विशेष लेख


volume-37,15-21 December 2018

 

जी-२०: तथ्यों पर एक नज़र

जी-२० के सदस्यों में कौन शामिल हंै?

अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपीय संघ, जर्मनी, फ्रांस, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमरीका.

जी-20 के सदस्य सामूहिक रूप से किसका प्रतिनिधित्व करते हैं?

सामूहिक रूप में, जी-20 सदस्य देशों की वैश्विक आर्थिक उत्पादन में 85 प्रतिशत, विश्व की जनसंख्या में दो तिहाई और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

जी-20 राष्ट्र क्या करते हैं?

जी-20 वैश्विक मामलों पर वार्ता के लिए अपने सदस्यों, मेहमान देशों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और सम्बद्ध समूहों को बैठक में बुलाता है. अनेक विशेषज्ञतापूर्ण बैठकों में विभिन्न मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए यह संगठन ऐसी वैश्विक नीतियां विकसित करने के बारे में आम सहमति तैयार करता है, जो मानवता के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों का समाधान कर सकें.

जी-20 का मुख्यालय कहां है?

जी-20 का तो कोई मुख्यालय है और ही स्थायी स्टाफ  है. सभी संगठनात्मक और लॉजिस्टिक प्रबंध उस राष्ट्र द्वारा संचालित किए जाते हैं, जहां बैठकें होती हैं और जो वर्तमान में संगठन की अध्यक्षता कर रहा होता है.

एक मंच के रूप में जी-20 के क्या फायदे हैं?

इस संगठन के मात्र 20 आधिकारिक सदस्य हैं. यह संगठन नई चुनौतियों का समाधान करने के लिए तत्काल निर्णय लेने में काफी सक्षम है. इसके सदस्यों में सभी महाद्वीपों सेे विकसित और विकासशील, दोनों तरह की अर्थव्यवस्था वाले देश शामिल हैं, जो इसे वैश्विक प्रतिनिधित्व की दृष्टि से पर्याप्त आकार प्रदान करते हैं और दुनिया का सर्वाधिक प्रभावशाली वैश्विक मंच बनाते हैं. हर वर्ष आमंत्रित देशों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और सिविल सोसायटी समूहों को प्रतिभागी समूहों के रूप में बुलाया जाता है ताकि वैश्विक चुनौतियों का मूल्यांकन करने और उनके समाधान के लिए आम सहमति बनाने में अधिक व्यापक परिदृश्य का इस्तेमाल किया जा सके.

जी-20 का क्या प्रभाव है?

जी-20 वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में सहयोग के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मंचों में से एक है. इसकी बैठकों में दुनिया की सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण स्थितियों पर विचार किया जाता है और समुचित वैश्विक नीतिगत उपायों में समन्वय किया जाता है. आज के उभरते हुए भू-राजनीतिक वातावरण के संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है, जो जी-20 को और भी अधिक प्रासंगिक बनाता है. जी-20 यह भी सुनिश्चित करता है कि वैश्विक मामलों में विकासशील देशों की अधिक महत्वपूर्ण भूमिका हो.

जी-20 की अब तक की प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं: 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान आपात वित्त पोषण की शीघ्र व्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों का बहिष्कार, राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की चौकसी में सुधार, बाजारों में ऐसे वित्तीय नियामक निकायों की गुणवत्ता में सुधार लाना, जिनकी राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के कारण संकट पैदा हुआ हो, और भविष्य में ऐसे संकटों का प्रसार रोकने के लिए वैश्विक सुरक्षा नेटवर्क का निर्माण करना.

जी-20 की स्थापना क्यों की गई?

जी-20 की परिकल्पना 1999 में 7 देशों के समूह (जी-7) के वित्तीय मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर की बैठक में की गई थी. यह बैठक 1997 के एशियाई वित्तीय संकट को देखते हुए आयोजित की गई थी. इसमें एक ऐसे व्यापक और अधिक प्रतिनिधित्व वाले संगठन की आवश्यकता महसूस की गई, जो विश्व की अधिक एकीकृत अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली चुनौतियों का समाधान कर सके. उन्होंने यह निर्णय किया कि प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के नए मंच के रूप में आमंत्रित किया जाए, ताकि वैश्विक मौद्रिक और वित्तीय मुद्दों पर विचार विमर्श किया जा सके. बाद में यह संगठन जी-20 बन गया.

