विशेष लेख


Special article vol.31

भारत की शिक्षा-चुनौतियों का उत्तर-ऑनलाइन शिक्षा

डॉ. पूर्वी प्रकाश

रवीन्द्र नाथ ठाकुर ने एक बार कहा था, ‘‘किसी बच्चे को अपने निजी अध्ययन की सीमा से नहीं बांधें, क्योंकि उसका जन्म दूसरी पीढ़ी में हुआ है,’’ और उनका यह कथन कितना सही है! भारतीय शिक्षा प्रणाली में व्यापक परिवर्तन आया है। अब हमारे पास आई.आई.टी., आई.आई.एम., विधि-स्कूल तथा कई अन्य उत्कृष्ट संस्थाएं हैं। आजकल 90 प्रतिशत अंक प्राप्त करना छात्रों में एक मानदण्ड बन गया है और अपनी पसंद के कॉलेज में प्रवेश लेना उनके लिए निरंतर कठिन बनता जा रहा है। परम्परागत शिक्षा ने आज भी हमें बांध रखा है। छात्रों का लक्ष्य अब भी नहीं बदला है। हमेशा की तरह, वे स्कूल स्तर से लेकर आई.आई.टी. जे..., .आई.आई.एम.एस. या सी.एल..टी. तक केवल अधिक से अधिक अंक लेने के लिए पढ़ाई करते हैं। यह, यह आभास करने का समय है कि माता-पिता की जीवन-भर की बचत को  या उधार ली गई राशि को शिक्षा पर फूंकना इस लक्ष्य का आश्वासन नहीं देता कि किसी को उसकी पसंद का कॅरिअर या रोजग़ार मिल जाएगा। ऑनलाइन अध्यापन, विभिन्न शिक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने और देश में नई शिक्षा प्रवृत्ति लागू करने का श्रेष्ठ तथा अत्यधिक लागत-प्रभावी उपाय है। कुछ ऐसे उपाय नीचे दिए गए हैं जो भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक विशिष्टता ला रहे हैं:-

ऑनलाइन कौशल प्रशिक्षण:

छात्र विभिन्न अध्ययन लक्ष्य वाले विभिन्न वर्गों के होते हैं। जो छात्र एक अच्छा रोजग़ार प्राप्त करने और अच्छा वेतन अर्जित करने में सक्षम होने के लिए पढ़ाई कर रहे हैं वे किसी ऐसी सूचना को रटने, जिसकी उन्हें भविष्य में शायद ही आवश्यकता हो या उसे वे शायद ही याद रख सकें, की तुलना में कौशल प्रशिक्षण से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

इसे ध्यान में रखते हुए, कौशल विकास तथा उद्यम मंत्रालय ने, कौशल प्रदान करने के लिए जुलाई, 2016 में एक ऑनलाइन प्लेटफार्म प्रारंभ किया था। indiaskillsonline.com नामक वेबपोर्टल भारत सरकार के कौशल भारत अभियान का एक भाग है। इसका उद्देश्य, अगले चार वर्षों में एक करोड़ श्रमिकों को व्यावसायिक कौशल में प्रशिक्षित करना है। विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एन.एस.डी.सी.) में पंजीकृत उम्मीदवार पोर्टल के माध्यम से नि:शुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम प्राप्त करने और मोबाइल अनुप्रयोग के रूप में भी डाउनलोड करने में भी सक्षम होंगे।

पाठ्यक्रम के योग्यता पैक में शामिल कठोर कौशल के अतिरिक्त, यह पोर्टल कामगारों को ऐसे पाठ्यक्रम भी, जैसे भाषा, नवोद्यम, डिजिटल साक्षरता, शिल्प कौशल, क्षेत्रीय संस्कृतियों का ऑरिएंटेशन आदि भी देगा, जो उनकी रोजग़ार संभावनाएं बढ़ा सकते हैं। एन.एस.डी.सी. ने, 75० से भी अधिक ऑनलाइन पाठ्यक्रम नि:शुल्क देने में सक्षम होने के लिए शिल्प कौशल प्रशिक्षण प्रदाता अलीसन से एक सहयोग समझौता किया है।

