विशेष लेख


Vol.29, 2017

मन की बात’ : एक प्रेरणा पुंज

विष्णु चौहान

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम आकाशवाणी पर ३ अक्तूबर, २०१४ को शुरू किया था. प्रधानमंत्री ने यह कार्यक्रम शुरू कर जहां एक ओर अपनी पहचान खोते जा रहे आकाशवाणी रेडियो को नया जीवनदान दिया है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री का कार्यक्रम मन की बात देशवासियों और युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत साबित हो रहा है. अब तक ३५ बार मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने जहां देशवासियों को जीने के तौर-तरीकों को बताया है, वहीं उन्होंने युवाओं को भी जीवन शैली में छोटे-छोटे बदलाव कर तनावमुक्त जीवन जीने के गुण सिखाए हैं. इस कार्यक्रम से देश का प्रत्येक वर्ग जीवन जीने की कला और जीवन में कामयाब होने के गुण धारण करता रहा है. इस कार्यक्रम में मातृत्व अवकाश, धन की बात, सफाई करने वाले अधिकारी की प्रेरणात्मक रूप में प्रशंसा, स्माइल मोर-स्कोर मोर, छात्रों को तनाव से बचने का गुरुमंत्र, योग करे निरोग, बेनामी संपत्ति, जीवन को कामयाब कैसे किया जाए आदि-आदि को जीवन एक प्रेरणा पुंज मानकर देशवासी उससे प्रेरणा लें, जीवन को ईमानदारी और मेहनत से सफल बनाने के प्रयास कर रहे हैं. पीएम मोदी ने मन की बात एपिसोड में पुणे की अपर्णा का खासतौर पर आभार प्रकट किया. दरअसल, अपर्णा ने पीएम मोदी से मोहल्लों में सामान बेचने वाले गरीबों की समस्याओं को उठाने का आग्रह किया था. अपने संबोधन में उनके इस संदेश को शामिल करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब हमारे घर के आस-पास कोई सामान बेचने के लिए आता है तो हम उससे दो-चार रुपए के लिए मोल भाव करते हैं जबकि बड़े-बड़े रेस्टोरेंट में आसानी से बड़े-बड़े बिल अदा कर देते हैं. ऐसे में हम गरीब से मोल-भाव करते हैं, जो कि उसे पीड़ा पहुंचाती होगी. वास्तव में इन दो-चार रुपए से आपके जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ता होगा लेकिन इससे गरीब के जीवन पर असर पड़ता है. पीएम मोदी ने अपर्णा का इस ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए आभार प्रकट किया. दूसरी ओर समाज और देश में गलत माहौल पैदा करने वालों को भी चेतावनी देते हुए पीएम ने कहा कि हमारा देश अहिंसा परमो धर्म को मानने वाला देश है. यह महात्मा गांधी और सरदार पटेल का देश है. बाबा साहेब को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनके बनाए संविधान के अनुसार ही देश चल सकता है. ऐसे में कोई भी कानून से ऊपर नहीं हो सकता.
ध्यानचंद के जन्मदिवस को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिये लोगों को संबोधित करते हुए बताया कि पटियाला स्थित राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) सहित सारे देशभर में १२ बड़े केंद्रों और ५० से ज्यादा छोटे केंद्रों का संचालन करता है, जहां हजारों की संख्या में खिलाड़ी प्रशिक्षण लेते हैं. हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद के जन्मदिन २९ अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है. राष्ट्रपति इसी दिन हर वर्ष खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाडिय़ों को अर्जुन अवॉर्ड और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित करते हैं.
मन की बातबनी आकाशवाणी के लिए धन की बात : रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम से एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी साधारण से साधारण मुद्दों पर देश के लोगों से बात करते हैं और उनके विचार जानते हैं, वहीं यह कार्यक्रम ऑल इंडिया रेडियो के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है. आकाशवाणी ने पिछले दो साल के भीतर इस कार्यक्रम के माध्यम से १० करोड़ रुपए की कमाई अर्जित की है. सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री कर्नल राज्यवद्ध्र्रन सिंह राठौड़ ने लोकसभा में लिखित उत्तर में इस बात की जानकारी दी. उन्होंने सदन को बताया कि साल २०१६-१७ में इस कार्यक्रम के माध्यम से रेडियो को ५.१९ करोड़ और इससे पहले साल ४.७८ करोड़ का राजस्व हासिल किया. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम से रेडियो के दिन फिर से सुधरने लगे हैं. इंटरनेट और शॉर्ट वेब ट्रांसमीटर के माध्यम से यह कार्यक्रम विदेशों में भी लोकप्रिय हो रहा है.