2008 के वित्तीय संकट के प्रारंभ होने के साथ ही जी-20 वैश्विक वित्तीय अनिश्चितता को संकट से उभारने की एक पद्धति के रूप में सामने आया और इस तरह एक सर्वोच्च राजनीतिक मंच की आवश्यकता महसूस हुई. उसके बाद से जी-20 की बैठकों में राष्ट्राध्यक्षों या शासनाध्यक्षों द्वारा हिस्सा लिया जाने लगा.

जी-20 किस तरह के मुद्दों का समाधान करता है?

जी-20 वैश्विक महत्व के व्यापक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है. यद्यपि वैश्विक अर्थव्यवस्था संबंधी मुद्दे इसकी कार्यसूची में मुख्य रूप से शामिल किए जाते हैं, फिर भी हाल के वर्षों में अतिरिक्त मद अधिक महत्वपूर्ण होते गए हैं. परंपरागत रूप में वैश्विक अर्थव्यवस्था वित्तीय बाजार, कर और राजकोषीय नीति, व्यापार, कृषि, रोज़गार, ऊर्जा और भ्रष्टाचार के खिलाफ  संघर्ष जैसे मुद्दे बहस में केंद्रीय होते हैं. अद्यतन कार्यसूची के अन्य तत्वों मे रोज़गार बाजार में महिलाओं की प्रगति, स्थायी विकास के लिए 2030 का एजेंडा, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक स्वास्थ्य, आतंकवाद प्रतिरोध और समावेशी उद्यमिता जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं.

जी-20 सदस्य देशों के अतिरिक्त इस संगठन की बैठक में और कौन हिस्सा लेते हैं?

स्पेन एक स्थायी आमंत्रित सदस्य है और 2008 से नियमित रूप से जी-20 की बैठक में हिस्सा ले रहा है. हर वर्ष मेजबान राष्ट्र अपने विवेकाधिकार से अनेक अतिरिक्त राष्ट्रों को आमंत्रित करता है. 2018 के लिए जी-20 के अध्यक्ष मोरिसियो मैक्राई ने चिली और नीदरलैंड्स को आमंत्रित किया.

प्रमुख क्षेत्रीय संगठनों को बैठक में हिस्सा लेने के लिए विशेष रूप से बुलाया जाता है और उनका प्रतिनिधित्व अध्यक्ष राष्ट्र द्वारा किया जाता है. नियमित रूप से आमंत्रित किए जा रहे संगठनों में अफ्रीकी संघ, दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन-आसियान और अफ्रीका के विकास के लिए नई भागीदारी जैसे कुछ उदाहरण शामिल हैं. जी-20 2018 के लिए इसके अध्यक्ष मोरिसियो मैक्राई ने कैरिबियाई समुदाय को आमंत्रित किया, जिसका प्रतिनिधित्व जमैका ने किया.

अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी जी-20 की बैठकों में हिस्सा लेते हैं. नियमित रूप से हिस्सा लेने वाले अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में वित्तीय स्थिरता बोर्ड, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन, संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन शामिल हैं. 2018 के जी-20 सम्मेलन के लिए इसके अध्यक्ष मोरिसियो मैक्राई ने इंटर-अमरीकन डिवेेलेपमेंट बैंक और डिवेलेपमेंट बैंक ऑफ  लेटिन अमरीका को भी आमंत्रित किया.

जी-20 की अध्यक्षता का क्या अर्थ है?

जी-20 सदस्यों द्वारा एक राष्ट्र का चयन किया जाता है, जो एक वर्ष के लिए संगठन की अध्यक्षता संभालता है. अध्यक्ष राष्ट्र बैठकों का आयोजन और मेजबानी करता है, विचारणीय प्राथमिकताओं की कार्य सूची बनाता है और अपने विवेकाधिकार के अनुसार अतिरिक्त प्रतिभागियों को आमंत्रित करता है. जी-20 का कोई स्थाई सचिवालय नहीं है. संगठन की सक्षमता के लिए अध्यक्ष राष्ट्र की भूमिका महत्वपूर्ण है.

