विशेष लेख


Special Article Volume-34

इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री ने कर्मचारियों को दिलायी स्वच्छता की शपथ

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी तथा विधि और न्याय राज्यमंत्री पीपी चौधरी ने स्वच्छता पखवाड़ा के आरंभ में कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलायी। कर्मचारियों ने यह संकल्प भी किया कि वे सैंकड़ों अन्य देशवासियों को इस तरह की शपथ लेने के लिये प्रेरित करेंगे। श्री चौधरी ने इस मौके पर कहा कि अकेले नागरिक प्रशासन भारत को स्वच्छ और रोगमुक्त नहीं बना सकता। इसलिये स्वच्छता को राष्ट्रीय अभियान बनाना पड़ेगा जिसमें हर भारतीय शामिल हो।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव अरुणा सुंदरराजन की मौजूदगी में दिलायी गयी शपथ में कहा गया, ‘‘महात्मा गांधी ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था जो सिर्फ आजाद ही नहीं बल्कि स्वच्छ और विकसित भी हो। उन्होंने भारत माता के लिये स्वतंत्रता हासिल की। अब हमारा दायित्व है कि देश को साफ सुथरा रख कर भारत माता की सेवा करें।

‘‘मैं शपथ लेता हूं कि स्वच्छता के प्रति समर्पित रह कर इसके लिये समय दूंगा। मैं हर साल 100 यानी हरेक हफ्ता दो घंटे अपनेआप स्वच्छता के लिये काम करने पर लगाऊंगा। मैं न तो कूड़ा फैलाऊंगा और न दूसरों को ऐसा करने दूंगा। मैं स्वच्छता के लिये प्रयास खुद से तथा अपने परिवार, आसपड़ोस, गांव और कार्य स्थल से करूंगा।

‘‘मेरे विचार से स्वच्छ दिखने वाले देश ऐसा इसलिये हैं कि उनके नागरिक न तो कूड़ा फैलाते और न ही दूसरों को ऐसा करने देते हैं। इस विश्वास के साथ मैं स्वच्छ भारत अभियान के संदेश को गांवों और शहरों में फैलाऊंगा।

‘‘मैं 100 अन्य लोगों को भी यह शपथ लेने के लिये प्रेरित करूंगा। मैं कोशिश करूंगा कि वे भी साल में 100 घंटे स्वच्छता को समर्पित करें। मुझे विश्वास है कि स्वच्छता के लिये उठाया गया मेरा हर कदम मेरे देश को साफ सुथरा बनाने में मददगार होगा।’’

खाद्य विभाग ने स्वच्छता का संदेश फैलाने के लिये किये नुक्कड़ नाटक

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने 16 से 31 अक्टूबर तक मनाये गये स्वच्छता पखवाड़े के दौरान अनेक विशेष कार्यक्रम आयोजित किये। इन कार्यक्रमों का मकसद बेहतर पर्यावरण और कार्य वातावरण को बढ़ावा देना तथा सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों को स्वच्छता और स्वास्थ्य के फायदों के बारे में बताना था।

विभाग ने 17 और 27 अक्टूबर को नयी दिल्ली के कृषि भवन में नुक्कड़ नाटक आयोजित किये।

कर्मचारियों के बच्चों के लिये 23 अक्टूबर को चित्रांकन और पेंटिंग प्रतियोगिता रखी गयी।

इसके अलावा 25 अक्टूबर को स्वच्छता पर लेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

कृषि भवन में 27 अक्टूबर को रक्त दान शिविर लगाया गया जिसका उद्घाटन खाद्य और सार्वजनिक वितरण सचिव वृंदा सरूप ने किया। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के अलावा कृषि भवन और नजदीकी शास्त्री भवन स्थित अन्य मंत्रालयों और विभागों के कर्मचारियों ने भी शिविर में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। उन्होंने खुद खून देने के अलावा दूसरों को भी रक्त दान के लिये प्रेरित किया। शिविर में कुल 56 व्यक्तियों ने रक्त दान किया। सभी रक्तदाताओं और अन्य भागीदारों को पौष्टिक नाश्ता उपलब्ध कराया गया।

स्वच्छ भारत महिला सम्मेलन में सम्मानित की गयीं स्वच्छता चैंपियन महिलाएं

पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने हाल ही में स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण) (एसबीएमजी) की महिला चैंपियनों का एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। संयुक्तराष्ट्र बाल कोष के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य ग्रामीण स्वच्छता में महिला चैंपियनों के योगदान को मान्यता देना तथा प्रशंसित और पुरस्कृत करना था। सम्मेलन में एसबीएमजी के तहत उठाये गये सर्वोत्कृष्ट कदमों की जानकारी दी गयी। साथ ही देश के उन हिस्सों में ग्रामीण स्वच्छता के प्रयासों को सम्मानित किया गया जहां महिलाएं इस अभियान में नेतृत्वकारी भूमिका में हैं। इस क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाली लगभग 300 महिला सरपंचों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, प्रखंड विकास अधिकारियों और सहायक जिला कलक्टरों ने सम्मेलन में हिस्सा लिया। 