तनाव से दूर रहने का दिया गुरुमंत्र : प्रधानमंत्री ने बताया अंक के ऊपर ज्ञान को क्यों महत्व दिया जाए और भविष्य के लिए कैसे जिम्मेदारी का वहन किया जाए. मन की बात को अच्छी प्रतिक्रिया के बाद प्रधानमंत्री के मन में इस पुस्तक को लिखने का विचार आया. उन विचारों को एकत्रित करने और कुछ नए विचारों के साथ इन्हें पुस्तकाकार रूप देने का निर्णय किया. पैंग्वीन रैंडम हाउस के सीईओ गौरव श्रीनागेश ने कहा कि हम प्रधानमंत्री के विचारों को प्रकाशित करके हर्षित हो रहे हैं ताकि युवाओं के बारे में उनके संदेश को देश में पहुंचाया जा सके. पीआरएच के वाणिज्यिक एवं कारोबार प्रकोष्ठ की एडिटर इन चीफ मिली ऐश्वर्या ने कहा कि यह विरले देखी जाने वाली और अनोखी पहल है कि प्रधानमंत्री ने छात्रों की स्थिति को सीधे संबोधित करने का निर्णय किया है. हम इस पहल का हिस्सा बनकर गौरवान्वित हैं.
विविधता ही भारत की ताकत : मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में कहा, रमजान माह को बेहद भक्ति भाव से मनाया गया. अब यह ईद का समय है. ईद-उल-फितर के मौके पर सभी को मेरी शुभकामनाएं. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की विविधता ही उसकी विशेषता और ताकत है. विविधता के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का भी जिक्र किया जो देश के साथ ही दुनिया के कई हिस्सों में पूरे भक्तिभाव और धार्मिक उत्साह के साथ निकाली जा रही है. ३० मिनट के कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, मैं देशवासियों को जगन्नाथ यात्रा के मौके पर बधाई देता हूं. मोदी ने कहा, देश के गरीब लोग भगवान जगन्नाथ से जुड़ेे हैं, जिन लोगों ने बाबा साहेब आंबेडकर को पढ़ा है उन्होंने देखा होगा कि वह भगवान जगन्नाथ मंदिर और उसकी परंपराओं की प्रशंसा करते थे क्योंकि इसमें सामाजिक न्याय और सामाजिक सौहाद्र्र जुड़ा था. इस संदर्भ में उन्होंने शब्द जगरनॉट का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मतलब ऐसा रथ है जिसे किसी के द्वारा रोका नहीं जा सके.
स्वच्छ भारत अभियान : स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा देने में जुटे प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम को पूरा करने के लिए सतत और दीर्घकालिक प्रयासों की जरूरत है. उन्होंने कहा, ऐसी बुरी आदतें (खुले में शौच की) हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गयी हैं. इनसे छुटकारा पाने के लिए हमें दृढ़ रहना होगा. हमें हर किसी का ध्यान खींचना होगा. सकारात्मक और प्रेरक कहानियों को बार-बार बताना होगा. इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी खुशी जाहिर की कि स्वच्छता अब सिर्फ सरकार का कार्यक्रम नहीं है बल्कि जन आंदोलन बन चुका है. उन्होंने कहा कि इसने सरकार के संकल्प को मजबूत किया है. इस संदर्भ में प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के हाल के एक मामले का उल्लेख किया जहां लोगों और प्रशासन ने लगातार १०० घंटों तक बिना रुके काम कर ७१ गांवों के १०,००० घरों में घरेलू शौचालय बनाये. कूड़ा प्रबंधन के भागीदार बनें पीएम मोदी ने देशवासियों से कूड़़ा प्रबंधन में भागीदार बनने की अपील की. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के सहयोग से जनप्रतिनिधियों की मदद से कूड़ा प्रबंधन का महत्वपूर्ण अभियान छेडऩा तय किया है. विश्व पर्यावरण दिवस पर देश के चार हजार नगरों में सॉलिड और लिक्विड वेस्ट को कलेक्ट करने के लिए हरे व नीले रंग के कूड़ेदान उपलब्ध होंगे. कूड़े को कूड़े के तौर पर देखना बंद करें.
