री के. पट्टाभि जोइस अष्टांग योग इंस्टीट्यूट, मैसूर, कर्नाटक : आचार्य पट्टाभि जोइस ने 1930 के दशक में अपने गुरु से योग की एक प्राचीन पद्धति, अष्टांग योग का प्रशिक्षण प्राप्त किया था. दर्शन और ध्यान जैसे योग के तत्वों का अध्ययन करते हुए, जोइस ने चुनौतीपूर्ण शारीरिक गतिविधियों और सांस पर पूर्ण ध्यान केंद्रित किया. उनके द्वारा विकसित योग शैली ने योग जगत क्रांति उत्पन्न की. उन्हीं के प्रयासों की बदौलत आज अष्टांग योग सर्वाधिक आसानी से समझ में आने वाली पद्धति बन गई है. इसमें अय्यंगर के प्रयास भी शामिल हैं. यह संस्थान 3 महीने के सीमित पाठ्यक्रम का संचालन करता है और फिर से पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन करने से पहले 6 महीने का अंतराल अवश्य होना चाहिए. संस्थान विद्यार्थियों को कोई छात्रावास प्रदान नहीं करता है और दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को पास पड़ोस में ठहरने की व्यवस्था करनी होती है. दुनियाभर के विद्यार्थी योग का प्रशिक्षण लेने के लिए यहां आते हैं. योग कक्षाएं सुबह के समय आयोजित की जाती हैं. अधिक जानकारी के लिए आप www.kpjayi.org पर ब्राउस कर सकते हैं.
अंतर्राष्ट्रीय सिवानंद योग वेदांत सेंटर (पैन इंडिया) : इस संगठन की स्थापना स्वामी विष्णुदेवानंद ने अपने गुरु स्वामी सिवानंद के नाम पर की थी, जो 20वीं सदी के सर्वाधिक प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरुओं में से एक थे. प्रथम सिवानंद योग केंद्र की स्थापना 1959 में मोंट्रियल, कनाडा में की गई थी. उसके बाद से विश्वभर में ऐसे अनेक केंद्रों, सम्बद्ध केंद्रों और आश्रमों की स्थापना की जा चुकी है. ये केंद्र शारीरिक, मानसिक तंदुरुस्ती के लिए विविध प्रकार के योग पाठ्यक्रमों के संचालन के साथ ही कर्मयोग (नि:स्वार्थ सेवा) के जरिए आध्यात्मिक विकास भी करते हैं. ये केंद्र उत्साही प्रशिक्षार्थियों को रोजमर्रा की जिंदगी में योग के दर्शन को कार्यान्वित करने में मदद पहुंचाते हैं. सिवानंद आश्रम द्वारा संचालित योग अवकाश पाठ्यक्रम अत्यंत लोकप्रिय कार्यक्रम है. प्रात:कालीन सत्संग कार्यक्रमों के साथ दिन के समय योग की दो कक्षाएं व्यक्ति को रोजमर्रा के तनाव से मुक्ति दिलाती हैं. यह शक्तिशाली और संतुलित अवकाश कार्यक्रम आधुनिक व्यस्त जीवन से हट कर कुछ नया करने का नायाब तरीका है.
कैवल्यधाम आश्रम, लोनावला, महाराष्ट्र : महाराष्ट्र में दर्शनीय स्थल लोनावला में 180 एकड़ जमीन पर फैले आश्रम परिसर में एक अनुसंधान संस्थान, अस्पताल और आधिकारिक मंजूरी प्राप्त विद्यालय है. यह विद्यालय योगिक अध्ययन में विभिन्न अल्पावधि और दीर्घावधि पाठ्यक्रम संचालित करता है. कैवल्यधाम आश्रम पुस्तकालय में योग पर 25,000 से अधिक पुस्तकें हैं. इसे विश्व में योग संबंधी सबसे बड़ी लाइब्रेरी के रूप में जाना जाता है. बिहार योग विद्यालय से भिन्न यह आश्रम अपने अतिथियों को प्रवास के दौरान आसपास के क्षेत्रों में घूमने की अनुमति प्रदान करता है. छात्रावास और शुल्क ढांचे के बारे में ब्यौरा वेबसाइट www.kdham.com से प्राप्त किया जा सकता है.
