भारत में व्यवसाय प्रबंधन में रोजगार के उत्कृष्ट अवसर
शिक्षा अध्ययनकर्ताओं को अपना जीवन बृहत्तर सक्षमता तथा पूर्ण विश्वास
के साथ जीने में मददगार होती है। ऐसा तभी संभव हो सकता है जब यह अच्छी गुणवत्ता
से परिपूर्ण हो तथा शिक्षण प्रक्रिया भी एक सकारात्मक और मददगारपूर्ण प्रकृति की हो, जहां वास्तविक रूप में अध्ययन कराया जाता है। आज की दुनिया बहुत संश्लिष्ट है तथा ज्ञान का विकास बहुत तेजी के साथ हो रहा है अतः अध्ययन कार्य जीवन-पर्यन्त चलते रहना चाहिए।
व्यवसाय प्रबंध्न के छात्रों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि दिन-ब-दिन होने वाले परिवर्तनों, विभिन्न प्रकार के संबंधें, कई तरह की सूचनाओं तथा विविध्ताओं और विभेद का वे किस तरह से सामना करें।
शिक्षा और रोजगार
शिक्षा में स्वगुणार्थ व्यापकता है। ज्ञान, कौशल, प्रशिक्षण, अनुभव, अभिरुचि आदि के आधर पर
इसकी भिन्न-भिन्न व्याख्याएं हैं। यह किसी व्यक्ति विशेष के विकास और एक नागरिक के रूप
में अपने कर्त्तव्यों के पालन हेतु की गई तैयारियों का निरूपण होता है। शिक्षा एक सतत और जीवनभर
चलने वाली प्रक्रिया है। यह एक सचेतन, सुविचारित और नियोजित प्रक्रिया है जिसे विशिष्ट ज्ञान
और कौशल प्रदान करने के वास्ते वांछनीय और सामाजिक रूप से स्वीकार्य मार्ग प्रशस्त करने के
लिए परिवर्तित व्यवहार हेतु तैयार किया जाता है।
शिक्षा का लक्ष्य
शिक्षा के कई भिन्न लक्ष्य या उद्देश्य हैं :
स निजी लक्ष्य : व्यक्ति-विशेष के विकास के लिए योगदान करना, ताकि वह स्वावलंबी बन
सके।
स सामाजिक लक्ष्य : नागरिकता, सामाजिक दक्षता और समाज सेवा के लिए शिक्षा प्रदान करनास
ज्ञान लक्ष्य : यह संगत ज्ञान की प्राप्ति से संबंध्ति है।
स नैतिक लक्ष्य : यह चरित्रा निर्माण से संबंध्ति है।
स व्यावसायिक लक्ष्य : यह उत्पादक रोजगार के जरिए आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सम्पत्ति
के लिए योगदान के वास्ते व्यक्तियों को तैयार करने से संबंध्ति है।
शिक्षा आयोग ;1964-66 ने कहा है कि शिक्षा लोगों के जीवन, आवश्यकताओं और आकांक्षाओं
से संबंध्ति होनी चाहिए और यह शिक्षा राष्ट्रीय लक्ष्यों का अहसास कराने के लिए जरूरी सामाजिक
आर्थिक और सांस्कृतिक बदलाव का एक शक्तिशाली उपकरण होना चाहिए।
शैक्षिक मनोवैज्ञानिकों के अनुसार शिक्षा से व्यवहार में परिवर्तन आना चाहिए, सामान्य और उच्चतर
शिक्षा से निम्नलिखित सीख प्राप्त होनी चाहिए : दूसरों का सम्मान करना, विविध् तरह की
सहनशीलता, देश का एक अच्छा जिम्मेदार नागरिक बनना, पर्यावरण की सुरक्षा, हमारे दुर्लभ
संसाध्नों का संरक्षण, सत्य बोलना, ईमानदार होना तथा गौरव और उमंग के साथ व्यवसाय का
संचालन करना।
शिक्षा और रोजगार के बीच तथा शैक्षणिक नियोजन और मानवशक्ति के नियोजन के बीच