अलीसन के सी... माइक फीरिक ने कहा, ‘‘पिछले वर्ष एन.एस.डी.सी. ने 27 मिलियन छात्रों को-अधिकांशत: ऑफलाइन प्रशिक्षित किया है। किंतु परियोजना का भावी पैमाना अब ऑनलाइन होगा।’’ उन्होंने यह भी कहा कि यह साइट ऐसे कामगारों को मध्य पूर्व सांस्कृतिक पाठ्यक्रम भी देगा, जो मध्य पूर्व देशों में कार्य करना चाहते हैं। यह, साइट की एक महत्वपूर्ण विशेषता है क्योंकि प्रति वर्ष लगभग एक मिलियन कामगार मध्य पूर्व देशों में जाते हैं।

अच्छे अध्यापकों की कमी को पूरा करना।

हाल ही में फेसबुक पर एक अत्यधिक लोकप्रिय वीडियो ने ग्रामीण स्कूलों तथा शहरी क्षेत्रों के छोटे स्कूलों के अध्यापकों को दिखाया था, जो एट (आठ) की स्पैलिंग, या वर्तमान प्रधानमंत्री का नाम या राज्य के मुख्यमंत्री का नाम आदि जैसे बुनियादी प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सके थे। ऐसे असक्षम अध्यापकों पर हमारी, भारतीय शिक्षा प्रणाली में पाबंदी है। अध्यापन कार्य को एक सुरक्षित, जोखिम रहित, कम तनाव वाले तथा एक अच्छे वेतन वाले कार्य के रूप में व्यापक सम्मान दिया जाता है। अध्यापक यदि अच्छा पढ़ाएं और उनके छात्र बेहतर प्रदर्शन करें तो उन्हें कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता। ऐसे खतरनाक अध्यापक प्रतिदिन अपना समय तथा अपने अधीन पढऩे वाले सभी युवा छात्रों का समय बर्बाद करते हैं।

ऑनलाइन अध्यापन उन महान अध्यापकों को प्रोत्साहन देने का अच्छा साधन बन सकता है जो अपने छात्रों में, अच्छी पढ़ाई कराने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके लेक्चर तथा अध्यापन को एक छोटी सी कक्षा तक सीमित नहीं रहने दिया जाना चाहिए। सही प्रौद्योगिकी अवसरंचनाओं की शक्ति के साथ, वे अब ‘‘वेतन भोगी व्यक्ति’’ के बदले एक अग्रज’ (लीडर) या उद्यमी के रूप में सेवा कर सकते हैं। बेहतर धन राशि एवं सम्मान प्राप्ति तथा अधिक छात्रों तक पहुंच बनाने के अवसर-अच्छे अध्यापकों को प्रोत्साहन देने और बेहतर करने की उनकी आकांक्षा को प्रेरित करने के श्रेष्ठ उपाय हैं।

शिक्षा को सबकी पहुंच में लाना।

ऐसे दूरवर्ती क्षेत्रों जहां कोई स्कूल या कॉलेज नहीं है या जहां अच्छे अध्यापक विभिन्न कारणों से रहना नहीं चाहते, वहां ऑनलाइन अध्यापन, विश्व श्रेणी की शिक्षा तक छात्रों की पहुंच बढ़ा सकता है। ईंट एवं गारे के कॉलेज तथा विश्वविद्यालय पर ध्यान देने के बदले हमें ऐसी शिक्षा दाता व्यवस्था का सृजन करने पर बल देने की आवश्यकता है जो अत्यधिक लागत-प्रभावी हो और अधिक शिक्षा प्राप्त करने में जनता की वास्तव में सहायता कर सके। तीव्र गति के इंटरनेट कनेक्शन तथा सस्ते कंप्यूटर, टैबलेट तथा स्मार्टफोन जैसे उपकरण शिक्षा-जगत को हमेशा के लिए बदल सकते हैं। चूंकि ऑनलाइन शिक्षा प्रसार पर है इसलिए आरक्षण अपनी प्रासंगिकता खो रहा है। कहीं से भी कोई भी व्यक्ति विश्वभर के उच्च विश्वविद्यालयों से विभिन्न पाठ्यक्रम चुन सकता है और चालू (लाइव) कक्षाओं में उपस्थित हो सकते हैं।