अंतर्राष्ट्रीय योग शिक्षा और अनुसंधान केंद्र, पुदुच्चेरी, तमिलनाडु :  यह केंद्र एक परंपरागत गुरुकुल आश्रम है, जो योगिक दर्शन और जीवन के सिद्धांतों पर आधारित है. यहां प्रदत्त सभी पाठ्यक्रम आवासीय हैं और किसी भी पाठ्यक्रम के दौरान बाहरी जगत से सम्पर्क की अनुमति नहीं दी जाती है. इन पाठ्यक्रमों का स्वरूप कड़ा है, लेकिन वे प्रामाणिक आश्रम अनुभव कराते हैं. दिन की शुरूआत प्रात: साढ़े चार बजे से होती है और समापन रात्रि 9 बजे होता है, जिस दौरान आश्रम में समाधि अवस्था प्राप्त करने के लक्ष्य पर बल दिया जाता है. यह ऐसी अवस्था है, जिसमें शरीर और मन पूरी तरह निर्मल हो जाते हैं. ये केंद्र योग के प्रति प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाता है. इसके तीन चौथाई विद्यार्थी विदेशी होते हैं.
पर्पल वैली, अस्सागोआ, गोवा : पर्पल वैली एक शानदार योग केंद्र है, जो विदेशी पर्यटकों में अत्यंत लोकप्रिय है. गोआ के सुंदर तट पर स्थित यह स्थान अष्टांग योग में पाठ्यक्रमों के साथ ही विश्व स्तरीय कार्यशालाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है. अधिकतर पाठ्यक्रम दो सप्ताह के होते हैं. यदि समयाभाव हो, तो कोई अतिथि एक सप्ताह का प्रशिक्षण भी ले सकता है. इस केंद्र में मुख्य ध्यान अष्टांग योग पर केंद्रित किया जाता है, जो आसन केंद्रित है. पर्पल वैली में अष्टांग की शिक्षा मैसूर शैली में दी जाती है. सुबह की शुरूआत मैसूर शैली के स्व-आसनों से होती है, जबकि दोपहर के समय दर्शन, योगिक जीवन शैली, सत्संग और प्राणायाम के बारे में विशेष कक्षाएं आयोजित की जाती हैं. भू-परिदृश्य उद्यानों से घिरे दो गैस्ट हाउसों में ठहरने की व्यवस्था है, जो वन में रहने का आभास कराती है.
हिमालय क्षेत्र में ऋषिकेश, उत्तराखंड स्थित आनंद आश्रम: ऋषिकेश को विश्व में योग की राजधानी समझा जाता है. यहां अनेक आश्रम और रिजॅार्ट हैं, जो विश्व स्तरीय योगिक अनुभव कराते हैं. इन केंद्रों में योग को जीवन की एक पद्धति के रूप में अपनाया जाता है. आनंद आश्रम हिमालय की तलहटी में स्थित है. यह परंपरागत आश्रम नहीं है, बल्कि एक पुरस्कार विजेता लग्जरी पर्यटक स्थल है जो महाराजा पैलेस एस्टेट में करीब 100 एकड़ में फैला है. यह साल के जंगलों से घिरा है, जहां से आध्यात्मिक शहर ऋषिकेश और पवित्र गंगा नदी घाटी दिखाई देती है. यह भारत में सर्वोत्कृष्ट लग्जरी आयुर्वेदिक केंद्रों मे से एक है, जो परंपरागत आयुर्वेद, योग और वेदांत को अंतर्राष्ट्रीय उपचार अनुभवों, तंदुरुस्ती और स्वस्थ कार्बनिक व्यंजनों से जोड़ता है ताकि संतुलन बहाल किया जा सके और ऊर्जा समायोजित की जा सके. इस आश्रम में योग गुरूओं द्वारा आधारभूत योग का इस्तेमाल किया जाता है, जो शारीरिक आसनों, प्राणायाम और ध्यान का समीकरण है. ये पद्धतियां अतिथियों को शारीरिक शुद्धता और मानसिक चैन प्रदान करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं. इस रिजॅार्ट के बारे में जानकारी इसकी वेबसाइट www.anandaspa.com से ली जा सकती है.
परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश, उत्तराखंड : परमार्थ निकेतन उन पर्यटकों के लिए एक सम्पूर्ण स्थल है, जो रोजमर्रा की जिंदगी से कुछ निजात पाना चाहते हैं. ऋषिकेश में पवित्र गंगा नदी के किनारे पर स्थित यह आश्रम अपने अतिथियों को शांतिप्रद योग और ध्यान के साथ आध्यात्मिक अनुभव भी कराता है. यहां पर वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय योग उत्सव भी आयोजित किया जाता है, जो विश्व विख्यात कार्यक्रम है. इस दौरान विभिन्न योग शैलियों के प्रदर्शन के साथ ही कार्यशालाओं, वार्तालापों, सेमिनारों आदि का आयोजन होता है, जिनमें योग जगत के जाने-माने विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं. यह संगठन सप्ताहभर के फाउंडेशन कोर्स से लेकर गहन योग कार्यक्रमों तक विभिन्न प्रकार के योग प्रशिक्षणों का आयोजन करता है. योग कार्यक्रम के अंतर्गत प्रार्थनाएं, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, परंपरागत हठ योग, वैदिक मंत्रोच्चारण, कर्म योग और प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किए जाते हैं. हर रोज गंगा हवन और आरती की जाती है, जिसके बाद सत्संग आयोजित किया जाता है. अधिक ब्यौरे के लिए आश्रम की वेबसाइट www.parmarth.org पर ब्राउस किया जा सकता है.
कृष्णामाचार्य योग मंदिरम् चेन्नै, तमिलनाडु : दक्षिण चेन्नै में स्थित कृष्णामाचार्य योग मंदिरम् अनेक वर्षों से योग को एक समग्र विज्ञान के रूप में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है. आश्रम के अनुसार योग सिर्फ शारीरिक तंदुरुस्ती के लिए व्यायाम मात्र नहीं है, बल्कि इसका एक सुस्थापित सैद्धांतिक आधार है. यह संस्थान विनियोग नाम की पद्धति पर कार्य करता है, जिसमें योग का इस्तेमाल प्रत्येक विद्यार्थी के लिए एक ग्राहकोन्मुखी दृष्टि विकसित करने के लिए किया जाता है. इसमें आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों का लक्ष्य किसी समस्या की जड़ तक जाना और उसका पूरी तरह उपचार करना होता है. यह व्यक्ति के भीतर एक आंतरिक यात्रा है. संस्थान में आयोजित सभी गतिविधियों का फोकस इस बात पर रहता है कि योगाभ्यास करने के इच्छुक व्यक्ति के लिए विशेष रूप से उपयुक्त अथवा उसकी जरूरतों के अनुसार योगाभ्यास कार्यक्रम तैयार किए जाएं. इस संस्थान का मुख्य बल उपचार पर रहता है, क्योंकि इसका मानना है कि योग का अभ्यास और इसके असंख्य उपकरणों का इस्तेमाल व्यक्ति की बदलती जरूरतों और अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अवश्य किया जाना चाहिए. यह हर महीने 300 से अधिक ऐसे व्यक्तियों को सेवाएं प्रदान करता है, जो स्वास्थ्य देखभाल परामर्श के लिए यहां आते हैं. इसके लिए हर महीने एक के बाद एक करीब एक हजार योग उपचार कक्षाओं का आयोजन करता है. संगठन के बारे में ब्यौरा इसकी वेबसाइट www.kym.org. से प्राप्त किया जा सकता है.
(लेखक एक वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं. इस लेख में व्यक्त विचार उनके निजी विचार हैं)
चित्र: गूगल के सौजन्य से