पारस्परिक संबंध् है। रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों के लिए अपेक्षित ज्ञान और कौशल तथा शिक्षा क्षेत्रा
द्वारा प्रदत्त ढांचे, विषयवस्तु तथा शिक्षण अध्ययन प्रक्रियाओं के बीच सदृश्यता होनी चाहिए। किसी
भी तरह की बेमेल स्थिति से बेरोजगारी या कम रोजगार तथा हताशा और सामाजिक असंतोष पनपता
है। अतः व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटना तथा
पुनर्निवेशन परिपथ उपलब्ध् कराना बहुत जरूरी है।
प्राचीन परपरा में शिक्षा केवल रोज+गार प्राप्ति की तैयारी करना नहीं था। औद्योगिक काल की शुरुआत
के बाद से रोज+गार के लिए औपचारिक शिक्षा पूर्वापेक्षित है। शिक्षित और प्रशिक्षित मानवशक्ति
की आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रोजगार एक ऐसा क्षेत्र है जहां
कोई व्यक्ति अपने व्यस्क जीवन का ज्यादातर हिस्सा व्यतीत करता है। रोजगार क्षेत्र के विभिन्न
उपक्षेत्रा हैं : कृषिक, विनिर्माण, व्यवसाय, वित्तीय, सामाजिक और लोक सेवा आदि। एक दक्ष श्रम
बाजार से नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों की आवश्यकताओं की पूर्ति होनी चाहिए। रोजगार
क्षेत्रा को कार्य बल की अनुकूलनशीलता को प्रोत्साहन देने के लिए अवसर और प्रोत्साहन दोनों के
उत्कर्ष के लिए कार्य करना चाहिए।
व्यवसाय
व्यवसाय प्रबंध्न आज सर्वाध्कि लोकप्रिय कॅरिअर हो गया है। रोजगार बाजार में रोजगार चाहने
वालों के लिए इसने विविध् क्षेत्राों में असीमित अवसर खोल दिये हैं और अच्छा पारिश्रमिक, दर्जा
के साथ-साथ व्यावसायिक तथा निजी उन्नति की संभावनाएं भी बढ़ा दी हैं। इसके अलावा इस
उपलब्ध्ि उन्मुख व्यवसाय में, जहां अनुभव से ज्यादा परिणामों की कीमत होती है, उदीयमान और
परिश्रमी युवा तेजी के साथ सर्वोच्च पदों पर पहुंच जाते हैं।
व्यवसाय प्रबंध्न में व्यावसायिक प्रबंध्कों का कार्य क्षेत्रा व्यक्ति-विशेष के कौशल तथा विशेषज्ञता
पर निर्भर करता है और यह सामान्यतः पांच परिभाषित कार्य क्षेत्रों में संचालित होता है। ये एक
संगठन से दूसरे संगठन में मामूली तौर पर थोड़ा भिन्न हो सकते हैं।
स कार्मिक प्रबंध्न या मानव संसाध्न विकास
स वित्त
स उत्पादन एवं प्रचालन
स बिक्री एवं विपणन
स प्रबंध्न सूचना प्रणालियां ;एमआईएसद्ध
व्यवसाय प्रबंध्न में कुछेक विशेष कार्य क्षेत्रा भी हैं जो कि एक खास किस्म का व्यवसाय प्रबंधन है।
स अंतर्राष्ट्रीय प्रबंध्न - अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड एवं व्यापार के सभी क्षेत्रों से जुड़े कार्य
स सार्वजनिक प्रणाली प्रबंध्न - सार्वजनिक उद्यमों, गैर सरकारी संगठनों तथा सहकारी
संस्थाओं का प्रबंध्न
स प्रचालन अनुसंधन - वित्तीय तथा उत्पादन कठिनाइयों को हल करने के लिए गणितीय
विश्लेषण का प्रयोग करना