बुके नहीं बुक देने की आदत डालें : कार्यक्रम में डॉक्टर अनिल सोनारा का फोन कॉल सुनाया गया, जिसमें वे कह रहे थे-प्रधानमंत्री जी, आपने केरल में कहा था कि हमें बुके के बजाय अच्छी किताबें (बुक) देकर हमें लोगों का स्वागत करना चाहिए. इस पर पीएम मोदी ने कहा, जब मैं गुजरात में था तो सरकार में एक परंपरा शुरू की थी कि हम बुके नहीं देंगे, हम बुक देंगे या खादी का रूमाल देंगे. दिल्ली आने के बाद मेरी आदत छूट गई थी, लेकिन केरल जाने के बाद ये बातें फिर से याद आ गईं, मैं लोगों से इसे अपनाने की अपील करता हूं. उन्होंने कहा, मैं पिछले साल जब यूके गया था तो लंदन में क्वीन एलिजाबेथ ने मुझे भोजन पर बुलाया था. उन्होंने बाद में मुझे खादी से बना हैंडकरचीफ दिखाया. उन्होंने बताया कि वह उन्हें शादी के समय गांधीजी ने भेजा था.
खुले में शौच मुक्त होने वाले राज्यों को बधाई : पीएम मोदी ने खुले में शौच मुक्त होने वाले राज्यों को बधाई दी. कहा-हम जानते हैं कि देश में सिक्किम, हिमाचल और केरल खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं. इस उदाहरण के जरिए पीएम मोदी ने देश के दूसरे राज्यों में रह रहे लोगों से भी खुले में शौच खत्म करने की अपील की. पीएम ने कहा, हम भली-भांति जानते हैं कि व्यक्ति के जीवन में समाज में अच्छा करने में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. हैंडराइटिंग भी ठीक करनी हो तो लम्बा अभ्यास करना होता है. खुले में शौच भी ऐसी ही आदत है, जो धीरे-धीरे जाएगी. पीएम ने कहा कि स्वच्छता सरकार का कार्यक्रम नहीं है यह जन अभियान बनता जा रहा है.
पहली बार बारिश में योग का अनुभव : पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में विश्व योग दिवस का भी जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा, २१ जून, २०१७ को पूरा विश्व योगमय हो गया. पानी से पर्वत तक लोगों ने इसका स्वागत योग से किया. चीन की दीवार और पेरू में २४०० मीटर माचू पिच्चू पर योग किया. अबुधाबी में ४००० से ज्यादा लोगों ने सलमा बांध पर योग करके भारत की दोस्ती को नया आयाम दिया. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती दोनों की गारंटी, तन, मन, शरीर, विचार और आचार से स्वस्थता की अंतर्यात्रा का अनुभव योग के माध्यम से संभव है. योग के जरिए विश्व को एकसूत्र में हम जोड़ चुके हैं. जैसे योग शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा को जोड़ता है, वैसे ही आज योग विश्व को जोड़ रहा है. कैसे लोगों के उद्यमिता कौशल को पारदर्शी तरीके से देश में किसी के द्वारा भी बढ़ाया जा सकता है. मोदी ने देशभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन की भी सराहना की. प्रधानमंत्री ने इसरो के सफल उपग्रह प्रक्षेपण की भी सराहना की.
वाजपेयी की कविता से इमरजेंसी को किया याद : पीएम ने कहा, श्री प्रकाश त्रिपाठी ने २५ जून, १९७५ को वह काली रात बताया है, जिसे कोई भी लोकतंत्र प्रेमी कभी नहीं भूल सकता. यह हर भारतीय के जेहन में है. उस दौरान पूरे देश को जेलखाने में बदल दिया गया था. इसका विरोध करने वालों को जेल में डाल दिया गया था. इमरजेंसी को कोई भूल नहीं सकता. मन की बात में पहले भी प्रधानमंत्री कई बार खेल और खिलाडिय़ों का जिक्र करते रहे हैं. पिछली बार उन्होंने विश्व कप के फाइनल में पहुंचने पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तारीफ की थी. उन्होंने कहा था कि मिताली राज की इस टीम को हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पूरे देश को उनकी उपलब्धि पर गर्व है.