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, ग्रामीण विकास, पंचायती राज तथा पेयजल और स्वच्छता मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, राज्यमंत्री रमेश चंदप्पा जिगाजीनागी, खाद्य और सार्वजनिक आपूर्ति सचिव वृंदा सरूप, हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव नवराज संधू तथा भारतीय स्टेट बैंक की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अरुंधति भट्टाचार्य ने भी सम्मेलन में शिरकत की। मशहूर फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन ने एसबीएमजी की महिला चैंपियनों के नाम अपना एक रिकॉर्डेड वीडियो संदेश भेजा।

श्रीमती महाजन ने मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में सम्मेलन में मौजूद महिला सरपंचों के कामकाज की सराहना की। उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार भारत ने ऐसा प्रधानमंत्री चुना है जिसने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने पहले भाषण में देश भर में शौचालयों की जरूरत की बात की। उन्होंने इसे महान शुरुआत बताते हुए कहा कि खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) भारत की परिकल्पना में सिर्फ शौचालय बनाने ही नहीं बल्कि उनके इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में लडक़ों और लड़कियों के वास्ते अलग-अलग शौचालय बनाये जाने चाहिये ताकि किशोरियां पढ़ाई छोडऩे के लिये मजबूर नहीं हों।

श्री तोमर ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि देश के अनेक हिस्सों में एसबीएमजी के योजना निर्माण, उस पर अमल और निगरानी में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं। उन्होंने अपने क्षेत्रों में स्वच्छता का कवरेज बढ़ाने के लिये ग्रामीण महिलाओं की प्रतिबद्धता और मेहनत की तारीफ की। उन्होंने बताया कि देश के जिन हिस्सों में सरपंच, जिला पंचायत की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कलक्टर महिलाएं हैं उनमें एसबीएमजी की प्रगति की रफ्तार कई गुना तेज है। उन्होंने सभी महिलाओं और पुरुषों से भारत को खुले में शौच की प्रथा से मुक्त बनाने में योगदान करने की अपील करते हुए कहा कि हर किसी को इस दिशा में समर्पण के साथ काम करना चाहिये।

श्री बच्चन ने अपने वीडियो संदेश में उन गांवों में महिलाओं के सामने आने वाली दिक्कतों का जिक्र किया जिनमें खुले में शौच की प्रथा अब भी बरकरार है। उन्होंने उन महिलाओं की कोशिशों को सराहा जो अपने गांवों और ग्राम पंचायतों में एसबीएमजी का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने पुरुषों से कहा कि वे स्वच्छता को सिर्फ महिलाओं का मुद्दा नहीं समझें। उन्हें स्वच्छ भारत की राह में महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलना चाहिये।

पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वरन अय्यर ने अपने घरों, गांवों और जिलों में शौचालयों के निर्माण और इस्तेमाल की कोशिशों का नेतृत्व करने वाली महिलाओं के कामकाज की तारीफ की। उन्होंने इस मुहिम में महिला स्वयंसेवी समूह प्रमुखों, निचले स्तर के सरकारी अधिकारियों और सिविल सोसायटी कार्यकर्ताओं के प्रयासों की भी सराहना की।

सुश्री सरूप ने घरों को स्वच्छ रखने में महिलाओं की पारंपरिक केन्द्रीय भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि इसका सामुदायिक स्तर तक विस्तार किया जाना चाहिये। उन्होंने स्थानीय निकायों की सभी निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों से कहा कि वे स्वच्छता के मुद्दे को हर संभव सार्वजनिक मंच पर उठायें।

हरियाणा में स्वच्छता क्रांति का नेतृत्व करने वाली सुश्री संधू ने राज्य में एसबीएमजी में हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हरियाणा के 55 प्रतिशत गांव और सात जिले खुले में शौच की प्रथा से मुक्त घोषित किये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा को इस प्रथा से मुक्ति दिलाने में महिलाएं सक्रिय और नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं। सुश्री संधू ने विश्वास जाहिर किया कि यह राज्य 2017 की शुरुआत तक खुले में शौच की प्रथा से पूरी तरह मुक्त हो जायेगा।

सुश्री भट्टाचार्य ने अपने संबोधन में देश में पंचायत पतिकी संस्कृति का उल्लेख किया। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद सरपंचों से कहा कि वे अपने पद से जुड़े प्रशासनिक कार्यकलापों में सीधे तौर पर और सक्रियता से हिस्सा लें। उन्होंने एसबीएमजी की सफलता में महिला चैम्पियनों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि परिवार की एक महिला के उत्पादक हो जाने से समूचे कुटुंब को कितना लाभ होता है, इस बात को वह एक बैंकर होने के नाते भलीभांति समझती हैं।

सम्मेलन के दौरान किशोरियों में स्वच्छता का मसला और मासिक स्राव स्वास्थ्य प्रबंधन’, ‘स्वच्छता और इसकी निरंतरता में लैंगिक मसलेतथा स्वच्छता से संबंधित सामाजिक और व्यावहारिक बदलावविषयों पर तीन विशेष सत्र आयोजित किये गये। इन सत्रों में देश भर की महिला सरपंचों और निचले स्तर की कार्यकर्ताओं ने अपने गांवों को खुले में शौच की प्रथा से मुक्त बनाने की मुहिम के दौरान सामने आई परेशानियों को आपस में साझा किया।

 

-रोस