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वस्त्र उद्योग के लिये पैकेज से रोजगार के अवसाओं में तेजी आयेगी: फिक्की

 सरकार ने हाल में वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र को वैश्विक बाज़ार में अपनी व्यापक हिस्सेदारी पुन: हासिल करने में मदद के लिये रुपये6000 करोड़ के पैकेज की घोषणा की. पैकेज में इस क्षेत्र के लिये अधिक लचीले श्रम कानून और वित्तीय प्रोत्साहनों का भी प्रावधान है. यह आशा की जाती है कि पैकेज से अगले तीन वर्षों में एक करोड़ नये रोजग़ार सृजित होंगे, रुपये 74000 करोड़ का निवेश आकर्षित होगा और 30 अरब अमरीकी डॉलर की निर्यात आय अर्जित होगी.

मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली ने कहा कि ‘‘पैकेज से वस्त्र और परिधान क्षेत्र में रोजग़ार सृजन की वास्तविक क्षमता के दोहन में सहायता मिलेगी. पैकेज का ज़ोर इसे श्रम-सघन उद्योग लागत प्रतिस्पर्धी बनाना और उस पैमाने की अर्थव्यवस्था को हासिल करना है जिससे इसकी वैश्विक बाज़ार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने में मदद हो सके. वस्त्र सचिव सुश्री रश्मि वर्मा ने कहा, ‘‘यदि हम पैकेज को सही प्रकार से लागू करते हैं तो अगले तीन वर्षों के भीतर गारमेंट निर्यात में हम वियतनाम और बंगलादेश से आगे निकल जायेंगे’’.

वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में रोजग़ार के सृजन और निर्यात प्रोत्साहन के लिये विशेष पैकेज के अनुमोदन पर टिप्पणी करते हुए फिक्की की वस्त्र समिति के अध्यक्ष, शिशिर जयपुरिया ने कहा कि समिति विशेष पैकेज का स्वागत करती है जिससे वस्त्र उद्योग से जुड़े मुद्दों का व्यापक हल हो सकेगा.

भारत का वस्त्र और परिधान निर्यात कऱीब 40 अरब अमरीकी डॉलर का है. भारत प्रचुर मात्रा में श्रम और फाइबर से फैब्रिक तक की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला होने के बावजूद निर्यात में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने के वास्ते चीन में बढ़ती मज़दूरी का फायदा उठा पाने में सक्षम नहीं रहा है.

श्री जयपुरिया ने कहा कि ‘‘ये समय अनुरूप है और देश में मूल्यवद्र्धन तथा रोजग़ार को अत्यधिक अपेक्षित प्रोत्साहन प्रदान करेगा.‘‘

उन्होंने आगे कहा कि गारमेंट उद्योग को लचीलापन प्रदान करने का प्रस्ताव, जो कि विभिन्न श्रम कानूनों के अधीन मौसमी प्रकृति का है, उद्योग को समय पर अपने आर्डर पूरा करने और प्रतिस्पर्धी बनने के लिये भी सहायता करेगा. उन्होंने कहा कि यह व्यापक निवेश को आकर्षित करेगा और इससे क्षेत्र में, विशेषकर महिलाओं के लिये, रोजग़ार के अधिक अवसर सृजित होंगे.‘‘

 

उन्होंने आगे कहा कि, ‘‘चूंकि भारतीय वस्त्र और गारमेंट उद्योग को वैश्विक बाज़ार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, सरकारी राहत पैकेज एक राहत के तौर पर आया है और उन्हें वैश्विक बाज़ारों में अधिक प्रतिस्पर्धा हासिल करने में सहायता होगी जहां हमें अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी, जो शुल्क मुक्त व्यवस्था का लाभ ले रहे हैं.‘‘ फिक्की ने कहा है कि इस पैकेज से क्षेत्र को मज़बूती मिलेगी जो कि एक उच्च रोजग़ार सृजक क्षेत्र है और वस्त्र मूल्य श्रृंखला का एक मूल्यवद्र्धित खण्ड है.