आंकड़े बताते हैं कि व्यापक मुक्त ऑनलाइन पाठ्यक्रमों (एम...सी.) के लिए भारत, अमरीका के बाद सबसे अधिक श्रोताओं का स्थान है। ये एम...सी. विश्व भर में छात्रों को श्रेष्ठ विश्वविद्यालय-स्तर के विषय वस्तु वाले नि:शुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम देते हैं। सभी भारतीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण वहन योग्य शिक्षा प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने 2014 में स्वयं’ (स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव-लर्निंग फोर यंग एस्पायरिंग माइंड्स) की घोषणा की। 2000 से भी अधिक पाठ्यक्रमों के साथ यह साइट शीघ्र ही प्रारंभ किए जाने की आशा है और इसका लक्ष्य प्रथम चरण में लगभग 3 करोड़ छात्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने का है। साथ ही साथ, लगभग 10 लाख प्रयोक्ता किसी भी समय, कहीं भी इस साइट पर जाने पर सक्षम होंगे। इस महत्वपूर्ण परियोजना की तैयारी पूरे जोरों पर है।

स्वयं प्लेटफार्म सभी विषयों में नौवीं से बारहवीं कक्षाओं, के पाठ्यक्रम और अधिस्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराएगा। भारत में केन्द्रीय निधि प्राप्त संस्थाओं जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आई.आई.टीज़), भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आई.आई.एम्स) और केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर इस प्लेटफार्म के माध्यम से ऑनलाइन पाठ्यक्रम देंगे। यह प्लेटफार्म, एक ही स्थान पर परस्पर संबद्ध इलेक्ट्रॉनिक अध्ययन संसाधन का विश्व का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी.) पहले ही घोषणा कर चुका है कि यू.जी.सी. (स्वयं के माध्यम से ऑनलाइन अध्ययन पाठ्यक्रम के लिए क्रेडिट फ्रेमवर्क) विनियम, 2016 के अंतर्गत ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से अर्जित क्रेडिट के अंतरण को मूल संस्था में छात्र के शैक्षिक रिकॉर्ड में प्रोद्भुत कर दिया जाएगा। स्वयं से खुली शिक्षा पर आधारित एक भारतीय खुला स्रोत प्लेटफार्म होने की प्रत्याशा थी, जो वही प्लेटफार्म है, जिसे शैक्षिक संगठन चलाते हैं। स्थानीय भारतीय विश्वविद्यालय स्वयं के एक रूपांतर का विस्तार कर सकते हैं और मिली-जुली कक्षाएं चलाने के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं।

शिक्षा का वैयक्तिकरण।

औपनिवेशिक दिनों से ही, भारतीय शिक्षा प्रणाली की रूपरेखा बाबू और क्लर्क देने की रही है। यही कारण यह है कि विश्व में भारत के इंजीनियरी स्नातकों की संख्या सबसे अधिक होने के बावजूद, हम पहल करनेमें एक अग्रणी शक्ति बनने में असफल रहे हैं। ऑनलाइन शिक्षा के साथ, हम प्रत्येक बच्चे को, उपयुक्त शिक्षा साधन देकर उसके सच्ची संभावना का आभास कराने में सहायता कर सकते हैं। हमें पता है कि बच्चे विजुअल लर्नर, ऑडिटरी लर्नर या प्रायोगिक लर्नर हो सकते हैं। किसी परम्परागत कक्षा संस्थापना में प्रत्येक छात्र की आवश्यकता पर ध्यान देना तथा शिक्षा की ऐसी पद्धति का उपयोग करना संभव नहीं है जो उनमें से किसी को सहज रूप में प्राप्त हो।

आज उपलब्ध मल्टीमीडिया और इंटरएक्टिव प्रौद्योगिकी ऑनलाइन अध्यापन को शैक्षिक प्रणाली अगले स्तर पर ले जाने में सशक्त बनाती है। नए एवं नवप्रवर्तित पाठ्यक्रमों को विभिन्न श्रेणी के छात्रों के अनुकूल बनाया जा सकता है। विकल्पों की उपलब्धता के साथ छात्रों के बेहतर शिक्षा लेने की संभावना है।

मूल नम्यता देना

ऑनलाइन अध्यापन मूल नम्यता देता है: अभी, हमारी शिक्षा अनेक चुनौतियों से घिरी है, जैसे कि-

*हममें से कई व्यक्ति हमारी परीक्षा तथा अंक देने की प्रणाली से ग्रस्त हैं, जो कंठस्थ करने की पद्धति को मौलिकता, नवप्रवर्तन, सामान्य समझ, रचनात्मकता, समस्या समाधान कौशल, महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्य और जोखिम उठाने की क्षमता से ऊपर रखती है।