स प्रौद्योगिकी प्रबंध्न - वित्त एवं विपणन सहित प्रौद्योगिकी के सभी क्षेत्रों में विशेषज्ञतास
प्रबंध्न परामर्श - कम्पनी की नीतियों, प्रक्रियाओं और प(तियों से जुड़ी समस्याओं की
पहचान तथा उनके सुधर का दायित्व
स अस्पताल प्रबंध्न - अस्पतालों और स्वास्थ्य देखभाल संबंधी संगठनों के दक्षतापूर्ण संचालन
हेतु जिम्मेदार
स होटल प्रबंध् - आतिथ्य और होटल प्रशासन के सभी पहलुओं पर केन्द्रित
स ग्रामीण प्रबंध् - कृषि आधरित तथा अन्य ग्रामीण उद्योगों के लिए, ग्रामीण उत्पादों की
मार्केटिंग सहित प्रबंधन व्यवहारों का प्रयोग करना
स वन प्रबंधन - वन संबंधी परियोजनाओं तथा वन विकास हेतु उत्पादों के प्रशासन और विपणन
की देखरेख की जिम्मेदारी
स आपदा प्रबंधन - इसके अंतर्गत प्राकृतिक आपदाओं के समय सक्रियता के साथ कार्य करना
होता है तथा आपदा ग्रस्त लोगों के लिए पुनर्निमाण तथा पुनर्वास कार्य करना होता है और
राहत सामग्री तथा अन्य संसाध्नों का प्रबंध् करना होता है
स अवकाश एवं समारोह प्रबंधन - अवकाश से संबंध्ति गतिविधियों , क्लबों, पार्कों तथा
घटनाक्रमों का प्रबंधन।
व्यवसाय प्रबंधन हेतु पात्राता
व्यवसाय प्रबंधन में स्नातक स्तर के अध्ययन के वास्ते किसी भी विषय क्षेत्रा में ग्प्प्वीं में अच्छे अंक
प्रतिशत का होना अपेक्षित होता है। लेकिन कॉमर्स, अर्थशास्त्र और गणित जैसे विषयों से व्यवसाय
अध्ययन उम्मीदवार के लिए सरल होता है। चयन के अंकों या प्रवेश परीक्षा के जरिए होता
है।
स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए किसी भी विषय क्षेत्रा में स्नातक डिग्री ;बीए, बीएससी या बी.टैक
के साथ-साथ चयन प्रवेश परीक्षा को उत्तीर्ण करना होता है। ज्यादातर मास्टर्स कार्यक्रमों के लिए
उन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन पाठ्यक्रमों के समकक्ष रखने के लिए न्यूनतम दो वर्ष का कार्यानुभव आरंभ
किए जाने की संभावना है।
प्रबंधन पाठ्यक्रमों की अवधि
स्नातकपूर्व अध्ययन ;बीबीए : 3 वर्ष
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम ;एमबीए : 2 वर्ष
अंश-कालिक पाठ्यक्रम ;एमबीए : 1-3 वर्ष
1994-95 और 2006-07 के दौरान भारत में प्रबंधन शिक्षा का विकास ;सारणी-1
वर्ष संस्थानों की संख्या कुल सीटें 1994-95 312 26,874
2006-07 1,132, 94,704
क्षेत्रावार प्रबंधन संस्थानों का वितरण और सीटें
;एमबीए/पीजीडीएम वर्ष 2006 - 2007;सारणी-2
क्र. क्षेत्रा संस्थानों प्रति- कुल सीटें प्रति संस्थान
सं. की सं. शतता एमबीए/ औसत
पीजीडीएम सीटें
1 मध्य क्षेत्र ;म.प्र., गुजरात, 91 8.04 7,275 80
छत्तीसगढ़
2 पूर्वी क्षेत्रा ;प. बंगाल, उड़ीसा 78 6.89 7
झारखंड, उत्तर पश्चिमद्ध
3 उत्तरी क्षेत्र ;उ.प्र., 137 12.10 16,170 118
उत्तराखण्ड, बिहार
4 उत्तर पश्चिमी क्षेत्र ;दिल्ली 183 16.17 14,085 77
राजस्थान, हरियाणा, पंजाब
हि.प्र., ज. एवं क.