पीएम नरेन्द्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में इमरजेंसी के दिनों को दर्शाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता को पढ़ा.
सवा-सौ करोड़ देशवासियों पर जताया गर्व : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश-दुनिया के मुसलमानों को रमजान की मुबारकबाद देते हुए मन की बात कार्यक्रम की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि रमजान का पवित्र महीना शांति, एकता को बढ़ावा देने में सहायक होगा. हम सवा-सौ करोड़ देशवासी इस बात का गर्व कर सकते हैं कि दुनिया के सभी संप्रदाय भारत में मौजूद हैं. हर प्रकार की विचारधारा, हर प्रकार की पूजा पद्धति, हर प्रकार की परम्परा, हम लोगों ने एक साथ जीने की कला आत्मसात की है.
वीर सावरकर को किया याद : प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘‘आज वीर सावरकर की जन्म जयंती है. वे अंडमान में कैद थे. सेलुलर जेल को काला पानी क्यों कहा जाता था, ये वहां जाकर ही पता चलता है. वो आजादी का तीर्थ है. आज हम आजाद हिंदुस्तान में इसलिए सांस ले रहे हैं क्योंकि शहीदों ने आंदोलन चलाया. वीर सावरकर जेल की दीवारों पर लिखते थे. हिंदुस्तान का कोई भाषा बोलने वाला शख्स ऐसा नहीं रहा होगा जो सेलुलर जेल में न रहा हो.’’
आलोचना करने वालों का शुक्रिया : केंद्र में पीएम मोदी की अगुवाई में बीजेपी सरकार के तीन साल पूरे हो चुके. इसके उपलक्ष्य में सरकार अपने कामों का प्रचार अखबारों, टीवी चैनलों में कर रही है. इस पर कुछ लोग ऐतराज भी जता रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि उन लोगों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने गहराई से आलोचना की और महत्वपूर्ण फीडबैक दिए.
विश्व पर्यावरण दिवस को सफल बनाएं : पीएम मोदी ने कहा कि ५ जून को प्रकृति के साथ जुडऩे का वैश्विक अभियान, हमारा स्वयं का भी अभियान बनना चाहिए. वेदों में पृथ्वी और पर्यावरण को शक्ति का मूल माना गया है. हमारे यहां कहा गया है- माता भूमि: पुत्रो अहम् पृथिव्या: अर्थात् जो शुद्धता है, वह हमारी पृथ्वी के कारण है.
युवाओं की चिंता : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के युवाओं से कंफर्ट जोनसे बाहर निकलने का आह्वान करते हुए कहा कि स्पर्धा के इस दौर में कभी-कभार ऐसा लगता है कि युवा पीढ़ी रोबोट तो नहीं बन रही है. पीएम मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बातमें कहा, ‘‘नौजवान दोस्तों, कुछ बातें मैं आपके साथ भी करना चाहता हूं. मुझे कभी-कभी चिंता होती है कि हमारी युवा पीढ़ी में कई लोगों को कंफर्ट जोन में जीने में मजा आता है. मां-बाप भी एक रक्षात्मक अवस्था में ही उनका लालन-पालन करते हैं. कुछ लोग अलग होते हैं, लेकिन ज्यादातर कंफर्ट जोन वाले नजर आते हैं. ’’
पीएम मोदी ने कहा, ‘‘मुझे इस बात की चिंता हो रही है कि प्रौद्योगिकी दूरियां खत्म करने के लिए आई, लेकिन देखा जा रहा है कि एक ही कमरे में घर के छह लोग बैठे हैं और दूरियां इतनी हैं कि कल्पना नहीं की जा सकती. इतनी दूरियां क्यों हैं? सामूहिकता एक संस्कार है और सामूहिकता एक शक्ति है.’’
दिमाग से भी जाए लाल बत्ती : पीएम मोदी ने गाडिय़ों से लाल बत्ती हटाने के फैसले पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि लाल बत्ती लोगों के दिमाग से भी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि हम देश के सेवक हैं फिर देशवासियों से दूरी क्यूं?
रामानुजाचार्य को किया याद : पीएम मोदी ने कहा कि इस वर्ष संत रामानुजाचार्य की १०००वीं जयंती है. हमें उस समय के समाज के बारे में सोचना चाहिए. पीएम ने कहा कि रामानुजाचार्य जी ने समाज की बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ी. उन्होंने अपने आचरण द्वारा लोगों में अपनी जगह बनाई. तब अछूत कहे जाने वालों को गले लगाया. मंदिर प्रवेश के लिए आंदोलन किए. उन्होंने कहा कि भारत सरकार उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी करेगी.