*इसके अतिरिक्त, परम्परागत कक्षा में पढ़ाना कक्षा के ‘‘औसत’’ छात्र उन्मुखी होना है। यह, पढ़ाई में कमजोर या प्रतिभावान बच्चों के अनुकूल नहीं होती या नहीं हो सकती। इसका अर्थ यह हुआ कि अधिक बुद्धिमान या मेधावी छात्र कक्षा में स्वयं को नीरस मानते हैं और पढ़ाई में रुचि नहीं लेते, जबकि जो छात्र कक्षा के औसतछात्रों के साथ आगे बढऩे में सक्षम नहीं होते वे पीछे रह जाते हैं, क्योंकि वे किसी ऐसी संकल्पना को समझने में सक्षम नहीं होते, जो अगली कक्षा में पढ़ाई जाने वाली दूसरी संकल्पना का आधार होती है।

*किन्हीं कारणों से पढ़ाई के बीच स्कूल छोड़ चुके या जीवन-यापन के लिए जबरन मजदूरी में झोंके गए बच्चों के लिए कक्षा में प्रवेश लेना या कोई लक्ष्य स्थापित करना मात्र एक सपना ही रह जाता है।

ऑनलाइन अध्यापन, हमें इन सभी चुनौतियों का तुरंत सामना करने में सक्षम बनाता है। उपग्रह प्रणालियों के माध्यम से अध्यापकों एवं छात्रों के बीच लाइव सम्पर्क साधना संभव है। छात्रों की अपनी आवश्यकताओं के अनुसार लेक्चर किसी भी समय और कहीं से भी रिकॉर्ड किए जा सकते हैं, देखे जा सकते हैं और पुन: देखे जा सकते हैं। इससे छात्रों को अपने अध्ययन की गति को नियंत्रण में रखने में और वे जो भी पढऩा चाहें, तथा जब भी उन्हें समय मिले, पढऩे में सहायता मिलती है।

ऑनलाइन अघ्यापन का स्वरूप आधुनिकता का है और यह छात्रों को किसी विषय के बारे में अधिक शोध करने के लिए तथा उनके अध्ययन का दायित्व लेने के लिए प्रेरित करता है। प्रौद्योगिकी हमें ऐसे परस्पर जुड़े पाठ्यक्रमों का सृजन करने के लिए भी शक्ति सम्पन्न बनाती है जो छात्रों को व्यस्त तथा कार्य प्रेरित बनाए रखने के लिए गेमिंगपद्धति का उपयोग करते हैं। ऐसी शिक्षा, खेल ऐप्स का सृजन किया जा सकता है जिन्हें प्रयोक्ता जब कभी भी आवश्यकता हो, ग्रहण सके।

सरकार की स्वयं पहल के अंतर्गत लक्षित कुछ विषय जिन्हें निष्पादित किया जाना है।

*विभिन्न प्लेटफार्मों के बीच विषय-वस्तु को साझा करना

*एम...सी. में स्थानीय रूप से दिए गए कार्यों तथा मूल्यांकन में तथा इसके विलोमत : अंकों या ग्रेडों को समाविष्ट करना।

*आधार संख्या को जोडऩा।

*अनुशासिक (प्रोक्टोर्ड) ऑनलाइन परीक्षाएं प्रस्तुत करना।

*कक्षा अध्यापन के साथ मिले-जुले एम...सी. के प्रस्ताव की अनुमति देना और

*छात्रों को उनकी मूल भाषाओं में पढ़ाना।

इन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में अर्जित क्रेडिट्स विभिन्न स्कूलों तथा विश्वविद्यालयों में अंतरणीय होंगे।

ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने वाली कुछ अन्य पहल

स्वयं तथा कुशल भारत कार्यक्रम के अतिरिक्त, भारत सरकार ऑनलाइन अध्ययन तथा अध्यापन को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य पहल भी प्रारंभ कर रही है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं।

*आकाश शैक्षिक पोर्टल : यह पोर्टल अध्यापकों के लिए कार्यशालाएं चलाता है। आज के समाज में अधिक प्रासंगिक होने में अध्यापकों, की सहायता करने के लिए इस पोर्टल में प्रौद्योगिकी तथा नवप्रवर्तित शिक्षा-शास्त्र का उपयोग किया जाता है।