5 दक्षिणी क्षेत्र ;आ.प्र., 374 33.04 24,850 66
तमिलनाडु, पुदुच्चेरी
6 दक्षिण पश्चिमी क्षेत्र 123 10.86 9,107 74
;कर्नाटक, केरल
7 पश्चिमी क्षेत्र ;महाराष्ट्र, 146 12.10 16,122 110
गोवा, दमण एवं दीव
अखिल भारतीय 1,132 100 94,704 84
विशेषीकृत राष्ट्रीय संस्थान
अहमदाबाद, बंगलौर, कोलकाता, लखनऊ, इंदौर और कोझीकोड ;कालीकट में स्थित
आईआईएम स्वायत्त संस्थान हैं, जिन्हें भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया है। देश में उन्हें
प्रमुख व्यावसायिक विद्यालयों के रूप में गिना जाता है तथा उनके यहां प्रशिक्षित छात्रों को विदेश
में कापफी प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
भारत में प्रबंध् संस्थानों की राज्यवार स्थिति 2006 - 2007
क्रम राज्य बी-स्कूलों प्रतिशतता सीटें प्रतिशतता
सं. की संख्या
1 आन्ध्र प्रदेश 222 19.61 14,945 15.७८
2 तमिलनाडु 150 13.25 9,785 10.33
3 महाराष्ट्र 144 12.72 15,912 16.80
4 उत्तर प्रदेश 111 980 14,175 14.96
5 कर्नाटक 91 8.04 6,152 7.34
6 राजस्थान 62 5.48 4,230 4.47
7 मध्य प्रदेश 48 4.24 3,840 4.05
8 पंजाब 41 3.62 3,070 3.24
9 गुजरात 38 3.36 3,075 3.25
10 उड़ीसा 37 3.27 3,178 3.36
11 हरियाणा 36 3.184 2,615 2.76
12 नई दिल्ली 33 2.91 3,560 3.76
13 केरल 32 2.82 2,155 2.28
14 पश्चिम बंगाल 25 2.21 2,445 2.58
15 उत्तराखंड 16 1.41 945 0.19
16 बिहार 10 0.88 1,050 1.11
17 जम्मू एवं कश्मीर 8 0.71 440 0.46
18 झारखंड 7 0.62 975 1.03
19 असम 6 0.53 337 0.35
20 छत्तीसगढ़ 5 0.45 360 0.38
21 हिमाचल प्रदेश 3 0.26 180 0.19
22 गोवा 2 0.18 210 0.22
23 पांडिचेरी 2 0.18 180 0.13
24 त्रिअपुरा 1 0.09 60 0.06
25 मणिपुर 1 0.09 30 0.03
26 नगालैंड 1 0.09 60 0.64
27 मिजोरम शून्य शून्य 0 0
28 सिक्किम शून्य शून्य 0 0
29 मेघालय शून्य शून्य 0 0
30 अरुणाचल प्रदेश शून्य शून्य 0 0
31 अण्डमान एवं निकोबार शून्य शून्य 0 ०
32 चंडीगढ़ शून्य शून्य 0 0
33 दमन एवं दीव शून्य शून्य 0 0
कुल 1,132 100 94,704 100
;सारणी-3
: अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद/पुस्तिका सारणी- 1 - 2 -3
वेतन पैकेज की तुलना
व्यावसायिक डिग्री की अपनी साख होती है तथा बैचलर ;प्रोपफे. और एमबीए योग्यताधरी
सर्वाध्कि वेतन प्राप्त करने वालों में गिने जाते हैं
सर्वोच्च प्रबंध्कीय स्तर पर मास्टर्स योग्यता रखने वाले व्यक्ति भी तुलनीय वेतन अर्जित कर
रहे हैं :
;नीचे सारणी देखें
सेल्स/व्यवसाय विकास
योग्यता स्नातक स्नातक ;प्रोपफे.द्ध एमबीए
सेल्स एग्जिक्यूटिव 2.35 2.51 2.76
व्यवसाय विकास प्रबंध्क 7.14 8.57 9.01
बिक्री प्रमुख - 26.55 30.22
विपणन
योग्यता स्नातक स्नातक ;प्रोपफे. एमबीए
बाजार सम्प्रेषण प्रबंध्न 4.36 5.49 6.61
विपणन प्रबंध्क 6.44 8.12 8.78
मुख्य विपणन अधिकारी - 29.08 31.87
मानव संसाध्न प्रबंधन
योग्यता स्नातक स्नातक ;प्रोपफे. एमबीए
सहायक प्रबंध्क 3.26 3.29 3.73
प्रबंध्क - मानव संसाधन 7.92 8.53 9.88
प्रमुख - मानव संसाध्न 23.63 27.35 30.26
वित्त
स्नातक मास्टर्स ;प्रोपफे.एमबीए
लेखाकार 2.30 2.74 2.32
वित्त नियंत्राक 15.79 18.69 23.63
मुख्य वित्त अध्किअरी - 27.41 33.05
अनुभव तथा बी-स्कूल मामलों के प्रकार
आईटी नियोक्ता टाइप ए शिक्षण संस्थानों से ;एमबीएद्ध कर्मचारियों के चयन को स्पष्ट रूप
से प्राथमिकता देते हैं. टाइप ए संस्थानों में प्रमुख बी-स्कूल जैसे कि आईआईटी, आईआईएम
तथा एनआईटी आदि शामिल हैं.