श्रमिक दिवस पर बाबा साहब को किया स्मरण : पीएम ने कहा कि १ मई को श्रमिक दिवस के रूप में भी बनाया जाता है. पीएम ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर की याद आती है. श्रमिकों के कल्याण के लिए उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता है. जगत गुरु बश्वेश्वर ने भी श्रम श्रमिक पर गहन विचार रखे थे. उन्होंने कहा था कि अपने घर पर परिश्रम से भगवान प्राप्त होते हैं. उन्होंने कहा था कि श्रम ही ईश्वर है. पीएम ने दत्तोपंत ठेंगड़ी पर कहा कि उन्होंने मजदूरों को एक किया. ये दुनिया को एक करने के लिए जरूरी है. पीएम नरेन्द्र मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा का जिक्र करते हुए कहा कि बुद्ध के विचार आज भी प्रासंगिक हैं.
सरदार वल्लभ भाई पटेल व पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का स्मरण : प्रधानमंत्री ने पंजाब के जसमीत का संदेश सुनवाया, जिसमें उन्होंने पटेल को लेकर बात की थी. जसमीत का सवाल था कि श्रीमती गांधी की हत्या के बाद जिस तरह की घटनाएं हुईं, ऐसी घटनाओं को कैसे रोकें? प्रधानमंत्री ने कहा कि ये पीड़ा एक व्यक्ति की नहीं है. एक सरदार, सरदार वल्लभ भाई पटेल, इतिहास इस बात का गवाह है कि चाणक्य के बाद, देश को एक करने का भगीरथ काम, सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया. आजाद हिंदुस्तान को, एक झंडे के नीचे लाने का सफल प्रयास, इतना बड़ा भगीरथ काम जिस महापुरुष ने किया, उस महापुरुष को शत-शत नमन.
दीवाली की शृंखला में कार्तिक पूर्णिमा : प्रधानमंत्री ने बताया कि ये प्रकाश उत्सव का भी एक विशेष पर्व है. गुरु नानक देव, उनकी शिक्षा-दीक्षा पूरी मानव-जाति के लिए, न सिर्फ हिंदुस्तान के लिए, पूरी मानव-जाति के लिए, आज भी पथ प्रदर्शक है. उन्होंने कहा कि सेवा, सच्चाई और सरबत दा भला, यही तो गुरु नानक देव का संदेश था. शांति, एकता और सद्भावना यही तो मूल-मंत्र था. भेदभाव, अंधविश्वास, कुरीतियां.. उससे समाज को मुक्ति दिलाने का अभियान ही तो था गुरु नानक देव की हर बात में. प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हमारे यहां अस्पृश्यता, जाति-प्रथा, ऊंच-नीच, इसकी विकृति की चरम सीमा पर थी, तब गुरु नानक देव ने भाई लालो को अपना सहयोगी चुना. आइए, हम भी, गुरु नानक देव ने जो हमें ज्ञान का प्रकाश दिया है, जो हमें भेदभाव छोडऩे के लिए प्रेरणा देता है, भेदभाव के खिलाफ कुछ करने के लिए आदेश करता है, सबका साथ सबका विकास इसी मंत्र को ले करके अगर आगे चलना है, तो गुरु नानक देव से बेहतर हमारा मार्गदर्शक कौन हो सकता है. मैं गुरु नानक देव को अन्तर्मन से प्रणाम करता हूं.
गौरतलब है कि पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम में हर नए अवसर पर देश की जनता को नए विषय पर विशेष संदेश लेकर देश की जनता को संबोधित किया है. वह अपने इस कार्यक्रम में हर बार आम व्यक्ति से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण गतिविधि को केंद्रित करते हैं और इसके लिए सभी देशवासियों से विषय और सुझाव आमंत्रित करते हैं. वह देशवासियों की टिप्पणियों को अपने इस लोकप्रिय कार्यक्रम में शामिल भी करते हैं. प्रधानमंत्री की यह कला इस कार्यक्रम को लोकप्रिय बनाने में एक विशेष महत्व रखती है.
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)
चित्र: गूगल के सौजन्य से