*अमृता ई-लर्निंग अनुसंधान प्रयोगशाला : ने ए-व्यू मल्टी-मॉडल तथा मल्टी-मीडिया ई-लर्निंग प्लेटफार्म का विकास किया है, जो अध्यापक से वार्तापहल को प्रारंभ करने के लिए सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा मिशन को सक्षम बनाता है। यह वार्ता कक्षा के वास्तविक अनुभव जैसी है।

*शैक्षिक संचार संघ : यह संघ कला, संस्कृति, साहित्य, भाषा, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन तथा  अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, प्राकृतिक एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान और इंजीनियरी तथा आयुर्विज्ञान में ऑनलाइन पाठ्यक्रम चलाता है। यह संघ प्रकृति नामक पर्यावरण, मानव अधिकार एवं विकास पर एक फिल्म समारोह एवं वीडियो प्रतियोगिता जैसी वार्षिक प्रतियोगिताएं भी आयोजित करता है ताकि भारत में मीडिया केन्द्रों और अन्य शैक्षिक संस्थानों को प्रोत्साहन दिया जा सके।

*ई-कल्प : यह, छात्रों को सही दिशा देने के लिए डिजिटल अध्ययन वातावरण सृजित करने हेतु आई.सी.टी. के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा मिशन के एक भाग के रूप में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रायोजित है। यहां कोई भी व्यक्ति एनीमेशन, फोटोग्राफी, इर्गोनोमिक्स तथा अन्य डिजाइनिंग पाठ्यक्रम कर सकता है।

*ई-यंत्र: पहल का लक्ष्य रोबोटिक्स को इंजीनियरी शिक्षा में शामिल करना और छात्रों को गणित, कंप्यूटर विज्ञान तथा इंजीनियरी सिद्धांतों के आकर्षक व्यावहारिक अनुप्रयोग से जोडऩा है।

*भारतीय संकेत भाषा शिक्षा एवं मान्यता प्रणाली (आई.एस.एल..आर.एस.) : एक ऐसा प्लेटफार्म है जिसका विकास भारतीय बधिर छात्रों के लिए किया जा रहा है। इसे 14 भारतीय भाषाओं में लागू करने का प्रस्ताव है, और इसमें श्रृव्य-दृश्य पद्धति में व्यापक अन्योन्य विशेषताएं होंगी।

*एन.पी.टी..एल. : ई-लर्निंग कार्यक्रम चलाता है, जिसके अंतर्गत इंजीनियरी, विज्ञान एवं मानविकी विषयों में ऑनलाइन वेब तथा वीडियो पाठ्यक्रम पढ़ाए जाते हैं।

*शिक्षा शास्त्र परियोजना : छ: मुख्य इंजीनियरी विषयों में 4 वर्षीय डिग्री कार्यक्रमों के लिए छात्र-केंद्रिक पाठ्य-वृत्त का विकास करने के लिए एक प्रायोगिक परियोजना है।

*परियोजना ऑस्कर : स्कूल एवं कॉलेज स्तर के गणित एवं विज्ञान विषयों के लिए वेब-आधारित इंटरएक्टिव एनीमेशन तथा सिमुलेशन्स के एक विशाल भंडार के रूप में चलाई गई है। ये एनीमेशन वैज्ञानिक संकल्पनाओं को अधिक आसानी से समझने में छात्रों की सहायता करेंगे।

*द स्पोकन टुटोरियलपरियोजना : अध्यापक से वार्तापहल का एक भाग है और इसका लक्ष्य सॉफ्टवेयर विकास को बढ़ावा देना है। यहां पाठ्यक्रम नि:शुल्क एवं मुक्त स्रोत सॉफ्टवेयर (एफ..एस.एस.) के बारे में लिनक्स, स्किलैब, लेटैक्स, पी.एच.पी. तथा माइस्क्वल, जावा, सी/सी++, लाइनर ऑफिस आदि जैसे हैं।

*वर्चुअल लैब्स: अधिस्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों एवं शोध छात्रों को विज्ञान एवं इंजीनियरी प्रयोगशालाओं में दूरस्थ क्षेत्रों से पहुंच दिलाने वाली मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की एक पहल है।

*वर्चुअल लर्निंग एनवायरमेंट : आजीवन अध्ययन संस्थान, दिल्ली विश्वविद्यालय की एक पहल है। इसमें अधिस्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाए जाने वाले कई विषयों के लिए ई-रिसोर्सेस शामिल हैं।

 

(लेखिका एक स्तंभकार हैं। ई-मेल: poorviprakash@gmail.com)