जी-20 के अध्यक्ष राष्ट्र का चयन कैसे होता है?

जी-20 की अध्यक्षता इसके सदस्य राष्ट्रों के बीच बारी बारी से तय की जाती है. 19 देशों को 5 समूहों में विभाजित किया गया है, जिनमें से किसी भी समूह में 4 से अधिक राष्ट्र नहीं हैं. देशों के समूह मुख्य रूप से क्षेत्रीय आधार पर बनए गए हैं. अध्यक्षता बारी बारी से प्रत्येक समूह के राष्ट्रों द्वारा की जाती है. हर वर्ष जी-20 अन्य समूह से देश का चयन अध्यक्ष के लिए करता है.

जी-20 देशों के समूह इस प्रकार हैं:

समूह-1  : आस्ट्रेलिया, कनाडा, सऊदी अरब, अमरीका

समूह-2 : भारत, रूस, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की

समूह-3 : अर्जेंटीना, ब्राजील, मैक्सिको

समूह-4  : फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन

समूह-5  : चीन, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया.

2018 में अर्जेंटीना द्वारा जी-20 की अध्यक्षता किए जाने के साथ ही 19 में से 13 राष्ट्र जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर चुके हैं.

2018 जी-20 में कौन से मेहमान राष्ट्र और संगठन हिस्सा ले रहे हैं:

जी समूह के मेहमान देशों में स्पेन (स्थायी आमंत्रित), चिली और नीदरलैंड्स, तथा क्षेत्रीय संगठनों की ओर से सिंगापुर (आसियान), जमैका (सीएआरआईसीओएम), रवांडा (अफ्रीकन यूनियन), और सेनेगल (एनईपीएडी) शामिल हैं. जी-20 के अध्यक्ष अर्जेंटीना ने इंटर-अमरीकन डिवेलेपमेंट बैंक (आईडीबी) और डिवेलेपमेंट बैंक ऑफ  लैटिन अमरीका (सीएएफ) को भी आमंत्रित किया.

अर्जेंटीना को जी-20 का अध्यक्ष बनाने का क्या उद्देश्य था?

अर्जेंटीना को अध्यक्ष बनाने के पीछे जी-20 में लैटिन अमरीकी परिप्रेक्ष्य को शामिल करने का लक्ष्य था. अर्जेंटीना सम्मेलन के दौरान विश्व की प्रमुख शक्तियों के बीच निष्पक्ष और स्थायी विकास के बारे में आम सहमति तैयार करने का प्रयास किया गया ताकि सभी लोगों के लिए समान अवसर पैदा किए जा सकें. ऐसा करना लैटिन अमरीकी देशों की आकांक्षाओं और चिंताओं के अनुरूप था, ताकि इस क्षेत्र की व्यापक आर्थिक क्षमता का दोहन किया जा सके और गरीबी उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ा जा सके.जी-20 के अध्यक्ष के रूप में अर्जेंटीना की कार्यसूची विषयक प्राथमिकताएं क्या रहीं?इस सम्मेलन में रोज़गार के भविष्य, विकास के लिए ढांचा और भोजन की दृष्टि से स्थायी भविष्य पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया.

अर्जेंटीना ने जी-20 की बैठकों का आयोजन कहां पर किया?

अर्जेंटीना में जी-20 की बैठकों का आयोजन देशभर में किया गया. इनमें ब्यूनस आइरस और ब्यूनस आइरस के प्रांत, कोर्डोबा, जुजूय, मेंडोज़ा, मिशिअंस, रियो नेग्रो, साल्टा, सांता फी और टिएरा डेल फ्यूगो शामिल थे.

अर्जेंटीना के बाद जी-20 की बैठक का आयोजन कौन करेगा?

जापान २०१९ में और सऊदी अरब 2020 में जी-20 की बैठकें आयोजित करेंगे. इनमें से कोई भी देश पहले जी-20 का अध्यक्ष नहीं रहा है.