50 प्रतिशत से अधिक कुछेक मामलों में वेतन कापफी अच्छा रहता है। सर्वोच्च प्रबंध्कीय पद
के लिए अपेक्षित योग्यता के रूप में सापफ तौर पर एमबीए की मांग होती है। यहां भी वेतन निर्धारण
में संस्थान के प्रकार की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण होती है।
अनुभव का महत्व
योग्यता स्नातक स्नातक मास्टर मास्टर एमबीए
;टिप्पणी : वेतन संबंधी सभी आंकड़े लाखों में हैं.
इस रिपोर्ट में प्रयुक्त वेतन संबंधी आंकड़े पद विशेष का मध्यम स्तर का वेतन हैरोजगार
की संभावनाएं
ताजा प्रबंध् स्नातकों की भर्ती सामान्यतः कैम्पस से ही की जाती है। निगमित संगठन, बहुर्राष्ट्रीय
कम्पनियां, विदेशी बैंक, विदेशी वित्तीय संस्थान तथा अन्य संगठन आकर्षक वेतन के साथ
सर्वोच्च प्रबंध्न पदों के लिए छात्रों को अमन्त्रिअत करते हैं. ज्यादातर बिजनेस स्कूलों ने स्नातक
योग्यता पूरी करने वाले छात्रों के लाभ के लिए कैरिऍर प्लेसमेंट योजनाएं शुरू की हैं. एमबीए
डिग्री धरी निम्नलिखित छात्रों में एग्जिक्यूटिव या सहायक प्रबंध्क के रूप में कार्य शुरू कर
सकते हैं :-
स बैंक
स वित्तीय संगठन
स सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम
स औद्योगिक घराने
स व्यावसायिक घराने
स निर्यात कम्पनियां
स बहुर्राष्ट्रीय कम्पनियां
स विपणन संगठन
पारिश्रमिक
एमबीए करने वालों के लिए आज पारिश्रमिक का पैकेज सबसे ज्यादा है क्योंकि सुप्रशिक्षित
प्रबंध्कों की आज भी प्रबल कमी है। शुरूआती वेतन और अनुलाभ प्रशिक्षण संस्थान तथा
उम्मीदवार की योग्यता तथा भर्ती संगठन की प्रतिष्ठा और आकार के अनुरूप भिन्न-भिन्न होते
हैं। ये 8000 रु. प्रतिमाह से लेकर आईआईएम स्नातकों के मामले में 1,50,000 रु. प्रतिमाह तक
हो सकता है। एमबीए डिग्री के साथ अतिरिक्त योग्यताएं जैसे कि चार्टर्ड अकाउण्टेंसी ;सीएद्ध,
इंडियन कोस्ट एंड वर्क्स अकाउण्टेंसी ;आईसीडब्ल्यूएद्ध, कम्पनी सचिव ;सीएसद्ध या चार्टर्ड
पफाइनेंस एनॉलिस्ट ;सीएपफएद्ध आदि से उम्मीदवार के अर्जन क्षमता बढ़ जाती है।
निष्कर्ष
१९९४ के बाद प्रबंध् शिक्षा के तीव्र विस्तार से शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखना अनिवार्य
हो गया है। मानव संसाध्न विकास मंत्राालय, एआईसीटीई तथा एमबीए आदि प्रबंध् शिक्षा के
स्तर का निर्धरण करने तथा गुणवत्ता अश्वासन हेतु नियामक एजेंसियों के रूप में काम कर
रहे हैं। वर्तमान में भारतीय-बी-स्कूल विभिन्न प्रकृतियों के हैं। विश्व स्तरीय गुणवत्ता वाले
आईआईएम तथा कई अन्य सुपर-लीग मैनेजमेंट स्कूल हैं। दूसरी तरपफ ऐसे भी बिजनेस स्कूल
हैं जो गुणवत्ता के प्रति गंभीर नहीं है।
इस शिक्षा क्षेत्र में, विस्तार के बावजूद 17 से 25 वर्ष की आयु वर्ग की 20 करोड़ से अध्कि
जनसंख्या के वास्ते और अध्कि संख्या में प्रबंध्न स्कूलों की आवश्यकता है। इसके अलावा
भारत के पास शिक्षा के निर्यात की व्यापक क्षमताएं हैं लेकिन इसके विपरीत पहुंच की कमी
के कारण प्रति वर्ष करीब 140000 छात्रा हर साल उच्चतर शिक्षा के लिए विदेशों में जाते हैं
जिससे प्रति वर्ष 4 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा बाहर चली जाती है। यह दर्शाता है कि भारत में
तीव्रता के साथ गुणवत्ता युक्त प्रबंध् संस्थानों के विकास की आवश्यकता है।